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बुधवार, जनवरी 20, 2010

अपने दिन को मंगलमय केसे बनाये ? (भाग: १)

Apane Din ko Mangalmay Kese Banaye ? (Bhag :1)

अपने दिन को मंगलमय केसे बनाये ? (भाग: १)


हिन्दू धर्म-शास्त्रो में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अनेक विधानों का उल्लेख मिलता है। लेकिन आज की व्यस्त जीवन में व्यक्ति के पास समय का अभाव है। ऐसी स्थितिओं में विशिष्ट तेजस्वी मंत्रों के उच्चारण द्वारा भगवान को स्मरण करके उनकी कृपा सरलता से प्राप्त कर सके उसके लिये कुछ विशिष्ट तेजस्वी मंत्रो का वर्णण किया जारहा हैं।

प्रातः कर दर्शनं मंत्र

सुबह बिस्तर से उठने से पेहले (अर्थातः बिस्तर छोडनेसे पूर्व) इस मंत्र के स्मरण से हमारे अंदर एक अद्भुत शक्ति का संचार होता हैं। जिस्से हमारे अंतरमन से हतासा और निराशा जेसी नकारात्म भावनाओं को दूर हो कर हमारे अंदर एक सकारात्मन द्रष्टिकोण का निर्माण होता है। जो हमे अपने जीवन में आगे बढने के लिये सरल और उत्तम मार्ग खोजने मे सहायक सिद्ध होती है।

यह प्रयोग अद्भुत और शीघ्र प्रभाव दिखाने मे समर्थ है।

कराग्रे वसते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती।
कर मूले तू गोविंद प्रभाते कर दर्शनं॥

Karagre Vasate Lakshami, Kar Madhaye Sawaswati

Kar Moole too Govindam Prabhate Kar Darshanam


भावार्थ:  उंगलियों के अग्र भाग में लक्ष्मी जी निवास करती हैं, हथेली के मध्य भाग में सरस्वती जी और हथेली के मूल में नारयण का वास है, जिनका सवेरे दर्शन करना शुभप्रद है।


मंत्र को ३ या ७ बार मनमे उच्चरण करे।

अपने दोनो हाथो को जोडकर हथेली को देखते हुवे दिये गये मंत्र को पढते हुवे अपने अंतर मन में एसा भाव लाये की हमारे हाथ के अग्र भाग में मां महालक्ष्मी, तथा हाथ के मध्य भाग मे मां सरस्वती का वास है, और हाथ के मूल भाग मे स्वयं भगवान हरि बिराजमान है।

इस के लाभ: दिनभर मन प्रसन्न रहता है और अच्छे कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त होकर हमे सभी कार्यो में सफलता प्राप्त होती है।

(इस मंत्र के उच्चरण के बाद मे बिस्तर छोडे)

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विद्या की प्राप्ति के विलक्षण उपाय(टोटके) (भाग-२)

Vidya ki Prapti ke Vilakshan Upay (Totke / Totake) (Bhag-2 / Part-2) 

विद्या की प्राप्ति के विलक्षण उपाय(टोटके)  (भाग-२)

पढाई करने वाली मेज(टेबल) पर आईना नहीं रखना चहीये।

पढाई करने वाली मेज(टेबल) पर शीशा नहीं रखना चहीये। शीशा रखने से मानसिक अशांति होती हैं। पढाई मे मन नहीं लगता।

पढाई के समय अपने पीछे खाली जगा न रखे अर्थात ठोस दीवार  की और पीठ कर के बेठे। खुली जगा पर नही बेठना चाहिये ये इस्से आत्म विश्वास की कमी रेहजाती है। खुली जगा वाले स्थिती में बच्चे ज्यादा समय तक पढाई करने के बावजुद उसे अधिक याद नही रेहपाता हैं।

अपनी बायीं (राईट हेंड) और पानी से भरा ग्लास रखें एवं इसे थोडा-थोडा पानी समय के अंतराल पर पीते रेहने से स्मरण शक्ति तेज़ होगी औए एकाग्रता में वृद्धि होती हैं।

