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रविवार, अगस्त 21, 2011

श्री कृष्ण से संबंधित पूर्व प्रकाशित लेख


 कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, क्रिष्ण जन्माष्टमी व्रत, आद्याकाली जयंती, कालाष्टमी व्रत, जन्माष्टमी व्रत, गोकुलाष्टमी, श्री कृष्ण जन्मोत्सव, કૃષ્ણ જન્માષ્ટમી વ્રત, ક્રિષ્ણ જન્માષ્ટમી વ્રત, આદ્યાકાલી જયંતી, કાલાષ્ટમી વ્રત, જન્માષ્ટમી વ્રત, ગોકુલાષ્ટમી, શ્રી કૃષ્ણ જન્મોત્સવ,   ಕೃಷ್ಣ ಜನ್ಮಾಷ್ಟಮೀ ವ್ರತ, ಕ್ರಿಷ್ಣ ಜನ್ಮಾಷ್ಟಮೀ ವ್ರತ, ಆದ್ಯಾಕಾಲೀ ಜಯಂತೀ, ಕಾಲಾಷ್ಟಮೀ ವ್ರತ, ಜನ್ಮಾಷ್ಟಮೀ ವ್ರತ, ಗೋಕುಲಾಷ್ಟಮೀ, ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣ ಜನ್ಮೋತ್ಸವ, க்ருஷ்ண ஜந்மாஷ்டமீ வ்ரத, க்ரிஷ்ண ஜந்மாஷ்டமீ வ்ரத, ஆத்யாகாலீ ஜயம்தீ, காலாஷ்டமீ வ்ரத, ஜந்மாஷ்டமீ வ்ரத, கோகுலாஷ்டமீ, ஶ்ரீ க்ருஷ்ண ஜந்மோத்ஸவ,  కృష్ణ జన్మాష్టమీ వ్రత, క్రిష్ణ జన్మాష్టమీ వ్రత, ఆద్యాకాలీ జయంతీ, కాలాష్టమీ వ్రత, జన్మాష్టమీ వ్రత, గోకులాష్టమీ, శ్రీ కృష్ణ జన్మోత్సవ,  കൃഷ്ണ ജന്മാഷ്ടമീ വ്രത, ക്രിഷ്ണ ജന്മാഷ്ടമീ വ്രത, ആദ്യാകാലീ ജയംതീ, കാലാഷ്ടമീ വ്രത, ജന്മാഷ്ടമീ വ്രത, ഗോകുലാഷ്ടമീ, ശ്രീ കൃഷ്ണ ജന്മോത്സവ,  ਕ੍ਰੁਸ਼੍ਣ ਜਨ੍ਮਾਸ਼੍ਟਮੀ ਵ੍ਰਤ, ਕ੍ਰਿਸ਼੍ਣ ਜਨ੍ਮਾਸ਼੍ਟਮੀ ਵ੍ਰਤ, ਆਦ੍ਯਾਕਾਲੀ ਜਯਂਤੀ, ਕਾਲਾਸ਼੍ਟਮੀ ਵ੍ਰਤ, ਜਨ੍ਮਾਸ਼੍ਟਮੀ ਵ੍ਰਤ, ਗੋਕੁਲਾਸ਼੍ਟਮੀ, ਸ਼੍ਰੀ ਕ੍ਰੁਸ਼੍ਣ ਜਨ੍ਮੋਤ੍ਸਵ,  কৃষ্ণ জন্মাষ্টমী ৱ্রত, ক্রিষ্ণ জন্মাষ্টমী ৱ্রত, আদ্যাকালী জযংতী, কালাষ্টমী ৱ্রত, জন্মাষ্টমী ৱ্রত, গোকুলাষ্টমী, শ্রী কৃষ্ণ জন্মোত্সৱ, କୃଷ୍ଣ ଜନ୍ମାଷ୍ଟମୀ ବ୍ରତ, କ୍ରିଷ୍ଣ ଜନ୍ମାଷ୍ଟମୀ ବ୍ରତ, ଆଦ୍ଯାକାଲୀ ଜଯଂତୀ, କାଲାଷ୍ଟମୀ ବ୍ରତ, ଜନ୍ମାଷ୍ଟମୀ ବ୍ରତ, ଗୋକୁଲାଷ୍ଟମୀ, ଶ୍ରୀ କୃଷ୍ଣ ଜନ୍ମୋତ୍ସଵ, krushna janmasthami, shree  krushna janmasthamee, shri krushna janmasthami, shree  krushna janmasthamee Vrat, gokulashtami, shri krushna Janmotshav,

