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सोमवार, जुलाई 04, 2011

महामृत्युंजय जपविधि


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महामृत्युंजय जपविधि
लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (मई-2011)
॥ इति महामृत्युंजय जपविधिः ॥
विद्वानो के अनुशार महामृत्युंजय मंत्र के जप और उपासना साधक को अपनी आवश्यकता के अनुरूप करने से विशेष लाभप्रद होते हैं। आवश्यक्ता के अनुशार जप के लिए अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग होता हैं। मंत्र के अक्षरों में संख्या के कारण मंत्रों में विविधता हो जाती हैं।

मंत्र निम्न प्रकार से है-

एकाक्षरी (1) मंत्र- 'हौं' ।
त्र्यक्षरी(3) मंत्र- 'ॐ जूं सः'।
चतुराक्षरी(4) मंत्र- 'ॐ वं जूं सः'।
नवाक्षरी(9) मंत्र- 'ॐ जूं सः पालय पालय'।
दशाक्षरी(10) मंत्र- 'ॐ जूं सः मां पालय पालय'।

(दशाक्षरी मंत्र का जप स्वयं के लिए उक्त क्रम में करें। यदि किसी अन्य व्यक्ति के लिए दशाक्षरी मंत्र का जप किया जा रहा हो तो 'मां' के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम लेना चाहिए)


वेदोक्त मंत्र-
महामृत्युंजय का वेदोक्त मंत्र निम्न लिखित हैं।

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

महामृत्युंजय मंत्र में 32 शब्दों का प्रयोग हुआ है और महामृत्युंजय मंत्र में ॐ लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं।

इसे 'त्रयस्त्रिशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं।
श्री वशिष्ठजी ने 33 अक्षर के 33 देवता अर्थात्‌ शक्तियाँ निश्चित की हैं जो निम्नलिखित हैं।

महामृत्युंजय मंत्र में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य 1 प्रजापति तथा 1 वषट को माना हैं।

मंत्र विचार :महामृत्युंजय मंत्र के प्रत्येक शब्द को स्पष्ट करना अति आवश्यक हैं। क्योंकि शब्द से ही मंत्र है और मंत्र से ही शक्ति हैं।
महामृत्युंजय मंत्र में प्रयोग किए गए प्रत्येक शब्द अपने आप में एक संपूर्ण अर्थ लिए हुए होता हैं और इसी में देवादि का बोध कराता है।

शब्द बोधक
'त्र' ध्रुव वसु
'यम' अध्वर वसु
'ब' सोम वसु
'कम्‌' .. ……………..>>


 



उक्त बोधक को देवताओं के नाम माने जाते हैं।

शब्द की शक्ति-
महामृत्युंजय मंत्र में प्रयोग हुए शब्द की शक्ति निम्न प्रकार से मानी गई हैं।

शब्द शक्ति


'त्र' त्र्यम्बक, त्रि-शक्ति तथा त्रिनेत्र
'य' यम तथा यज्ञ
'म' मंगल ……………..>>

'तात' चरणों में स्पर्श

महामृत्युंजय मंत्र के शब्दो का यह पूर्ण विवरण 'देवो भूत्वा देवं यजेत' के अनुसार पूर्णतः सत्य प्रमाणित मानेगये हैं।
महामृत्युंजय के अलग-अलग मंत्र का उल्लेख मिलता हैं।

साधक अपनी आवश्यक्ता/सुविधा के अनुसार चाहें जो भी मंत्र चुन लें और उस मंत्र का नित्य पाठ कर सकते हैं या अपनी आवश्यकता के अनुशार उचित समय प्रयोग कर सकते हैं।
मंत्र निम्नलिखित हैं-

तांत्रिक बीजोक्त मंत्र:
ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ॥

संजीवनी मंत्र:
ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूर्भवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनांन्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ।

महामृत्युंजय का प्रभावशाली मंत्र:……….. ……………..>>

महामृत्युंजय मंत्र जाप में सावधानियाँ
महामृत्युंजय मंत्र का जप करना मनुष्य के लिये परम फलदायी और कल्याणकारी माना गया हैं।
लेकिन महामृत्युंजय मंत्र का जप कुछ सावधानियाँ रख कर करना चाहिए। जिससे मंत्र का संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके और किसी भी प्रकार के अनिष्ट की संभावना न रहें।

