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शनिवार, जनवरी 08, 2011

मेष वार्षिक राशि फल 2011

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मेष राशि वार्षिक भविष्य फल 2011


मेष राशि:
सामान्य वर्ष 2011 आप के लिए सकारात्मक से भरपूर वर्ष रहेगा। इस वर्ष आपको जनवरी, फरवरी, अप्रैल, मई, अगस्त और सितंबर में शुभ फल प्राप्त होंगे। वर्ष के अंत में आपको कुछ शारीरिक एवं मानसिक कष्टों का सामना करना पड सकता हैं।

यह वर्ष आपके लिए उत्तम फलदायक होगा। यदि आप विद्यार्थि है, तो आपको अच्छी लाभदायक शिक्षा कि प्राप्ति होगी। प्रतियोगीता में अपनी बौधिकता का प्रयोग कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप अविवाहित तो इस साल वैवाहिक सुख प्राप्त कर सकते हैं। नौकरी व्यवसाय कि महत्वपूर्ण योजनाओं में अक्टूबर के चतुर्थ सप्ताह में लाभ प्राप्त होगा। समय के साथ बदलति स्थितियों के अनुरुप अपनी मेहनत से कार्य करने की क्षमता रख सकते हैं। जिस के फल स्वरुप पूरे वर्ष भर आपको अपनी प्रगति के नये मार्ग प्राप्त होते रहेंगे।

मई के प्रथम सप्ताह तक आपकी मानसिक क्षमताओं में कमी रह सकती हैं परंतु मई मास के द्वितीय सप्ताह के साथ-साथ आपकी मानसिक क्षमताओं का विकास होगा और आप अपने रचनात्मक कार्य में लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आप जटिल-जटिल स्थितियों में कार्य करने हेतु अपने जीवन के मिश्रण अनुभव से अपनी कार्य कुशलता का उपयोग करके आप अपनी अधिकतर कार्य पूर्ण कर अपने मान-सम्मान में वृद्धि कर सकते हैं।

आपके लम्बे समय से रुके हुवे महत्व पूर्ण कार्य के थोडे से प्रयत्न से ही मई 2011 के प्रथम सप्ताह के साथ हि प्रगति कर सकते हैं। मई 2011 के प्रथम सप्ताह से लेकर नवंबर 2011 के द्वितीय सप्ताह के बिचमें आपकी कार्यशैली में प्रभावशाली बदलाव होंगे जो आपको जीवन में उन्नति के उच्च शिखर पर पहुचा सकते हैं। नई नौकरी व्यवसाय में लाभ प्राप्त हो सकता हैं।

यदि आप लंबे सम्य से किसी बिमारी से ग्रस्त हैं, तो आपका स्वास्थ्य चिंता का विषय बन सकता हैं। आप अपने स्वास्थ्य कि उचित देखभाल एवं परामर्श से सुधार भी कर सकते हैं। आपको वर्ष 2011 के अंत समय में अपने स्वास्थ्य के प्रति कुछ अतिरीक्त सावधानी रखने कि आवश्यक्ता हो सकती हैं।

आपके द्वारा अनुचित शब्दो के प्रयोग से ज्यादातर समय आपके अपने पारिवारिक सदस्यो एवं इष्ट मित्रो से कुछ मतभेद हो सक्ते हैं। जिस कारण आपके रिश्तों में विश्वास की कमी से हो सकती हैं और आप मानसिक अशांति अनुभव करेंगे। आप अपनी वाणी को संयमित कर बौधिक विचारो को अपना कर निश्वित परिवारिक जीवन में सुख प्राप्त कर सकते हैं। परिवार में बडे-बुजुर्गों का स्वास्थ्य चिंता का विषय हो सकता हैं।

इस वर्ष फालतू खर्च एवं अनावश्यक कर्ज के कारण आपकी आर्थिक स्थिती खराब हो सकती हैं, अतः सावधान रहें। यदि आप अविवाहित हैं तो वर्ष के मध्य और अंतर में विवाह की संभावनाए बन सकती हैं।

पति-पत्नी दोनो में आपसी तालमेल से दांपत्य जीवन सुख में भी वृद्धि होगी।

मेष मासिक राशि फल:

