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गुरुवार, अगस्त 07, 2014

पुत्रदा (पवित्रा) एकादशी व्रत की पौराणिक कथा Pausha Putrada Ekadashi

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पुत्रदा (पवित्रा) एकादशी व्रत की पौराणिक कथा
लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (अगस्त-2014)
श्रावण : शुक्ल पक्ष
एक बार युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से पूछते हैं, हे भगवान! श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इसमें किस देवता की पूजा की जाती है और इसका व्रत करने से क्या फल मिलता है ?" व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। अब आप शांतिपूर्वक इस व्रतकी कथा सुनिए। इसके सुनने मात्र से ही वाजपेयी यज्ञ / अनन्त यज्ञ का फल मिलता है।
द्वापर युग के आरंभ में महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महिष्मती नाम का राजा राज्य करता था, लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई।
वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुलाया और कहा- हे प्रजाजनों! मेरे खजाने में अन्याय से उपार्जन किया हुआ धन नहीं है। न मैंने कभी देवताओं तथा ब्राह्मणों का धन छीना है। किसी दूसरे की धरोहर भी मैंने नहीं ‍ली, प्रजा को पुत्र के समान पालता रहा। मैं अपराधियों को पुत्र तथा बाँधवों की तरह दंड देता रहा। कभी किसी से घृणा नहीं की। सबको समान माना है। सज्जनों की सदा पूजा करता हूँ। इस प्रकार धर्मयुक्त राज्य करते हुए भी मेरे पु‍त्र नहीं है। सो मैं अत्यंत दु:ख पा रहा हूँ, इसका क्या कारण है?
राजा महिष्मती की इस बात को विचारने के लिए मं‍त्री तथा प्रजा के प्रतिनिधि वन को गए। वहाँ बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के दर्शन किए। राजा की उत्तम कामना की पूर्ति के लिए किसी श्रेष्ठ तपस्वी मुनि को खोजते-फिरते रहे। एक आश्रम में उन्होंने एक अत्यंत वयोवृद्ध धर्म के ज्ञाता, बड़े तपस्वी, परमात्मा में मन लगाए हुए निराहार, जितेंद्रीय, जितात्मा, जितक्रोध, सनातन धर्म के गूढ़ तत्वों को जानने वाले, समस्त शास्त्रों के ज्ञाता महात्मा लोमश मुनि को देखा, जिनका कल्प के व्यतीत होने पर एक रोम गिरता था।
सबने जाकर ऋषि को प्रणाम किया। उन लोगों को देखकर मुनि ने पूछा कि आप लोग किस कारण से आए हैं? नि:संदेह मैं आप लोगों का हित करूँगा। मेरा जन्म केवल दूसरों के उपकार के लिए हुआ है, इसमें संदेह मत करो।
लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर सब लोग बोले- हे महर्षे! आप हमारी बात जानने में ब्रह्मा से भी अधिक समर्थ हैं। अत: आप हमारे इस संदेह को दूर कीजिए। महिष्मति पुरी का धर्मात्मा राजा महिष्मती प्रजा का पुत्र के समान पालन करता है। फिर भी वह पुत्रहीन होने के कारण दु:खी है।
उन लोगों ने आगे कहा कि हम लोग उसकी प्रजा हैं। अत: उसके दु:ख से हम भी दु:खी हैं। आपके दर्शन से हमें पूर्ण विश्वास है कि हमारा यह संकट अवश्य दूर हो जाएगा क्योंकि महान पुरुषों के दर्शन मात्र से अनेक कष्ट दूर हो जाते हैं। अब आप कृपा करके राजा के पुत्र होने का उपाय बतलाएँ।
यह वार्ता सुनकर ऐसी करुण प्रार्थना सुनकर लोमश ऋषि नेत्र बन्द करके राजा के पूर्व जन्मों पर विचार करने लगे और राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत जानकर कहने लगे कि यह राजा पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य था। निर्धन होने के कारण इसने कई बुरे कर्म किए। यह एक गाँव से दूसरे गाँव व्यापार करने जाया करता था। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन वह दो दिन से भूखा-प्यासा था मध्याह्न के समय, एक जलाशय पर जल पीने गया। उसी स्थान पर एक तत्काल की प्रसूता हुई प्यासी गौ जल पी रही थी।
राजा ने उस प्यासी गाय को जलाशय से जल पीते हुए हटा दिया और स्वयं जल पीने लगा, इसीलिए राजा को यह दु:ख सहना पड़ा। एकादशी के दिन भूखा रहने से वह राजा हुआ और प्यासी गौ को जल पीते हुए हटाने के कारण पुत्र वियोग का दु:ख सहना पड़ रहा है। ऐसा सुनकर सब लोग कहने लगे कि हे ऋषि! शास्त्रों में पापों का प्रायश्चित भी लिखा है। अत: जिस प्रकार राजा का यह पाप नष्ट हो जाए, आप ऐसा उपाय बताइए।
लोमश मुनि कहने लगे कि श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को जिसे पुत्रदा एकादशी भी कहते हैं, तुम सब लोग व्रत करो और रात्रि को जागरण करो तो इससे राजा का यह पूर्व जन्म का पाप नष्ट हो जाएगा, साथ ही राजा को पुत्र की अवश्य प्राप्ति होगी। राजा के समस्त दुःख नष्‍ट हो जायेंगे। "लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर मंत्रियों सहित सारी प्रजा नगर को वापस लौट आई और जब श्रावण शुक्ल एकादशी आई तो ऋषि की आज्ञानुसार सबने पुत्रदा एकादशी का व्रत और जागरण किया।

