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मंगलवार, जनवरी 19, 2010

सरस्वती अष्टोत्तरनामावली

Saraswati Astottar Namawali


॥ सरस्वती अष्टोत्तरनामावलीः ॥

1. ॐ सरस्वत्यै नमः ॥

2. ॐ महाभद्रायै नमः ॥

3. ॐ महामायायै नमः ॥

4. ॐ वरप्रदायै नमः ॥

5. ॐ श्रीप्रदायै नमः ॥

6. ॐ पद्मनिलयायै नमः ॥

7. ॐ पद्माक्ष्यै नमः ॥

8. ॐ पद्मवक्त्रकायै नमः ॥

9. ॐ शिवानुजायै नमः ॥

10. ॐ पुस्तकभृते नमः ॥

11. ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः ॥

12. ॐ रमायै नमः ॥

13. ॐ परायै नमः ॥

14. ॐ कामरूपायै नमः ॥

15. ॐ महाविद्यायै नमः ॥

16. ॐ महापातक नाशिन्यै नमः ॥

17. ॐ महाश्रयायै नमः ॥

18. ॐ मालिन्यै नमः ॥

19. ॐ महाभोगायै नमः ॥

20. ॐ महाभुजायै नमः ॥

21. ॐ महाभागायै नमः ॥

22. ॐ महोत्साहायै नमः ॥

23. ॐ दिव्याङ्गायै नमः ॥

24. ॐ सुरवन्दितायै नमः ॥

25. ॐ महाकाल्यै नमः ॥

26. ॐ महापाशायै नमः ॥

27. ॐ महाकारायै नमः ॥

28. ॐ महांकुशायै नमः ॥

29. ॐ पीतायै नमः ॥

30. ॐ विमलायै नमः ॥

31. ॐ विश्वायै नमः ॥

32. ॐ विद्युन्मालायै नमः ॥

33. ॐ वैष्णव्यै नमः ॥

34. ॐ चन्द्रिकायै नमः ॥

35. ॐ चन्द्रवदनायै नमः ॥

36. ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः ॥

37. ॐ सावित्यै नमः ॥

38. ॐ सुरसायै नमः ॥

39. ॐ देव्यै नमः ॥

40. ॐ दिव्यालंकारभूषितायै नमः ॥

41. ॐ वाग्देव्यै नमः ॥

42. ॐ वसुदायै नमः ॥

43. ॐ तीव्रायै नमः ॥

44. ॐ महाभद्रायै नमः ॥

45. ॐ महाबलायै नमः ॥

46. ॐ भोगदायै नमः ॥

47. ॐ भारत्यै नमः ॥

48. ॐ भामायै नमः ॥

49. ॐ गोविन्दायै नमः ॥

50. ॐ गोमत्यै नमः ॥

51. ॐ शिवायै नमः ॥

52. ॐ जटिलायै नमः ॥

53. ॐ विन्ध्यावासायै नमः ॥

54. ॐ विन्ध्याचलविराजितायै नमः ॥

55. ॐ चण्डिकायै नमः ॥

56. ॐ वैष्णव्यै नमः ॥

57. ॐ ब्राह्मयै नमः ॥

58. ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः ॥

59. ॐ सौदामन्यै नमः ॥

60. ॐ सुधामूर्त्यै नमः ॥

61. ॐ सुभद्रायै नमः ॥

62. ॐ सुरपूजितायै नमः ॥

63. ॐ सुवासिन्यै नमः ॥

64. ॐ सुनासायै नमः ॥

65. ॐ विनिद्रायै नमः ॥

66. ॐ पद्मलोचनायै नमः ॥

67. ॐ विद्यारूपायै नमः ॥

68. ॐ विशालाक्ष्यै नमः ॥

69. ॐ ब्रह्मजायायै नमः ॥

70. ॐ महाफलायै नमः ॥

71. ॐ त्रयीमूर्तये नमः ॥

72. ॐ त्रिकालज्ञायै नमः ॥

73. ॐ त्रिगुणायै नमः ॥

74. ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः ॥

75. ॐ शंभासुरप्रमथिन्यै नमः ॥

76. ॐ शुभदायै नमः ॥

77. ॐ स्वरात्मिकायै नमः ॥

78. ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः ॥

79. ॐ चामुण्डायै नमः ॥

80. ॐ अम्बिकायै नमः ॥

81. ॐ मुण्डकायप्रहरणायै नमः ॥

82. ॐ धूम्रलोचनमदनायै नमः ॥

83. ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः ॥

84. ॐ सौम्यायै नमः ॥

85. ॐ सुरासुर नमस्कृतायै नमः ॥

86. ॐ कालरात्र्यै नमः ॥

87. ॐ कलाधरायै नमः ॥

88. ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः ॥

89. ॐ वाग्देव्यै नमः ॥

90. ॐ वरारोहायै नमः ॥

91. ॐ वाराह्यै नमः ॥

92. ॐ वारिजासनायै नमः ॥

93. ॐ चित्रांबरायै नमः ॥

94. ॐ चित्रगन्धायै नमः ॥

95. ॐ चित्रमाल्यविभूषितायै नमः ॥

96. ॐ कान्तायै नमः ॥

97. ॐ कामप्रदायै नमः ॥

98. ॐ वन्द्यायै नमः ॥

99. ॐ विद्याधरसुपूजितायै नमः ॥

100. ॐ श्वेताननायै नमः ॥

101. ॐ नीलभुजायै नमः ॥

102. ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः ॥

103. ॐ चतुरानन साम्राज्यायै नमः ॥

104. ॐ रक्तमध्यायै नमः ॥

105. ॐ निरंजनायै नमः ॥

106. ॐ हंसासनायै नमः ॥

107. ॐ नीलजङ्घायै नमः ॥

108. ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः ॥



॥॥ इति श्री सरस्वति अष्टोत्तरशत नामावलिः ॥॥

सरस्वती आरती

Saraswati Arati
॥सरस्वती आरती॥



आरती कीजै सरस्वती की,

जननि विद्या बुद्धि भक्ति की। आरती ..

जाकी कृपा कुमति मिट जाए।

सुमिरण करत सुमति गति आये,

शुक सनकादिक जासु गुण गाये।

वाणि रूप अनादि शक्ति की॥ आरती ..

नाम जपत भ्रम छूट दिये के।

दिव्य दृष्टि शिशु उध हिय के।

मिलहिं दर्श पावन सिय पिय के।

उड़ाई सुरभि युग-युग, कीर्ति की। आरती ..

रचित जास बल वेद पुराणा।

जेते ग्रन्थ रचित जगनाना।

तालु छन्द स्वर मिश्रित गाना।

जो आधार कवि यति सती की॥ आरती..

सरस्वती की वीणा-वाणी कला जननि की॥

सरस्वती स्तोत्र

Saraswati Stotra
॥सरस्वती स्तोत्र॥

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमा माद्या जगद्व्यापिनीं।



वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ॥१॥


हस्ते स्फाटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां।


वंदे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥२॥



भावार्थ: शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार स्वरूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से अभयदान देने वाली, अज्ञान के अँधेरे को दूर करने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली एवं पद्मासन पर विराजमान बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हू।

विद्या प्राप्ति के लिये सरस्वती मंत्र

Vidhaya Prapti Ke liye Saraswati Mantra

विद्या प्राप्ति के लिये सरस्वती मंत्र


घंटाशूलहलानि शंखमुसले चक्रं धनुः सायकं हस्ताब्जैर्दघतीं धनान्तविलसच्छीतांशु तुल्यप्रभाम्‌।
गौरीदेहसमुद्भवा त्रिनयनामांधारभूतां महापूर्वामत्र सरस्वती मनुमजे शुम्भादि दैत्यार्दिनीम्‌॥