मेज(टेबल) पर यथा संभव कम सामग्री रखे उस्से एकाग्रता बढती है। ज्यदा सामग्री रखने से नकारत्मक शक्ति (नेगेटिव एनर्जी) उतपन्न होती हैं जिस्से पढाई मे मन नहीं लगता।

मेज(टेबल) को दीवार से थोडा दूर रखे सटाकर न रखें , इससे  एकाग्रता भंग होती हैं।

रात को सोने से पूर्व चांदी के ग्लास मे पानी भरकर रखले और सुबह खाली पेट पानी पिले एसा करने से शिक्षा के क्षेत्र मे सफलता प्राप्ति होती हैं।

भोजन करते समय चांदी के बरतनो का उपयोग करने से लाभ प्राप्त होता विद्या  प्राप्ति में लाभ होता है।


सरस्वती यंत्र (यन्त्र)

Saraswati Tantra
सरस्वती यंत्र (यन्त्र)


इस यंत्र को अष्टगंध की स्याही अथवा रोली (कुमकुम) से अनार की कलम से भोजपत्र या स्फेद कागज पर बनाले।

यंत्र सुख जाने के पश्च्यात उसे अपने पूजा स्थान में अगली वसंत पंचमी तक रखले उस्के बाद उसे बेहती पानी मे विसर्जन कर दे एवं पुनः वसंत पंचमी पर नया यंत्र बनाले।



आप हमारे GURUTVA  KARYALAY  द्वारा संपूर्ण प्राण-प्रतिष्ठित एवं पूर्ण चैतन्य युक्त सरस्वती कवच एवं सरस्वती यंत्र प्राप्त कर सकते हैं।

विद्या प्राप्ति के विलक्षण उपाय(टोटके) (भाग-१)

vidyaa Prapti Ke Vilakshan Upay(Totake, Totke) ( Bhag -1/ Part -1)


विद्या प्राप्ति के विलक्षण उपाय(टोटके) (भाग-१)


पूर्व की तरफ सिर करके सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।

विद्वानो के मत से विद्या प्राप्ति हेतु ४ मुखी एवं ६ मुखी रूद्राक्ष लाल धागे मे धारण करने से व्यक्ति की बुद्धि तीव्र ओर कुशाग्र एवं विद्या, ज्ञान, उत्तम वाणी की प्राप्त होकर जीवन मे रचनात्मकता आति है

पढाई मेज पर स्फटिक का श्री यंत्र स्थापीत करने से स्मरण शक्ति तीव्रे होती हैं एवं खराब विचार दूर होकर उत्तम प्रकार की चिंताधारा उत्पन्न होती हैं, एवं मां सरस्वती और लक्ष्मी का आशिर्वाद सदैव बना रेहता हैं।

 अपने पूजा स्थान पर सरस्वती यंत्र स्थापीत कर प्रति दिन धूप- दीप करने से मां सरस्वती का आशिर्वाद एवं कृपा सदैव बनी रेहती हैं।

पढाई करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख कर कर पढाई करें।

पढाई करते समय स्फेद या हलके रंग के कपडो का चुनाव करे ताकी एकग्रता बनी रहें, गहरे रंग या भडकीले रंगो वाले कपडे पहनने से मानसिक अशांति उतपन्न होती हैं, जिस्से एकग्रता भंग होती हैं एवं पढाई मे मन नही लगता।

पढाई की किताब में मौली का टुकडा रखने से ज्ञान एवं विद्या में लाभ प्राप्त होता हैं।

किताब में मोर के पंख रखने से लाभ होता हैं।

ज्ञान मुद्रा का प्रति-दिन मात्र ५ मिनिट प्रयोग करने से स्मरण शक्ति की वृद्धि होती हैं। (मुद्रा के अन्य लाभ शीध्र उपलब्ध कराने हेतु हम प्रयास रत हैं।)

वंसत पंचमी

Vasant Panchami
वंसत पंचमी

२० जनवरी २०१० को हिन्दू पंचांग विक्रमी संवत् 2066 माघ मास शुक्ल की पक्ष को पंचमी को वंसत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजा का दिन मां सरस्वती की पूजा आरधना कर उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु वर्ष के सर्व श्रेष्ठ दिनो में से एक है जो विभिन्न शुभ कार्यो के शुभ आरंभ हेतु अत्यंत शुभ हैं।


वंसत पंचमी के दिन से भारत के कइ हिस्सो मे बच्चे को प्रथम अक्षर ज्ञान की शुरुवात की जाती है।

एसी मान्यता है की वसंत पंचमी के दिन विद्यांभ करने से बच्चे की की वाणी में मां सरस्वती स्वयं वास करती और बच्चे पर जीवन भर कृपा वर्षाती हैं। एवं बच्चों में विद्या एवं ज्ञान का विकास होता हैं जिस्से बच्चें मे श्रेष्ठता, सदाचार, तेजस्विता जेसे सद्द गुणों का आगमन होना प्रारंभ होता हैं, और बच्चा उत्तम स्मरण शक्ति युक्त विद्वान होता हैं।

इस दिन नये व्यवसाय का शुभ आरंभ या व्यवसाय हेतु नयी शाखा का शुभ आरंभ करना अत्यंत शुभ माना जाता हैं।

वसंत पंचमी के दिन पूजा आरधना से मां की कृपा से अध्यात्म ज्ञाना में वृद्धि होती हैं।

नित्य कर्म से निवृत होकर श्वेत वस्त्र धारण करके उत्तर-पूर्व दिशा में या अपने पूजा स्थान में सरस्वती का चित्र-मूर्ति अपने सम्मुख स्थापन करे।

सर्व प्रथम पूजा का प्रारंभ श्री गणेशजी की पूजा से करे तत पश्यात ही मां सरस्वती की पूजा करें।

मां सरस्वती को श्वेत रंग अत्यंत प्रिय है। इस लिये पूजा में ज्यादा से ज्यादा श्वेत रंग की वस्तुओं का प्रयोग करें।

पूजा मे सफेद वस्त्र, स्फटिक माला, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य मे श्वेत मिष्ठान आदी का प्रयोग करे जिस्से मां की कृपा शीघ्र प्राप्त हो

मां सरस्वती के वैदिक अथवा बीज मंत्रो का यथासंभव जाप करे।  और सरस्वती स्तोत्र, सरस्वती अष्टोत्तरनामावली, स्तोत्र एवं आरती कर के पूजा  संपन्न करे।

मंगलवार, जनवरी 19, 2010

विद्या प्राप्ति हेतु राम मंत्र

Vidya Prapti hetu ram mantra, vidhya Prapti hetu ram mantra

विद्या प्राप्ति हेतु राम मंत्र


विद्या प्राप्ति व परीक्षा में सफलता के लिये रामचरित मानस के मंत्र अचूक हैं । स्नान इत्यादि से निवृत होने के बाद मंत्र जप आरंभ करें। आसान पर बैठकर भगवान राम का चित्र स्थापित करें और धूप-दीप जलाकर मंत्र का 108 बार जाप करें।



विद्या प्राप्ति के लिये:
गुरु गृह पढ़न गए रघुराई।
अलप काल विद्या सब पाई



परीक्षा में सफलता के लिये:
मोरि सुधारिहिं सो सब भांति।
जासु कृपा नहिं कृपा अघाति॥

सरस्वती मंत्र प्रयोग

Saraswati Mantra Prayog
अत्यंत सरल सरस्वती मंत्र प्रयोग



प्रतिदिन सुबह स्नान इत्यादि से निवृत होने के बाद मंत्र जप आरंभ करें। अपने सामने मां सरस्वती का यंत्र या चित्र स्थापित करें । अब चित्र या यंत्र के ऊपर श्वेत चंदन, श्वेत पुष्प व अक्षत (चावल) भेंट करें और धूप-दीप जलाकर देवी की पूजा करें और अपनी मनोकामना का मन में स्मरण करके स्फटिक की माला से किसी भी सरस्वती मंत्र की शांत मन से एक माला फेरें।

सरस्वती मूल मंत्र - ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।

सरस्वती मंत्र - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।



सरस्वती गायत्री मंत्र -

१ - ॐ सरस्वत्यै विधमहे, ब्रह्मपुत्रयै धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात।

२ - ॐ वाग देव्यै विधमहे काम राज्या धीमहि । तन्नो सरस्वती: प्रचोदयात।