इस लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से पूर्व निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. साधक को महामृत्युंजय मंत्र का जो भी मंत्र जपना हो उसका उच्चारण पूर्ण शुद्धता से करें।
2. मंत्र जप एक निश्चित संख्या में करें। पूर्व दिवस में जपे गए मंत्रों से, आगामी दिनों में कम संख्या में मंत्रों का जप नहीं करना चाहिए। यदि चाहें तो अधिक संख्या में जप सकते हैं।
3. विशेष प्रयोजन के किए जा रहे मंत्र का उच्चारण होठों से बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि अभ्यास न हो तो धीमे स्वर में जप करें।
4. जप काल में धूप और दीप ……………..>>

कब करें महामृत्युंजय मंत्र जाप?

·        शास्त्रोक्त विधान के अनुशार महामृत्युंजय मंत्र जप से अकाल मृत्यु तो टलने के उपरांत आरोग्यता की भी प्राप्ति होती हैं।
·        यदि स्नान करते समय शरीर पर पानी डालते समय  महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से स्वास्थ्य-लाभ होता हैं।
·        दूध को देखते हुए  महामृत्युंजय मंत्र ……………..>>

महामृत्युंजय जपविधि - (मूल संस्कृत में)
         कृतनित्यक्रियो जपकर्ता स्वासने पांगमुख उदहमुखो वा उपविश्य धृतरुद्राक्षभस्मत्रिपुण्ड्रः । आचम्य । प्राणानायाम्य। देशकालौ संकीर्त्य मम वा यज्ञमानस्य अमुक कामनासिद्धयर्थ श्रीमहामृत्युंजय मंत्रस्य अमुक संख्यापरिमितं जपमहंकरिष्ये वा कारयिष्ये।

॥ इति प्रात्यहिकसंकल्पः॥
·        ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ गुरवे नमः। ……………..>>
·        आसनः
ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। ……………..>>


॥ इति भूतशुद्धिः ॥

·        अथ प्राण-प्रतिष्ठा……………..>>


·        विनियोगः ……………..>>


अथ ध्यानम्‌:
·        ……………..>>


जप‍
अथ महामृत्युंजय जपविधि
संकल्पतत्र संध्योपासनादिनित्यकर्मानन्तरं भूतशुद्धिं प्राण प्रतिष्ठां च कृत्वा प्रतिज्ञासंकल्प कुर्यात ॐ तत्सदद्येत्यादि सर्वमुच्चार्य मासोत्तमे मासे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरे अमुकगोत्रो अमुकनाम मम शरीरे ज्वरादि-

रोगनिवृत्तिपूर्वकमायुरारोग्यलाभार्थं वा धनपुत्रयश सौख्यादिकिकामनासिद्धयर्थ श्रीमहामृत्युंजयदेव प्रीमिकामनया यथासंख्यापरिमितं महामृत्युंजयजपमहं करिष्ये।

(अमुक के स्थान पर वर्तमान मास-पक्ष-तिथि-वास- का उचारण करें और अमुक गोत्रो व नाम के स्थान पर जिसके लिये जप किया जा रहा हो उस व्यक्ति के गोत्र व नाम का उचारण करना चाहिए)
·        विनियोग ……………..>>
·        अथ यष्यादिन्यासः ……………..>>
·        अथ करन्यासः ……………..>>

·        अथांगन्यासः ……………..>>
·        अथाक्षरन्यासः……………..>>

·        अथ पदन्यासः……………..>>
·        मृत्युंजयध्यानम्‌ ……………..>>
·        अथ बृहन्मन्त्रः ……………..>>
·        समर्पण……………..>>



संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका मई-2011 का अंक पढें।

इस लेख को प्रतिलिपि संरक्षण (Copy Protection) के कारणो से यहां संक्षिप्त में प्रकाशित किया गया हैं।