1 से 15 जनवरी 2011
इस माह आपके अंदर रचनात्मक कार्य और अध्यात्मिक दृष्टिकोण का विकास होगा। आप अपने कार्य का अच्छा प्रदर्शन करने में समर्थ होंगे। नया व्यवसाय या नौकरी प्राप्त हो सकती हैंम या आपके कार्य क्षेत्र में नये बदलाव हो सकते हैं। आपकी आर्थिक स्थिति प्रबल होगी। आपको त्वचा संबन्धी रोगों का सामना करना पड सकता है। आय से व्यय बढ सकता हैं।

16 से 31 जनवरी 2011
अत्याधिक परिश्रम और मेहनत से आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आपकी लापरवाही आपको लंबे समय का नुक्शान कर सकती हैं। नौकरी-व्यवसाय में आपको इच्छा से अधिक प्रगति प्राप्त होगी। सरकार से संबंधित कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता हैं। अपने संचित धन को पूंजि निवेश कर लाभ प्राप्त कर सकते है। अपने खाने- पीने का ध्यान रखे अन्यथा आपका का स्वास्थ्य नरम हो सकता है। मानसिक चिन्ताये बढ सकती है।

15 से 28 फ़रवरी 2011
नौकरी-व्यवसाय में उनाति ……………..>>

15 से 28 फ़रवरी 2011
उच्चाधिकारियों से लाभ प्राप्त होगा। यदि नौकरी में हैं तो ……………..>>

1 से 15 मार्च 2011
आकस्मिक धन प्राप्ति ……………..>>

16 से 31 मार्च 2011
सामाजिक मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मानसिक प्रन्नता ……………..>>

1 से 15 अप्रैल 2011
शत्रु पक्ष से आर्थिक ……………..>>

16 से 30 अप्रैल 2011
इस अवधि में आपके उपर कार्य के ……………..>>

1 से 15 मई 2011
पूर्ण परिश्रम एवं कड़ी मेहनत ……………..>>

16 से 31 मई 2011
आपके अंदर ……………..>>

1 से 15 जून 2011
अपने व्ययों पर नियन्त्रण रखने का प्रयास करें और ऋण ……………..>>

16 से 30 जून 2011
महत्व पूर्णा कार्यो को स्थिगीत करना या किसी और को देना ……………..>>

1 से 15 जुलाई 2011
आपके मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। चल-अचल संपत्ति या किसी ……………..>>

16 से 31 जुलाई 2011
परिवार और रिश्तेदारों से आत्मियता ……………..>>

1 से 15 अगस्त 2011
परिवार के सदस्यों के साथ आपके रिश्तों में ……………..>>

16 से 31 अगस्त 2011
परिवार के सदस्यों से ……………..>>

1 से 15 सितम्बर 2011
महत्वपूर्ण कार्यो को करने में आप सफल होंगे। पिता ……………..>>

16 से 30 सितम्बर 2011
आर्थिक स्थिती सुधरेगी परंतु धन ……………..>>

1 से 15 अक्टूबर 2011
व्यवसायिक यात्रा लाभदायक सिद्ध ……………..>>

16 से 31 अक्टूबर 2011
कुछ रुकावटो के बाद में व्यवसाय में धन लाभ प्राप्त होगा। महत्व के कार्यो के ……………..>>


1 से 15 नवम्बर 2011
किये गये पूंजि निवेश द्वारा आकस्मिक धन ……………..>>

16 से 30 नवम्बर 2011
भूमि-भवन के क्रय विक्रय से धन लाभ होगा।……………..>>

1 से 15 दिसम्बर 2011
आपके महत्व पूर्ण कार्यो में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिये अन्यथा ……………..>>

16 से 31 दिसम्बर 2011
अपने नाम और प्रतिष्ठा कायम रखने के लिये आपको पूर्ण योजनाबद्ध तरिके से ……………..>>



संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका दिसम्बर-2010 का अंक पढें।

इस लेख को प्रतिलिपि संरक्षण (Copy Protection) के कारणो से यहां संक्षिप्त में प्रकाशित किया गया हैं।
>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (जनवरी-2011)