इसके पश्चात द्वादशी के दिन इसके पुण्य का फल राजा को मिल गया। उस पुण्य के प्रभाव से रानी ने गर्भ धारण किया और नौ महीने के पश्‍चात् ही उसके एक अत्यन्त तेजस्वी पुत्ररत्‍न पैदा हुआ ।
इसलिए हे राजन! इस श्रावण शुक्ल एकादशी का नाम पुत्रदा पड़ा। अत: संतान सुख की इच्छा रखने वाले मनुष्य को चाहिए के वे विधिपूर्वक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करें। इसके माहात्म्य को सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में संतान सुख भोगकर परलोक में स्वर्ग को प्राप्त होता है।
कथा का उद्देश्य : पाप करते समय हम यह नहीं सोचते कि हम क्या कर रहे है, लेकिन शास्‍त्रों से विदित होता है कि हमारे द्वारा किया गये गये छोटे या बडे पाप से हमें कष्‍ट भोगना पड़ता है, अतः हमें पाप से बचना चाहिए। क्योंकि पाप के कारण पीछले जन्म में किया गया कर्म का फल दूसरे जन्म में भी भोगना पड़ सकता हैं। इस लिए हमें चाहिए कि सत्यव्रत का पालन कर ईश्‍वरमें पूर्ण आस्था एवं निष्‍ठा रखे और यह बात सदैव ध्यान रखे कि किसी की भी आत्मा को गल्ती से भी कष्ट ना हो।
  लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई-पत्रिका (अगस्त-2014)



शुक्रवार, दिसंबर 02, 2011

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका दिसंबर- 2011 में प्रकशित लेख

December 2011 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost. गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई पत्रीका ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु, रत्न, मंत्र, यंत्र, तंत्र, कवच इत्यादि प्राचिन गूढ सहस्यो एवं आध्यात्मिक ज्ञान से आपको परिचित कराती हैं।
गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका दिसम्बर - 2011 में प्रकशित लेख
रुद्राक्ष शक्ति विशेष 