>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (मई-2011)
MAY-2011


महामृत्युंजय अकाल मृत्यु एवं असाध्य रोगों से मुक्ति

महामृत्युंजय
अकाल मृत्यु एवं असाध्य रोगों से मुक्ति के लिये शीघ्र प्रभावि उपाय


महामृत्युंजय अकाल मृत्यु एवं असाध्य रोगों से मुक्ति के लिये शीघ्र प्रभावि उपाय, महामृत्युंजय अकाल मृत्यु एवं असाध्य रोगों, महामृत्युन्जय कवच, मन्त्र, मंत्र, यन्त्र, यंत्र, अकाल असाध्य रोगों अकाल मृत्यु से मुक्ति, મહામૃત્યુંજય અકાલ મૃત્યુ એવં અસાધ્ય રોગોં સે મુક્તિ, યન્ત્ર, યંત્ર, મહામૃત્યુન્જય અસાધ્ય રોગોં અકાલ મૃત્યુ સે મુક્તિ, કવચ, મન્ત્ર, મંત્ર, ಮಹಾಮೃತ್ಯುಂಜಯ ಅಕಾಲ ಮೃತ್ಯು ಏವಂ ಅಸಾಧ್ಯ ರೋಗೋಂ ಸೇ ಮುಕ್ತಿ, ಯನ್ತ್ರ, ಯಂತ್ರ, ಮಹಾಮೃತ್ಯುನ್ಜಯ ಅಸಾಧ್ಯ ರೋಗೋಂ ಅಕಾಲ ಮೃತ್ಯು ಸೇ ಮುಕ್ತಿ, ಕವಚ, ಮನ್ತ್ರ, ಮಂತ್ರ, மஹாம்ருத்யும்ஜய அகால ம்ருத்யு ஏவம் அஸாத்ய ரோகோம் ஸே முக்தி, யந்த்ர, யம்த்ர, மஹாம்ருத்யுந்ஜய அஸாத்ய ரோகோம் அகால ம்ருத்யு ஸே முக்தி, கவச, மந்த்ர, மம்த்ர, మహామృత్యుంజయ అకాల మృత్యు ఏవం అసాధ్య రోగోం సే ముక్తి, యన్త్ర, యంత్ర, మహామృత్యున్జయ అసాధ్య రోగోం అకాల మృత్యు సే ముక్తి, కవచ, మన్త్ర, మంత్ర, മഹാമൃത്യുംജയ അകാല മൃത്യു ഏവം അസാധ്യ രോഗോം സേ മുക്തി, യന്ത്ര, യംത്ര, മഹാമൃത്യുന്ജയ അസാധ്യ രോഗോം അകാല മൃത്യു സേ മുക്തി, കവച, മന്ത്ര, മംത്ര, ਮਹਾਮ੍ਰੁਤ੍ਯੁਂਜਯ ਅਕਾਲ ਮ੍ਰੁਤ੍ਯੁ ਏਵਂ ਅਸਾਧ੍ਯ ਰੋਗੋਂ ਸੇ ਮੁਕ੍ਤਿ, ਯਨ੍ਤ੍ਰ, ਯਂਤ੍ਰ, ਮਹਾਮ੍ਰੁਤ੍ਯੁਨ੍ਜਯ ਅਸਾਧ੍ਯ ਰੋਗੋਂ ਅਕਾਲ ਮ੍ਰੁਤ੍ਯੁ ਸੇ ਮੁਕ੍ਤਿ, ਕਵਚ, ਮਨ੍ਤ੍ਰ, ਮਂਤ੍ਰ, মহামৃত্যুংজয অকাল মৃত্যু এৱং অসাধ্য রোগোং সে মুক্তি, যন্ত্র, যংত্র, মহামৃত্যুন্জয অসাধ্য রোগোং অকাল মৃত্যু সে মুক্তি, কৱচ, মন্ত্র, মংত্র, mahAmRutyuMjay akAl mRutyu evaM asAdhy rogoM se mukti, yantr, yaMtr, mahAmRutyunjay asAdhy rogoM akAl mRutyu se mukti, kavac, mantr, maMtr, ମହାମୃତ୍ଯୁଂଜଯ ଅକାଲ ମୃତ୍ଯୁ ଏବଂ ଅସାଧ୍ଯ ରୋଗୋଂ ସେ ମୁକ୍ତି, ଯନ୍ତ୍ର, ଯଂତ୍ର, ମହାମୃତ୍ଯୁନ୍ଜଯ ସାଧ୍ଯ ରୋଗୋଂ ଅକାଲ ମୃତ୍ଯୁ ସେ ମୁକ୍ତି, କବଚ, ମନ୍ତ୍ର, ମଂତ୍ର,
ମହାମୃତ୍ୟୁନ୍ଜୟ ଅକାଲ ମୃତ୍ୟୁ ଏବଂ ଅସାଧ୍ଯ ରୋଗ ରୁ ମୁକ୍ତି mahamrutyunjay akala mrutyu evam asadhy rogon se mukti, yantr, yantr, mahamrutyunjay asadhy rogon akal mrutyu se mukti, kavac, mantr, maMtr, maha mrutyunjay roga nidana, maha mrutyunjay roga nivarana, maha mrutyunjay roga, maha mrutyunjay svasthya, maha mrutyunjay va rogake samaya kA gnna, maha mrutyunjay prabhava aura roga, roga ke prabhava ka maha mrutyunjay se nivaaran,maha mrutyunjay roga Shanti ke upaya, maha mrutyunjay roga Shanti, maha mrutyunjay roga nivarana, Healing maha mrutyunjay, maha mrutyunjay prevention, maha mrutyunjay disease, maha mrutyunjay disease, maha mrutyunjay and Arogce time, knowledge of planetary effects on the body part and disease, maha mrutyunjay while the impact of disease, maha mrutyunjay and disease of peace Measures, disease, maha mrutyunjay peace, maha mrutyunjay disease prevention