हर कष्ट दूर होते हैं हनुमान चालीसा और बजरंग के पाठ से

Har Kasht Dur hote hai hanuman chalisa aur bajarang ban ke patha se

हर कष्ट दूर होते हैं हनुमान चालीसा और बजरंग के पाठ से


आज हर व्यक्ति अपने जीवन मे सभी भौतिक सुख साधनो की प्राप्ति के लिये भौतिकता की दौड मे भागते हुए किसी न किसी समस्या से ग्रस्त है। एवं व्यक्ति उस समस्या से ग्रस्त होकर जीवन में हताशा और निराशा में बंध जाता है। व्यक्ति उस समस्या से अति सरलता एवं सहजता से मुक्ति तो चाहता है पर यह सब केसे होगा? उस की उचित जानकारी के अभाव में मुक्त हो नहीं पाते। और उसे अपने जीवन में आगे गतिशील होने के लिए मार्ग प्राप्त नहीं होता। एसे मे सभी प्रकार के दुख एवं कष्टों को दूर करने के लिये अचुक और उत्तम उपाय है हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ।

हनुमान चालीसा और बजरंग बाण ही क्यु ?
क्योकि वर्तमान युग में श्री हनुमानजी शिवजी के एक एसे अवतार है जो अति शीघ्र प्रसन्न होते है जो अपने भक्तो के समस्त दुखो को हरने मे समर्थ है। श्री हनुमानजी का नाम स्मरण करने मात्र से ही भक्तो के सारे संकट दूर हो जाते हैं। क्योकि इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है, इसी कारण श्री हनुमानजी जन साधारण मे अत्यंत लोकप्रिय है। इनके मंदिर देश-विदेश सवत्र स्थित हैं। अतः भक्तों को पहुंचने में अत्याधिक कठिनाई भी नहीं आती है। हनुमानजी को प्रसन्न करना अति सरल है
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ के माध्यम से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा अर्चना से अपनी दैनिक दिनचर्या से थोडा सा समय निकाल ले तो उसकी समस्त परेशानी से मुक्ति मिल जाती है।

“यह नातो सुनि सुनाइ बात है ना किसी किताब मे लिखी बात है, यह स्वयं हमारा निजी एवं हमारे साथ जुडे लोगो के अनुभत है।”

उपयोगी जानकारी
• हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के नियमित पाठ से हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए प्रस्तुत हैं कुछ उपयोगी जानकारी ..
• नियमित रोज सुभह स्नान आदिसे निवृत होकर स्वच्छ कपडे पहन कर ही पाठ का प्रारम्भ करे।
• नियमित पाठ में शुद्धता एवं पवित्रता अनिवार्य है।
• हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ करते समय धूप-दीप अवश्य लगाये इस्से चमत्कारी एवं शीघ्र प्रभाव प्राप्त होता है।
• दीप संभव न होतो केवल ३ अगरबत्ती जलाकर ही पाठ करे।
• कुछ विद्वानो के मत से बिना धूप से हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ प्रभाव हिन होता है।
• यदि संभव हो तो प्रसाद केवल शुद्ध घी का चढाए अन्य था न चढाए
• जहा तक संभव हो हनुमान जी का सिर्फ़ चित्र (फोटो) रखे ।
• यदि घर मे अलग से पूजा घर की व्यवस्था हो तो वास्तुशास्त्र के हिसाब से मूर्ति रखना शुभ होगा। नही तो हनुमान जी का सिर्फ़ चित्र (फोटो) रखे।
• यदि मूर्ति हो तो ज्यद बडी न हो एवं मिट्टी कि बनी नही रखे।
• मूर्ति रखना चाहे तो बेहतर है सिर्फ़ किसी धातु या पत्थर की बनी मूर्ति रखे।
• हनुमान जी का फोटो/ मूर्ति पर सुखा सिंदूर लगाना चाहिए।
• नियमित पाठ पूर्ण आस्था, श्रद्धा और सेवा भाव से की जानी चाहिए। उसमे किसी भी तरह की संका या संदेह न रखे।
• सिर्फ़ देव शक्ति की आजमाइस के लिये यह पाठ न करे।
• या किसी को हानि, नुक्सान या कष्ट देने के उद्देश्य से कोइ पूजा पाठ नकरे।
• एसा करने पर देव शक्ति या इश्वरीय शक्ति बुरा प्रभाव डालती है या अपना कोइ प्रभाग नहि दिखाती! एसा हमने प्रत्यक्ष देखा है।
• एसा प्रयोग करने वालो से हमार विनम्र अनुरोध है कृप्या यह पाठ नकरे।
• समस्त देव शक्ति या इश्वरीय शक्ति का प्रयोग केवल शुभ कार्य उद्देश्य की पूर्ति के लिये या जन कल्याण हेतु करे।
• ज्यादातर देखा गया है की १ से अधिक बार पाठ करने के उद्देश्य से समय के अभाव मे जल्द से जल्द पाठ कने मे लोग गलत उच्चारण करते है। जो अन उचित है।
• समय के अभाव हो तो ज्यादा पाठ करने कि अपेक्षा एक ही पठ करे पर पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा से करे।
• पाठ से ग्रहों का अशुभत्व पूर्ण रूप से शांत हो जाता है।
• यदि जीवन मे परेशानीयां और शत्रु घेरे हुए है एवं आगे कोइ रास्ता या उपाय नहीं सुझ रहा तो डरे नही नियमित पाठ करे आपके सारे दुख-परेशानीयां दूर होजायेगी अपनी आस्था एवं विश्वास बनाये रखे।