अनुक्रम
रुद्राक्ष शक्ति विशेष
रुद्राक्ष की उत्पत्ति
6
रुद्राक्ष धारण करना क्यों कल्याणकारी हैं?
8
1 से 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ
10
रुद्राक्ष के विभिन्न लाभ
21
जन्म नक्षत्र एवं राशि से रुद्राक्ष चयन
23
रुद्राक्ष धारण से कामनापूर्ति
25
रुद्राक्ष धारण करें सावधानियों के साथ। 
29
रुद्राक्ष धारण करने के संक्षिप्त विधि
30
रुद्राक्ष के विषय में विशेष जानकारी
31
असली 1 मुखी से 14 मुखी रुद्राक्ष
20
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
33
अन्य लेख
स्फटिक श्रीयंत्र
28
आंखो से व्यक्तित्व
32
शिव के दस  प्रमुख अवतार
34
श्रीकृष्ण की फोटो से समयाओं का समाधान
35
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
36
हनुमानजी के पूजन से कार्यसिद्धि
37
वास्तु: मानसिक अशांति निवारण उपाय
39
पंचमुखी हनुमान का पूजन उत्तम फलदायी हैं
40
हनुमान बाहुक क पाठ रोग व कष्ट दूर करता हैं
41
गौ सेवा का महत्व
42
माला का महत्व
44
उपवास एवं ज्योतिष
45
चेहरे पर तिल का प्रभाव
47
हमारे उत्पाद
मंत्र सिद्ध पन्ना गणेश
10
गणेश लक्ष्मी यंत्र
12
मंत्र सिद्ध दुर्लभ सामग्री
18
शादी संबंधित समस्या
15
पढा़ई संबंधित समस्या
16
मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र
17
द्वादश महा यंत्र
24
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
33
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
38
दक्षिणावर्ति शंख
38
मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि
49
नवरत्न जड़ित श्री यंत्र
48
मंत्र सिद्ध दैवी यंत्र सूचि
49
सर्व कार्य सिद्धि कवच
50
जैन धर्मके विशिष्ट यंत्र
51
घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र
52
अमोद्य महामृत्युंजय कवच
53
राशी रत्न एवं उपरत्न 
53
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र/ कवच
54
राम रक्षा यंत्र
55
राशि रत्न
60
सर्व रोगनाशक यंत्र/
72
मंत्र सिद्ध कवच
74
YANTRA
75
GEMS STONE
77
मंत्र सिद्ध सामग्री-                                                       65, 66,
67




स्थायी लेख
संपादकीय
4
मासिक राशि फल
56
दिसम्बर 2011 मासिक पंचांग
61
दिसम्बर-2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
63
दिसम्बर 2011 -विशेष योग
68
दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
68
दिन-रात के चौघडिये
69
दिन-रात कि होरा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक
70
ग्रह चलन दिसम्बर -2011
71
सूचना
79
हमारा उद्देश्य
81


DEC-2011
   (File Size : 5.43 MB)


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बुधवार, नवंबर 02, 2011

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका नवम्बर- 2011 में प्रकशित लेख