मानव शरीर में जो भी रोग उत्पन्न होते हैं उसके बारे में शास्त्रो में जो उल्लेख हैं वह इस प्रकार हैं
"शरीरं व्याधिमंदिरम्" अर्थात् ब्रह्मांड के पंच तत्वों से उत्पन्न शरीर में समय के अंतराल पर नाना प्रकार की आधि-व्यघि पीडा़ए उत्पन्न होती रहती हैं।

ज्योतिष शास्त्र एवं आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य द्वारा पूर्वकाल में किये गयें कर्मो का फल ही व्यक्ति के शरीर में विभिन्न रोगों के रूप में प्रगट होतें हैं।

हरित सहिंता के अनुशार:
जन्मान्तर कृतम् पापम् व्याधिरुपेण बाधते।
तच्छान्तिरौषधैर्दानर्जपहोमसुरार्चनैः॥
अर्थातः पूर्व जन्म में किये गये पाप कर्म ही व्याधि के रूप में हमारे शरीर में उत्पन्न हो कर कष्टकारी हो जाता हैं। तथा औषध, दान, जप, होम व देवपूजा से रोग की शांति होती हैं।

शास्त्रोक्त विधान के अनुशार देवी भगवती ने भगवान शिव से कहा कि, हे देव! आप मुझे मृत्यु से रक्षा करने वाला और सभी प्रकार के अशुभों का नाश करने वाल कवच बतलाईये? तब शिवजी ने महामृत्युंजय कवच ……………..>>


अमोद्य् महामृत्युंजय कवच व उल्लेखित अन्य सामग्रीयों को शास्त्रोक्त विधि-विधान से विद्वान ब्राह्मणो द्वारा सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र जप एवं दशांश हवन द्वारा निर्मित कवच अत्यंत प्रभावशाली होता हैं।
अमोद्य महामृत्युंजय कवच धारण कर अन्य सामग्री को अपने पूजा स्थान में स्थापित ……………..>>
मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के कारण ही इस मंत्र को मृत्युंजय कहा जाता है। महामृत्यंजय मंत्र की महिमा का वर्णन शिव पुराण, काशीखंड और महापुराण ……………..>>


महामृत्युंजय मंत्र का महत्व:
मृत्युर्विनिर्जितो यस्मात् तस्मान्मृत्युंजय: स्मृत: या मृत्युंजयति इति मृत्युंजय,
अर्थात: जो मृत्यु को जीत ले, उसे ही मृत्युंजय कहा जाता है।