भावार्थ: जो अपने हस्त कमल में घंटा, त्रिशूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण को धारण करने वाली, गोरी देह से उत्पन्ना, त्रिनेत्रा, मेघास्थित चंद्रमा के समान कांति वाली, संसार की आधारभूता, शुंभादि दैत्य का नाश करने वाली महासरस्वती को हम नमस्कार करते हैं। माँ सरस्वती जो प्रधानतः जगत की उत्पत्ति और ज्ञान का संचार करती है।


उपरोक्त मंत्र को प्रतिदिन जाप करने से विद्या की प्राप्ति होती है।

सोमवार, जनवरी 18, 2010

सरस्वती मंत्र (देवी सूक्त से)

Saraswati Mantra Tantrokt Devi Sukt se
सरस्वती मंत्र तन्त्रोक्तं देवी सूक्त से




या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो  नमः॥

सरस्वती मंत्र

Saraswati Mantra, saraswati stotram
॥ सरस्वती मंत्र ॥


या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वृस्तावता ।
या वीणा वर दण्ड मंडित करा या श्वेत पद्मसना ।।


या ब्रह्माच्युत्त शंकर: प्रभृतिर्भि देवै सदा वन्दिता ।
सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्या पहा ॥१॥

भावार्थ: जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह श्वेत वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर अपना आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती आप हमारी रक्षा करें।


विद्या और ज्योतिषीय

vidya aur Jyotish | Vidhya or Jyotish
विद्या और ज्योतिषीय


हर माता-पिता की कामना होती है कि उनका बच्चें परीक्षा में उच्च अंकों से उत्तीर्ण हो एवं उसे सफलता मिले। उच्च अंकों का प्रयास तो सभी बच्चें करते हैं पर कुछ बच्चें असफल भी रह जाते हैं। कई बच्चों की समस्या होती है कि कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें अधिक याद नहीं रह पाता, वे कुछ जबाव भूल जाते हैं। जिस वजह से वे बच्चें परीक्षा में उच्च अंकों से उत्तीर्ण नहीं होपाते या असफल होजाते हैं। ज्योतिष के अनुशार असफलता का कारण बच्चें की जन्मकुंडली में चंद्रमा और बुध का अशुभ प्रभाव है।


चंद्रमा और बुध का संबंध विद्या से हैं, क्योकि मन-मस्तिष्क का कारक चंद्रमा है, और जब चंद्र अशुभ हो तो चंचलता लिए होता है तो मन-मस्तिष्क में स्थिरता या संतुलन नहीं रहता हैं, एवं बुध की अशुभता की वजह से बच्चें में तर्क व कुशाग्रता की कमी आती है। इस वजह से बच्चें का मन पढाई मे कम लगता हैं और अच्छे अंकों से बच्चा उत्तीर्ण नहीं हो पाता।

भारतीय ऋषि मुनिओं ने विद्या का संबंध विद्या की देवी सरस्वती से बताय हैं। तो जिस बच्चें की जन्मकुंडली में चंद्रमा और बुध का अशुभ प्रभावो हो उसे विद्या की देवी सरस्वती की कृपा भी नहीं होती। एसे मे मां सरस्वती को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त चंद्रमा और बुध ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम कर शुभता प्राप्त की जा सकती है।

मां सरस्वती को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करने का तत्पर्य यह कतई ना समजे की सिर्फ मां की पूजा-अर्चना करने से बच्चा परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो एवं उसे सफलता मिल जायेगी क्योकि मां सरस्वती उन्हीं बच्चों की मदद करती हैं, जो बच्चे मेहनत मे विश्वास करेते और मेहनत करते हैं। बिना मेहनत से कोइ मंत्र-तंत्र-यंत्र परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने मे सहायता नहीं करता है। मंत्र-तंत्र-यंत्र के प्रयोग से एक तरह की सकारत्मक सोच उत्पन्न होती है जो बच्चें को पढाई मे उस्की स्मरण शक्ती का विकास करती हैं।