Nomenber 2011 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost. गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई पत्रीका ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु, रत्न, मंत्र, यंत्र, तंत्र, कवच इत्यादि प्राचिन गूढ सहस्यो एवं आध्यात्मिक ज्ञान से आपको परिचित कराती हैं।wearing gems, Planet gems, gemstone wear, Navratna With Sri Yantra, Navratna, Navratn, gemstone ring, gemstone ring, ring, gemstone pendant, gemstone necklace, gemstone pendant, gemstone mystery, the origin of Ratn, achievement Wearing gems, rubies, pearls, coral, emerald, topaz, diamond, sapphire, Garnet, Cat's Eye, Firoja, Firoza a rare gem, gems and disease prevention by color, nine planets and charity, livelihood and gems, gemstone lore holds receipts, numerology gems, gems from the classical law holds, रत्न धारण, ग्रह रत्न, रत्‍न धारण, नवरत्न जड़ित श्री यंत्र, नवरत्न, नवरत्‍न, रत्न मुद्रिका, रत्न अँगूठी, अंगूठी, रत्न लटकन, रत्न लॉकेट, रत्न लोकेट, रत्‍न रहस्य, रत्नो की उत्पत्ति, रत्न धारण कार्यसिद्धि, माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमेद, लहसुनिया, फ़िरोजा एक विलक्षण रत्न, रत्न एवं रंगों द्वारा रोग निवारण, नवग्रह एवं दान, आजीविका और रत्न, रत्न धारण से विद्या प्राप्ति, अंक ज्योतिष रत्न, शास्त्रोक्त विधान से रत्न धारण, गणेश लक्ष्मी यंत्र, मंत्र सिद्ध दुर्लभ सामग्री, भाग्य लक्ष्मी दिब्बी, द्वादश महा यंत्र, मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र, मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष, कनकधारा यंत्र, मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि, नवरत्न जड़ित श्री यंत्र, मंत्र सिद्ध दैवी यंत्र सूचि, घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र, सर्व कार्य सिद्धि कवच, जैन धर्मके विशिष्ट यंत्र, अमोद्य महामृत्युंजय कवच, राशी रत्न एवं उपरत्न, श्रीकृष्ण बीसा यंत्र/ कवच, राम रक्षा यंत्र, राशि रत्न, मंगलयंत्र से ऋण मुक्ति, सर्व रोगनाशक यंत्र, मंत्र सिद्ध कवच, मंत्र सिद्ध सामग्री,
गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका नवम्बर- 2011 में प्रकशित लेख
रत्न शक्ति विशेष
अनुक्रम
रत्न शक्ति विशेष
रत्न धारण करने से संबंधित सूचना
6
रत्‍नों का अद्भुत रहस्य
7
रत्नो की उत्पत्ति
9
रत्न धारण से अभिष्ट कार्यसिद्धि
11
विशेषज्ञ की सलाह से ही करें रत्न धारण
12
रत्नो का नामकरण
13
माणिक्य
14
मोती
16
मूंगा
19
पन्ना
21
पुखराज
23
हीरा
25
नीलम
27
गोमेद
29
लहसुनिया
31
फ़िरोजा एक विलक्षण रत्न
33
रत्न एवं रंगों द्वारा रोग निवारण
35
ग्रह शांति हेतु करें नवग्रह एवं दान
38
आजीविका और रत्न धारण
36
रत्न धारण से विद्या प्राप्ति
40
सूर्य राशि से रत्न
41
अंक ज्योतिष से जाने शुभ रत्न
42
शास्त्रोक्त विधान से रत्न धारण संबंधित सुझाव
43
सही क्रम में जड़ित नवरत्न हीं धारण करें
44
नवरत्न जड़ित श्री यंत्र
45
रत्न का पूर्ण प्रभावी काल?
46
रत्न द्वारा रोग उपचार
48
हमारे उत्पाद
गणेश लक्ष्मी यंत्र
10
मंत्र सिद्ध दुर्लभ सामग्री
26
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी
27
द्वादश महा यंत्र
30
मंत्रसिद्ध स्फटिक श्री यंत्र
32
मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष
34
शादी संबंधित समस्या
37
पढा़ई संबंधित समस्या
39
कनकधारा यंत्र
42
मंत्रसिद्ध लक्ष्मी यंत्रसूचि
43
नवरत्न जड़ित श्री यंत्र
45
मंत्र सिद्ध दैवी यंत्र सूचि
51
घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र
54
सर्व कार्य सिद्धि कवच
52
जैन धर्मके विशिष्ट यंत्र
53
अमोद्य महामृत्युंजय कवच
55
राशी रत्न एवं उपरत्न 
55
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र/ कवच
56
राम रक्षा यंत्र
57
राशि रत्न
62
मंगलयंत्र से ऋण मुक्ति
67
सर्व रोगनाशक यंत्र/
74
मंत्र सिद्ध कवच
76
YANTRA
77
GEMS STONE
79
मंत्र सिद्ध सामग्री-                                                              67, 68,
69
स्थायी और अन्य लेख
संपादकीय
4
मासिक राशि फल
58
नवम्बर 2011 मासिक पंचांग
63
नवम्बर-2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
65
नवम्बर 2011 -विशेष योग
70
दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
70
दिन-रात के चौघडिये
71
दिन-रात कि होरा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक
72
ग्रह चलन नवम्बर -2011
73
सूचना
81
हमारा उद्देश्य
83