मंत्र जप के लिए विशेष:
यः शास्त्रविधि मृत्सृज्य वर्तते काम कारतः। न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परांगतिम्॥ (श्रीमद् भगवद् गीता:षोडशोऽध्याय)
भावार्थ : जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धि को प्राप्त होता है, न परमगति को और न सुख को ही॥23॥

ज्योतिषशास्त्र के अनुशार दुख, विपत्ति या मृत्य के प्रदाता एवं निवारण के देवता शनिदेव हैं, क्योकि शनि व्यक्ति के कर्मो के अनुरुप व्यक्ति को फल प्रदान करते हैं। शास्त्रो के अनुशार मार्कण्डेय ऋषि का जीवन अत्यंत अल्प था, परंतु महामृत्युंजय मंत्र के जप से शिव कृपा प्राप्त कर उन्हें चिरंजीवी ……………..>>


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शुक्रवार, जुलाई 01, 2011

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जूलाई 2011 में प्रकशित लेख


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guru poornima-2011, guru purnima-2011, shravan mas-2011, srawan masha, गुरु पुर्णिमा, गुरु पूर्णीमा,  गुरु पूर्णीमा,  श्रीहरि शयनी एकादशी, देव शयनी एकादशी व्रत, चातुर्मास व्रत-नियम प्रारंभ, गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा, स्नान-दान हेतु उत्तम आषाढ़ी पूर्णिमा, मुड़िया पूनम-गोवर्धन परिक्रमा (ब्रज), दक्षिणामूर्ति-पूजन, कनखल-कर्णघंटा में स्नान, संन्यासियों का चातुर्मास प्रारंभ, जयापार्वती व्रत पूर्ण, मैथिल साल 1419 शुरू, साईंबाबा उत्सव पूर्ण (शिरडी), बौद्धों का धर्मचक्र-प्रवर्तन (सारनाथ), श्रावण मास प्रारंभ, सावन मास-शिर्वाचन शुरू, शिव पूजा, शिव उपासना, शिव मंत्र, शिव मन्त्र, शीव, सावन सोमवार, श्रावण सोमवार,   गुरु पुर्णिमा, गुरु पूर्णीमा,  गुरु पूर्णीमा, व्यास पूर्णिमा, स्नान-दान हेतु उत्तम आषाढ़ी पूर्णिमा, मुड़िया पूनम,  चातुर्मास, चातूर्मास, शयनी एकादशी, देव शयनी एकादशी व्रत, शिव पूजा, शिव उपासना, शिव मंत्र, शिव मन्त्र, शीव, सावन सोमवार, श्रावण सोमवार,  ગુરુ પુર્ણિમા, ગુરુ પૂર્ણીમા,  ગુરુ પૂર્ણીમા, વ્યાસ પૂર્ણિમા, સ્નાન-દાન હેતુ ઉત્તમ આષાઢ઼્ઈ પૂર્ણિમા, મુડ઼્ઇયા પૂનમ,  ચાતુર્માસ, ચાતૂર્માસ, શયની એકાદશી, દેવ શયની એકાદશી વ્રત, શિવ પૂજા, શિવ ઉપાસના, શિવ મંત્ર, શિવ મન્ત્ર, શીવ, સાવન સોમવાર, શ્રાવણ સોમવાર,   ಗುರು ಪುರ್ಣಿಮಾ, ಗುರು ಪೂರ್ಣೀಮಾ,  ಗುರು