बुधवार, जनवरी 05, 2011

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जनवरी 2011 में प्रकशित लेख

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गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जनवरी 2011 में प्रकशित लेख

विशेष लेख
मेष राशि वार्षिक भविष्य फल 201123तुला राशि वार्षिक भविष्य फल 201153
वृषभ राशि वार्षिक भविष्यफल 201128वृश्चिक राशि वार्षिक भविष्यफल 201158
मिथुन राशि वार्षिक भविष्यफल201133धनु राशि वार्षिक भविष्य फल 201163
कर्क राशि वार्षिक भविष्य फल 201138मकर राशि वार्षिक भविष्य फल 201168
सिंह राशि वार्षिक भविष्य फल 201143कुंभ राशि वार्षिक भविष्य फल 201173
कन्या राशि वार्षिक भविष्यफल 201148मीन राशि वार्षिक भविष्य फल 201178

अनुक्रम
संपादकीय4जनवरी 2011 मासिक पंचांग 83
गणेश पूजन से नवग्रह शांति 5जनवरी-2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार 85
सूर्यग्रहण का प्रभाव (4 जनवरी, 2011)  6जनवरी 2011 -विशेष योग87
सूर्य ग्रहण का धार्मिक  और आध्यात्मिक महत्व7दिन-रात के चौघडिये 88
जन्म वार से व्यक्तित्व 8दिन-रात  होरा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक 89
दिन-रात से व्यक्तित्व 9वास्तु परामर्श90
क्षमा-प्रार्थना 9ज्योतिष परामर्श 91
सर्व कार्य सिद्धि कवच10सर्व रोगनाशक यंत्र/कवच92
वर्ष 2011 में आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव11मंत्र सिद्ध कवच94
ग्रह शांति हेतु करें नवग्रह एवं दान
13
YANTRA LIST 95
14 जनवरी, मकर संक्रांति पर्व 14GEM STONE97
व्रत-उपवास द्वारा ग्रह शांति
15
BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION98
राशि के अनुसार सफलता के उपाय17सूचना99
हर कष्ट दूर होते हैं हनुमान चालीसा और बजरंग के पाठ से 20हमारा उद्देश्य101
वार्षिक राशिफल से संबंधित सूचना 22



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मंगलवार, जनवरी 04, 2011

सूर्य ग्रहण क्यों होता है?

Surya Grahan kyu hota he?
सूर्य ग्रहण क्यों होता है?