NOV-2011
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રત્ન ધારણ, ગ્રહ રત્ન, રત્‍ન ધારણ, નવરત્ન જડ઼્ઇત શ્રી યંત્ર, નવરત્ન, નવરત્‍ન, રત્ન મુદ્રિકા, રત્ન અઁગૂઠી, અંગૂઠી, રત્ન લટકન, રત્ન લૉકેટ, રત્ન લોકેટ, રત્‍ન રહસ્ય, રત્નો કી ઉત્પત્તિ, રત્ન ધારણ કાર્યસિદ્ધિ, માણિક્ય, મોતી, મૂંગા, પન્ના, પુખરાજ, હીરા, નીલમ, ગોમેદ, લહસુનિયા, ફ઼્ઇરોજા એક વિલક્ષણ રત્ન, રત્ન એવં રંગોં દ્વારા રોગ નિવારણ, નવગ્રહ એવં દાન, આજીવિકા ઔર રત્ન, રત્ન ધારણ સે વિદ્યા પ્રાપ્તિ, અંક જ્યોતિષ રત્ન, શાસ્ત્રોક્ત વિધાન સે રત્ન ધારણ, ગણેશ લક્ષ્મી યંત્ર, મંત્ર સિદ્ધ દુર્લભ સામગ્રી, ભાગ્ય લક્ષ્મી દિબ્બી, દ્વાદશ મહા યંત્ર, મંત્રસિદ્ધ સ્ફટિક શ્રી યંત્ર, મંત્ર સિદ્ધ રૂદ્રાક્ષ, કનકધારા યંત્ર, મંત્રસિદ્ધ લક્ષ્મી યંત્રસૂચિ, નવરત્ન જડ઼્ઇત શ્રી યંત્ર, મંત્ર સિદ્ધ દૈવી યંત્ર સૂચિ, ઘંટાકર્ણ મહાવીર સર્વ સિદ્ધિ મહાયંત્ર, સર્વ કાર્ય સિદ્ધિ કવચ, જૈન ધર્મકે વિશિષ્ટ યંત્ર, અમોદ્ય મહામૃત્યુંજય કવચ, રાશી રત્ન એવં ઉપરત્ન, શ્રીકૃષ્ણ બીસા યંત્ર/ કવચ, રામ રક્ષા યંત્ર, રાશિ રત્ન, મંગલયંત્ર સે ઋણ મુક્તિ, સર્વ રોગનાશક યંત્ર, મંત્ર સિદ્ધ કવચ, મંત્ર સિદ્ધ સામગ્રી, ರತ್ನ ಧಾರಣ, ಗ್ರಹ ರತ್ನ, ರತ್‍ನ ಧಾರಣ, ನವರತ್ನ ಜಡ಼್ಇತ ಶ್ರೀ ಯಂತ್ರ, ನವರತ್ನ, ನವರತ್‍ನ, ರತ್ನ ಮುದ್ರಿಕಾ, ರತ್ನ ಅಂಗೂಠೀ, ಅಂಗೂಠೀ, ರತ್ನ ಲಟಕನ, ರತ್ನ ಲೊಕೇಟ, ರತ್ನ ಲೋಕೇಟ, ರತ್‍ನ ರಹಸ್ಯ, ರತ್ನೋ ಕೀ ಉತ್ಪತ್ತಿ, ರತ್ನ ಧಾರಣ ಕಾರ್ಯಸಿದ್ಧಿ, ಮಾಣಿಕ್ಯ, ಮೋತೀ, ಮೂಂಗಾ, ಪನ್ನಾ, ಪುಖರಾಜ, ಹೀರಾ, ನೀಲಮ, ಗೋಮೇದ, ಲಹಸುನಿಯಾ, ಫ಼ಿರೋಜಾ ಏಕ ವಿಲಕ್ಷಣ ರತ್ನ, ರತ್ನ ಏವಂ ರಂಗೋಂ ದ್ವಾರಾ ರೋಗ ನಿವಾರಣ, ನವಗ್ರಹ ಏವಂ ದಾನ, ಆಜೀವಿಕಾ ಔರ ರತ್ನ, ರತ್ನ ಧಾರಣ ಸೇ ವಿದ್ಯಾ ಪ್ರಾಪ್ತಿ, ಅಂಕ ಜ್ಯೋತಿಷ ರತ್ನ, ಶಾಸ್ತ್ರೋಕ್ತ ವಿಧಾನ ಸೇ ರತ್ನ ಧಾರಣ, ரத்ந தாரண, க்ரஹ ரத்ந, ரத்‍ந தாரண, நவரத்ந ஜடித ஶ்ரீ யம்த்ர, நவரத்ந, நவரத்‍ந, ரத்ந முத்ரிகா, ரத்ந அம்கூடீ, அம்கூடீ, ரத்ந லடகந, ரத்ந லொகேட, ரத்ந லோகேட, ரத்‍ந ரஹஸ்ய, ரத்நோ கீ உத்பத்தி, ரத்ந தாரண கார்யஸித்தி, மாணிக்ய, மோதீ, மூம்கா, பந்நா, புகராஜ, ஹீரா, நீலம, கோமேத, லஹஸுநியா, பிரோஜா ஏக விலக்ஷண ரத்ந, ரத்ந ஏவம் ரம்கோம் த்வாரா ரோக நிவாரண, நவக்ரஹ ஏவம் தாந, ஆஜீவிகா ஔர ரத்ந, ரத்ந தாரண ஸே வித்யா ப்ராப்தி, அம்க ஜ்யோதிஷ ரத்ந, ஶாஸ்த்ரோக்த விதாந ஸே ரத்ந தாரண, రత్న ధారణ, గ్రహ రత్న, రత్‍న ధారణ, నవరత్న జడిత శ్రీ యంత్ర, నవరత్న, నవరత్‍న, రత్న ముద్రికా, రత్న అఁగూఠీ, అంగూఠీ, రత్న లటకన, రత్న లొకేట, రత్న లోకేట, రత్‍న రహస్య, రత్నో కీ ఉత్పత్తి, రత్న ధారణ కార్యసిద్ధి, మాణిక్య, మోతీ, మూంగా, పన్నా, పుఖరాజ, హీరా, నీలమ, గోమేద, లహసునియా, ఫిరోజా ఏక విలక్షణ రత్న, రత్న ఏవం రంగోం ద్వారా రోగ నివారణ, నవగ్రహ ఏవం దాన, ఆజీవికా ఔర రత్న, రత్న ధారణ సే విద్యా ప్రాప్తి, అంక జ్యోతిష రత్న, శాస్త్రోక్త విధాన సే రత్న ధారణ, രത്ന ധാരണ, ഗ്രഹ രത്ന, രത്‍ന ധാരണ, നവരത്ന ജഡിത ശ്രീ യംത്ര, നവരത്ന, നവരത്‍ന, രത്ന മുദ്രികാ, രത്ന അംഗൂഠീ, അംഗൂഠീ, രത്ന ലടകന, രത്ന ലൊകേട, രത്ന ലോകേട, രത്‍ന രഹസ്യ, രത്നോ കീ ഉത്പത്തി, രത്ന ധാരണ കാര്യസിദ്ധി, മാണിക്യ, മോതീ, മൂംഗാ, പന്നാ, പുഖരാജ, ഹീരാ, നീലമ, ഗോമേദ, ലഹസുനിയാ, ഫിരോജാ ഏക വിലക്ഷണ രത്ന, രത്ന ഏവം രംഗോം ദ്വാരാ രോഗ നിവാരണ, നവഗ്രഹ ഏവം ദാന, ആജീവികാ ഔര രത്ന, രത്ന ധാരണ സേ വിദ്യാ പ്രാപ്തി, അംക ജ്യോതിഷ രത്ന, ശാസ്ത്രോക്ത വിധാന