ಪೂರ್ಣೀಮಾ, ವ್ಯಾಸ ಪೂರ್ಣಿಮಾ, ಸ್ನಾನ-ದಾನ ಹೇತು ಉತ್ತಮ ಆಷಾಢ಼್ಈ ಪೂರ್ಣಿಮಾ, ಮುಡ಼್ಇಯಾ ಪೂನಮ,  ಚಾತುರ್ಮಾಸ, ಚಾತೂರ್ಮಾಸ, ಶಯನೀ ಏಕಾದಶೀ, ದೇವ ಶಯನೀ ಏಕಾದಶೀ ವ್ರತ, ಶಿವ ಪೂಜಾ, ಶಿವ ಉಪಾಸನಾ, ಶಿವ ಮಂತ್ರ, ಶಿವ ಮನ್ತ್ರ, ಶೀವ, ಸಾವನ ಸೋಮವಾರ, ಶ್ರಾವಣ ಸೋಮವಾರ,  குரு புர்ணிமா, குரு பூர்ணீமா,  குரு பூர்ணீமா, வ்யாஸ பூர்ணிமா, ஸ்நாந-தாந ஹேது உத்தம ஆஷாடீ பூர்ணிமா, முடியா பூநம,  சாதுர்மாஸ, சாதூர்மாஸ, ஶயநீ ஏகாதஶீ, தேவ ஶயநீ ஏகாதஶீ வ்ரத, ஶிவ பூஜா, ஶிவ உபாஸநா, ஶிவ மம்த்ர, ஶிவ மந்த்ர, ஶீவ, ஸாவந ஸோமவார, ஶ்ராவண ஸோமவார,   గురు పుర్ణిమా, గురు పూర్ణీమా,  గురు పూర్ణీమా, వ్యాస పూర్ణిమా, స్నాన-దాన హేతు ఉత్తమ ఆషాఢీ పూర్ణిమా, ముడియా పూనమ,  చాతుర్మాస, చాతూర్మాస, శయనీ ఏకాదశీ, దేవ శయనీ ఏకాదశీ వ్రత, శివ పూజా, శివ ఉపాసనా, శివ మంత్ర, శివ మన్త్ర, శీవ, సావన సోమవార, శ్రావణ సోమవార,  ഗുരു പുര്ണിമാ, ഗുരു പൂര്ണീമാ,  ഗുരു പൂര്ണീമാ, വ്യാസ പൂര്ണിമാ, സ്നാന-ദാന ഹേതു ഉത്തമ ആഷാഢീ പൂര്ണിമാ, മുഡിയാ പൂനമ,  ചാതുര്മാസ, ചാതൂര്മാസ, ശയനീ ഏകാദശീ, ദേവ ശയനീ ഏകാദശീ വ്രത, ശിവ പൂജാ, ശിവ ഉപാസനാ, ശിവ മംത്ര, ശിവ മന്ത്ര, ശീവ, സാവന സോമവാര, ശ്രാവണ സോമവാര,   ਗੁਰੁ ਪੁਰ੍ਣਿਮਾ, ਗੁਰੁ ਪੂਰ੍ਣੀਮਾ,  ਗੁਰੁ ਪੂਰ੍ਣੀਮਾ, ਵ੍ਯਾਸ ਪੂਰ੍ਣਿਮਾ, ਸ੍ਨਾਨ-ਦਾਨ ਹੇਤੁ ਉੱਤਮ ਆਸ਼ਾਢ਼੍ਈ ਪੂਰ੍ਣਿਮਾ, ਮੁਡ਼੍ਇਯਾ ਪੂਨਮ,  ਚਾਤੁਰ੍ਮਾਸ, ਚਾਤੂਰ੍ਮਾਸ, ਸ਼ਯਨੀ ਏਕਾਦਸ਼ੀ, ਦੇਵ ਸ਼ਯਨੀ ਏਕਾਦਸ਼ੀ ਵ੍ਰਤ, ਸ਼ਿਵ ਪੂਜਾ, ਸ਼ਿਵ ਉਪਾਸਨਾ, ਸ਼ਿਵ ਮਂਤ੍ਰ, ਸ਼ਿਵ ਮਨ੍ਤ੍ਰ, ਸ਼ੀਵ, ਸਾਵਨ ਸੋਮਵਾਰ, ਸ਼੍ਰਾਵਣ ਸੋਮਵਾਰ,    গুরু পুর্ণিমা, গুরু পূর্ণীমা,  গুরু পূর্ণীমা, ৱ্যাস পূর্ণিমা, স্নান-দান হেতু উত্তম আষাঢ়ী পূর্ণিমা, মুড়িযা পূনম,  চাতুর্মাস, চাতূর্মাস, শযনী একাদশী, দেৱ শযনী একাদশী ৱ্রত, শিৱ পূজা, শিৱ উপাসনা, শিৱ মংত্র, শিৱ মন্ত্র, শীৱ, সাৱন সোমৱার, শ্রাৱণ সোমৱার,   ଗୁରୁ ପୁର୍ଣିମା, ଗୁରୁ ପୂର୍ଣୀମା,  ଗୁରୁ ପୂର୍ଣୀମା, ବ୍ୟାସ ପୂର୍ଣିମା, ସ୍ନାନ-ଦାନ ହେତୁ ଉତ୍ତମ ଆଷାଢ଼ୀ ପୂର୍ଣିମା, ମୁଡ଼ିଯା ପୂନମ,  ଚାତୁର୍ମାସ, ଚାତୂର୍ମାସ, ଶଯନୀ ଏକାଦଶୀ, ଦେଵ ଶଯନୀ ଏକାଦଶୀ ଵ୍ରତ, ଶିଵ ପୂଜା, ଶିଵ ଉପାସନା, ଶିଵ ମଂତ୍ର, ଶିଵ ମନ୍ତ୍ର, ଶୀଵ, ସାଵନ ସୋମବାର, ଶ୍ରାଵଣ ସୋମବାର,  guru purNimA, guru pUrNImA,  guru pUrNImA, vyAs pUrNimA, snAn-dAn hetu uttam AShADhxI pUrNimA, muDxiyA pUnam,  cAturmAs, cAtUrmAs, SayanI ekAdaSI, dev SayanI ekAdaSI vrat, Siv pUjA, Siv upAsanA, Siv maMtr, Siv mantr, SIv, sAvan somavAr, SrAvaN somavAr, 