वैज्ञानिकों के अनुशार किसी खगोलीय पिण्ड का पूर्ण अथवा आंशिक रुप से किसि अन्य पिण्ड से ढक जाना या उस पिण्ड के पीछे आ जाना ग्रहण कहलाता हैं। खगोलीय पिण्ड किसी अन्य पिण्ड ढक जाने पर नजर नहीं आता तो, उसे ग्रहण कहां जाता हैं।
सूर्य ग्रहण तब कहां जाता हैं, पृथ्वी और सूर्य के बीच में चन्दमा के आजा ने पर सूर्य ढंक जाता हैं, और पृथ्वी के कुछ हिस्सो पर से सूर्य का नजर नहीं आना सूर्य ग्रहन कहलाता हैं। जब सूर्य पूर्ण रुप से या आंशिक रुप से चन्द्र द्वारा ढक जाने पर सूर्य नजर नहीं आता तो, उसे सूर्य ग्रहण अथवा आंशिक सूर्य ग्रहण कहां जाता हैं।
सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते है।
पूर्ण सूर्य ग्रहण
जब चन्द्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में ले लेता हैं, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता हैं। इसके फलस्वरुप सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच नहीं पाता हैं और पृथ्वी पर अंधकार कि स्थिति हो जाती हैं। इस प्रकार बनने वाले ग्रहण को पूर्ण सूर्य ग्रहण कहां जाता हैं।
आंशिक सूर्यग्रहण
चन्दमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया से ढंक पाता तो उसे आंशिक सूर्यग्रहण कहा जाता हैं।
वलय सूर्यग्रहण
चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढक लेता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता हो, तो उसे वलय सूर्यग्रहण कहां जाता हैं। इस ग्रहण में सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन के समान प्रतीत होता हैं।

सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

Surya Grahan Ka Dharmik our adhyatmik mahatva

सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व


सूर्य ग्रहण के प्रभावो का विस्तृत वर्णन भारतीय शास्त्रों में किया गया हैं। हजारो वर्ष पूर्व से भारत के विद्वान ऋषि-मुनियों ने सूर्य ग्रहण से संबंधित गणना करने में समर्थ। भारतीय शास्त्रो के अनुशार सूर्यग्रहण के प्रभाव से मुख्य रुप से देश कि सत्ताओं में परिवर्तन कि घटनाएं होती हैं एवं देश कि सुरक्षा से संबंधित संकट होते हैं। यह घटनाएं मुख्यतः जिस स्थान से सूर्यग्रहण देखाजाए उस स्थानो पर होने कि मानयाएं हैं।

सूर्य ग्रहण से जुडी पौराणिक कथा
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार एक बार राहू ने सूर्य पर आक्रमण कर सूर्य के तेज को अन्धकारमय कर दिया था। जिस कारण से भूलोक के निवासी सूर्य के को नहीं देख पाने के कारण घबरा गयें।
इस अन्धकारमय संसार को प्रकाश मय करने के लिये देवराज इंद्र नें महर्षि अत्री कि सहायता से उनकी सिद्धियों एवं शक्तियों के प्रयोग से राहू की छाया का नाश करसूर्य को पुनः प्रकाशवान कर दिया। इस प्रकार राहू के प्रभाव से सूर्य की रक्षा की थी।
सूर्य ग्रहण के दिन सत्ता परिवर्तन
भारत के प्रमुख ग्रंथो में से एक महाभारत मे उल्लेखीत हैं कि सूर्यग्रहण के दिन कौरवों ने पांडवों के साथ जुए में उनका राजपाट जीत लिया था और पांडवों को सत्ता को अपने हाथो में ले लिया था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य राज्य एवं राजा अर्थात सत्ता चलाने वाले मंत्री एवं मुख्याओं का कारक हैं। सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य का ग्रास होने कि मान्यता हैं। इस लिये यदि किसी देश में एक वर्ष में तीन अथवा तीन से अधिक सूर्यग्रहण दिखते हैं। उस देश में सता परिवर्तन और प्राकृतिक संकटआने की संभावनाएं बढजाती हैं।

• सूर्यग्रहण के दिन महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन ने कौरवों के सेनापति (जयद्रथ) का वध किया था।
• सूर्यग्रहण के दिन कृष्ण की नगरी द्वारका समंदर में समागई थी।
• सूर्यग्रहण के दिन हि द्वारका नगरी कि दोबारा से बसाई गईथी।
सूर्य ग्रहण आध्यात्मिक महत्व

एसी मान्यता हैं कि सूर्य को अनुकूल बनाने के लिये सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का ध्यान-जप करने से सूर्य के नकारात्मक प्रभावो को कम किया जा सकता हैं। ज्योतिष शास्त्र जे अनुशार सूर्य आत्मविश्वास, पिता, ओर उर्जा का कारक ग्रह हैं। अतः ग्रहण काल में सूर्य मंत्र जाप, होम करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में एवं तेज में वृद्धि होती हैं।

सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व
सूर्य ग्रहण काल में सूतक के नियम लगने के कारण ग्रहण के बाद ही शुभ कर्म जेसे पूजा, अनुष्ठान, दान आदि कार्य करने लाभदायक होते हैं। सूतक काल की अवधि में मंत्र , जप, तप इत्यादी सिद्धि के कार्य किये जाते हैं। परंतु आजके भौतिकता वादी वैज्ञानिक युग में आधुनिकता कि दौड में अंधि दौड लगाने वाले व्यक्ति ग्रहण काल के प्रभाव को नकार देते हैं।

सूर्य ग्रहण का प्रभाव (4 जनवरी, 2011)

Surya Grahan ka prabhav 4 january 2011

सूर्य ग्रहण का प्रभाव (4 जनवरी, 2011)


4 जनवरी, 2011 के दिन लगने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जिस का प्रभाव पृथ्वी पर दोपहर 12:10 से 16:31 मिनट तक रहेगा। भारत में ग्रहण काल सबसे पहले 4:37 मिनट पर प्रारम्भ होगा। यहं आंशिक सूर्य ग्रहण होने के कारण ग्रहण कि थोडी सी झलक भारत के कुछ राज्यो में हि दिखाई पड सकती हैं।

जानकारो के अनुशार इस वर्ष भारत में सूर्य ग्रहण दोपहर के समय दिल्ली, उतर भारत, पश्चिम भारत, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उतराखण्ड के हिस्सो में दिखाई देगा।
भारत के अलावा अन्य देशों में भी दिखेगा आंशिक सूर्य ग्रहण।

इस वर्ष 2011 में तीन सूर्य ग्रहण दिखाई देंगे और तीनो आंशिक सूर्य होंगे।
04 जनवरी 2011 को आंशिक सूर्य ग्रहण।
01 जून 2011 को आंशिक सूर्य ग्रहण।
01 जूलाई 2011 को आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा।

4 जनवरी, 2011 ग्रहण का सूतक (अशुद्ध समय)
4 जनवरी, 2011 को ग्रहण का सूतक काल प्रात: 2 बजकर 37 मिनट से प्रारम्भ होगा।

विद्वानो के मत से बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को छोडकर अन्य लोगों पर सूतक का प्रभाव होता हैं। इस कारण सूतक काल से पूर्व भोजनादि ग्रहण कर लेना उचित रहता हैं। सूतक काल प्रारंभ होने से पूर्व द्रव्य पदार्थ जैसे दूध,
दही, आचार, चटनी, मुरब्बा इत्यादि में कुशा रख देना चाहिये जिस्से ग्रहण के प्रभाव से यह सामग्रीया अशुद्ध नहीं होती है। परंतु सूखे खाद्य पदार्थों में अशुद्धता नहीं होती हैं।

ग्रहण अवधि में किये जाने वाले धार्मिक कार्य
ग्रहण के स्पर्श काल में स्नान, ग्रहण मध्य काल में हवन, इष्ट आराधना, मंत्र जाप ग्रहण मोक्ष काल में श्राद्ध, अन्न, वस्त्र, धनादि का दान सर्व मुक्त होने पर स्नान करना चाहिए।

ग्रहण काल में तीर्थ स्थलों में जल स्नान का महत्व
ग्रहण काल में स्नान के लिये प्रयोग किये जाने वाले जलों में समुद्र का जल सबसे श्रेष्ठ कहा गया है। एसी मान्यता हैं कि ग्रहण काल में समुद्र नदी के जल या तीर्थ स्थान पर स्थित की नदी में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती हैं। यदि किसी कारण से नदी का जल स्नान करने के लिये न मिल पाये तो तालाब का जल प्रयोग किया जा सकता है। वह भी न मिले तो झरने क जल प्रयोग में लेना चाहिए। यह भी न मिले तो भूमि में स्थित जल को स्नान के लिये लिया जा सकता है।

ग्रहण में ध्यान देने योग्य अन्य बातें
विद्वानो के मत से ग्रहण के समय धारण किये हुए वस्त्र आदि को ग्रहण के पश्चात धोकर एवं शुद्ध करके ही धारण करना चाहिये।ग्रहण के प्रभाव से मुक्त क्षेत्र जिस स्थन पर ग्रहण दिखाई नहीं देगा उस क्षेत्र के निवासियों को ग्रहण काल के सूतक, स्नान-दान, आदि आवश्यक नहीं होता।