സേ രത്ന ധാരണ, ਰਤ੍ਨ ਧਾਰਣ, ਗ੍ਰਹ ਰਤ੍ਨ, ਰਤ੍‍ਨ ਧਾਰਣ, ਨਵਰਤ੍ਨ ਜਡ਼੍ਇਤ ਸ਼੍ਰੀ ਯਂਤ੍ਰ, ਨਵਰਤ੍ਨ, ਨਵਰਤ੍‍ਨ, ਰਤ੍ਨ ਮੁਦ੍ਰਿਕਾ, ਰਤ੍ਨ ਅਁਗੂਠੀ, ਅਂਗੂਠੀ, ਰਤ੍ਨ ਲਟਕਨ, ਰਤ੍ਨ ਲੋਕੇਟ, ਰਤ੍ਨ ਲੋਕੇਟ, ਰਤ੍‍ਨ ਰਹਸ੍ਯ, ਰਤ੍ਨੋ ਕੀ ਉਤ੍ਪੱਤਿ, ਰਤ੍ਨ ਧਾਰਣ ਕਾਰ੍ਯਸਿੱਧਿ, ਮਾਣਿਕ੍ਯ, ਮੋਤੀ, ਮੂਂਗਾ, ਪੰਨਾ, ਪੁਖਰਾਜ, ਹੀਰਾ, ਨੀਲਮ, ਗੋਮੇਦ, ਲਹਸੁਨਿਯਾ, ਫ਼ਿਰੋਜਾ ਏਕ ਵਿਲਕ੍ਸ਼ਣ ਰਤ੍ਨ, ਰਤ੍ਨ ਏਵਂ ਰਂਗੋਂ ਦ੍ਵਾਰਾ ਰੋਗ ਨਿਵਾਰਣ, ਨਵਗ੍ਰਹ ਏਵਂ ਦਾਨ, ਆਜੀਵਿਕਾ ਔਰ ਰਤ੍ਨ, ਰਤ੍ਨ ਧਾਰਣ ਸੇ ਵਿਦ੍ਯਾ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤਿ, ਅਂਕ ਜ੍ਯੋਤਿਸ਼ ਰਤ੍ਨ, ਸ਼ਾਸ੍ਤ੍ਰੋਕ੍ਤ ਵਿਧਾਨ ਸੇ ਰਤ੍ਨ ਧਾਰਣ, রত্ন ধারণ, গ্রহ রত্ন, রত্‍ন ধারণ, নৱরত্ন জড়িত শ্রী যংত্র, নৱরত্ন, নৱরত্‍ন, রত্ন মুদ্রিকা, রত্ন অঁগূঠী, অংগূঠী, রত্ন লটকন, রত্ন লোকেট, রত্ন লোকেট, রত্‍ন রহস্য, রত্নো কী উত্পত্তি, রত্ন ধারণ কার্যসিদ্ধি, মাণিক্য, মোতী, মূংগা, পন্না, পুখরাজ, হীরা, নীলম, গোমেদ, লহসুনিযা, ফ়্ইরোজা এক ৱিলক্ষণ রত্ন, রত্ন এৱং রংগোং দ্ৱারা রোগ নিৱারণ, নৱগ্রহ এৱং দান, আজীৱিকা ঔর রত্ন, রত্ন ধারণ সে ৱিদ্যা প্রাপ্তি, অংক জ্যোতিষ রত্ন, শাস্ত্রোক্ত ৱিধান সে রত্ন ধারণ, ରତ୍ନ ଧାରଣ, ଗ୍ରହ ରତ୍ନ, ରତ୍‍ନ ଧାରଣ, ନଵରତ୍ନ ଜଡ଼ିତ ଶ୍ରୀ ଯଂତ୍ର, ନଵରତ୍ନ, ନଵରତ୍‍ନ, ରତ୍ନ ମୁଦ୍ରିକା, ରତ୍ନ ଅଁଗୂଠୀ, ଅଂଗୂଠୀ, ରତ୍ନ ଲଟକନ, ରତ୍ନ ଲୋକେଟ, ରତ୍ନ ଲୋକେଟ, ରତ୍‍ନ ରହସ୍ଯ, ରତ୍ନୋ କୀ ଉତ୍ପତ୍ତି, ରତ୍ନ ଧାରଣ କାର୍ଯସିଦ୍ଧି, ମାଣିକ୍ଯ, ମୋତୀ, ମୂଂଗା, ପନ୍ନା, ପୁଖରାଜ, ହୀରା, ନୀଲମ, ଗୋମେଦ, ଲହସୁନିଯା, ଫ଼୍ଇରୋଜା ଏକ ଵିଲକ୍ଷଣ ରତ୍ନ, ରତ୍ନ ଏଵଂ ରଂଗୋଂ ଦ୍ଵାରା ରୋଗ ନିଵାରଣ, ନଵଗ୍ରହ ଏଵଂ ଦାନ, ଆଜୀଵିକା ଔର ରତ୍ନ, ରତ୍ନ ଧାରଣ ସେ ଵିଦ୍ଯା ପ୍ରାପ୍ତି, ଅଂକ ଜ୍ଯୋତିଷ ରତ୍ନ, ଶାସ୍ତ୍ରୋକ୍ତ ଵିଧାନ ସେ ରତ୍ନ ଧାରଣ,