विशेष लेख
गुरु प्रार्थना
5
जब दुर्वासाजी ने श्री कृष्ण की परिक्षाली।
7
गुरुमंत्र के प्रभाव से ईष्ट दर्शन
11
गुरुमंत्र के प्रभाव से रक्षा
13
गुरुमंत्र के जप से अलौकिक सिद्धिया प्राप्त होती हैं
14
आरुणि की गुरुभक्ति
18
सद् गुरु के त्याग से दरिद्रता आती हैं
19
मंत्र जप से प्राप्त हुवा शास्त्रज्ञान
21
एकलव्य की गुरुभक्ति
22
श्रीकृष्ण की गुरूसेवा
23
देवर्षि नारद ने एक मल्लाह को अपना गुरु बनाया
25
श्रीमद् आद्य शंकराचार्य सदगुरू
27
रुद्राभिषेक से कामनापूर्ति
33
रुद्राभिषेकस्तोत्र
35
सोमवार को शिवपूजन का महत्व क्या हैं?
36
शिव कृपा हेतु उत्तम श्रावण मास
37
श्रावण मास के सोमवार व्रत से भौतिक कष्टो से मुक्ति मिलती हैं
40
आध्यात्मिक उन्नति हेतु उत्तम चातुर्मास व्रत
41
क्यों शिव को प्रिय हैं बेल पत्र?
43
श्रावण सोमवार व्रत कैसे करें?
45
रुद्राक्ष धारण से कामनापूर्ति
46
एक मुखी से 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लाभ
48
चातुर्मास में मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
50
अनुक्रम
संपादकीय
4
गुर्वष्टकम्
6
श्रीकृष्ण बीसा यंत्र
10
श्री गुरु स्तोत्रम्
31
हस्तरेखा ज्ञान
32
सर्व कार्य सिद्धि कवच
51
राम रक्षा यंत्र
42
विद्या प्राप्ति हेतु सरस्वती कवच और यंत्र
53
मंत्र सिद्ध पन्ना गणेश
53
मंत्र सिद्ध सामग्री
54
मासिक राशि फल
57
राशि रत्न
61
जुलाई 2011 मासिक पंचांग
60
जुलाई -2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार
64
मंत्र सिद्ध सामग्री
67
जुलाई 2011 -विशेष योग
68
दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका
68
दिन-रात के चौघडिये
69
दिन-रात कि होरा सूर्योदय से सूर्यास्त तक
70
ग्रह चलन जुलाई -2011
71
सर्व रोगनाशक यंत्र/कवच
72
मंत्र सिद्ध कवच
74
YANTRA LIST
75
GEM STONE
77
BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
78
सूचना
79
हमारा उद्देश्य
81



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