श्री कृष्ण से संबंधित पूर्व प्रकाशित लेख 

श्रीकृष्ण बीसा यंत्र

 गुरुत्व ज्योतिष मंत्र सिद्ध श्री कृष्ण बीसा यंत्र, गुरुत्व कार्यालय, मन्त्र सिद्ध कृष्ण बीशा यंत्र, कृष्ण बिसा यंत्र, श्री क्रिष्ण बिशा यन्त्र, श्री कृष्न विसा यंत्र, મંત્ર સિદ્ધ શ્રી કૃષ્ણ બીસા યંત્ર, મન્ત્ર સિદ્ધ કૃષ્ણ બીશા યંત્ર, કૃષ્ણ બિસા યંત્ર, શ્રી ક્રિષ્ણ બિશા યન્ત્ર, શ્રી કૃષ્ન વિસા યંત્ર, ಮಂತ್ರ ಸಿದ್ಧ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣ ಬೀಸಾ ಯಂತ್ರ, ಮನ್ತ್ರ ಸಿದ್ಧ ಕೃಷ್ಣ ಬೀಶಾ ಯಂತ್ರ, ಕೃಷ್ಣ ಬಿಸಾ ಯಂತ್ರ, ಶ್ರೀ ಕ್ರಿಷ್ಣ ಬಿಶಾ ಯನ್ತ್ರ, ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ನ ವಿಸಾ ಯಂತ್ರ, மம்த்ர ஸித்த ஶ்ரீ க்ருஷ்ண பீஸா யம்த்ர, மந்த்ர ஸித்த க்ருஷ்ண பீஶா யம்த்ர, க்ருஷ்ண பிஸா யம்த்ர, ஶ்ரீ க்ரிஷ்ண பிஶா யந்த்ர, ஶ்ரீ க்ருஷ்ந விஸா யம்த்ர, మంత్ర సిద్ధ శ్రీ కృష్ణ బీసా యంత్ర, మన్త్ర సిద్ధ కృష్ణ బీశా యంత్ర, కృష్ణ బిసా యంత్ర, శ్రీ క్రిష్ణ బిశా యన్త్ర, శ్రీ కృష్న విసా యంత్ర, മംത്ര സിദ്ധ ശ്രീ കൃഷ്ണ ബീസാ യംത്ര, മന്ത്ര സിദ്ധ കൃഷ്ണ ബീശാ യംത്ര, കൃഷ്ണ ബിസാ യംത്ര, ശ്രീ ക്രിഷ്ണ ബിശാ യന്ത്ര, ശ്രീ കൃഷ്ന വിസാ യംത്ര, ਮਂਤ੍ਰ ਸਿੱਧ ਸ਼੍ਰੀ ਕ੍ਰੁਸ਼੍ਣ ਬੀਸਾ ਯਂਤ੍ਰ, ਮਨ੍ਤ੍ਰ ਸਿੱਧ ਕ੍ਰੁਸ਼੍ਣ ਬੀਸ਼ਾ ਯਂਤ੍ਰ, ਕ੍ਰੁਸ਼੍ਣ ਬਿਸਾ ਯਂਤ੍ਰ, ਸ਼੍ਰੀ ਕ੍ਰਿਸ਼੍ਣ ਬਿਸ਼ਾ ਯਨ੍ਤ੍ਰ, ਸ਼੍ਰੀ ਕ੍ਰੁਸ਼੍ਨ ਵਿਸਾ ਯਂਤ੍ਰ, মংত্র সিদ্ধ শ্রী কৃষ্ণ বীসা যংত্র, মন্ত্র সিদ্ধ কৃষ্ণ বীশা যংত্র, কৃষ্ণ বিসা যংত্র, শ্রী ক্রিষ্ণ বিশা যন্ত্র, শ্রী কৃষ্ন ৱিসা যংত্র, ମନ୍ତ୍ର ସିଦ୍ଧ, ମଂତ୍ର ସିଦ୍ଧ ଶ୍ରୀ କୃଷ୍ଣ ବୀସା ଯଂତ୍ର, ମନ୍ତ୍ର ସିଦ୍ଧ କୃଷ୍ଣ ବୀଶା ଯଂତ୍ର, କୃଷ୍ଣ ବିସା ଯଂତ୍ର, ଶ୍ରୀ କ୍ରିଷ୍ଣ ବିଶା ଯନ୍ତ୍ର, ଶ୍ରୀ କୃଷ୍ନ ଵିସା ଯଂତ୍ର, GURUTVA JYOTISH, Mantra siddha shri krushna bisa yantra, mantra siddha krishna visha yantram, GURUTVA KARYALAY, krushna visha yantra, krishna bisha yantra, krisha bisha yantra,

श्रीकृष्ण बीसा यंत्र

किसी भी व्यक्ति का जीवन तब आसान बन जाता हैं जब उसके चारों और का माहोल उसके अनुरुप उसके वश में हों। जब कोई व्यक्ति का आकर्षण दुसरो के उपर एक चुम्बकीय प्रभाव डालता हैं, तब  लोग उसकी सहायता एवं सेवा हेतु तत्पर होते है और उसके प्रायः सभी कार्य बिना अधिक कष्ट व परेशानी से संपन्न हो जाते हैं। आज के भौतिकता वादि युग में हर व्यक्ति के लिये दूसरो को अपनी और खीचने हेतु एक प्रभावशालि चुंबकत्व को कायम रखना अति आवश्यक हो जाता हैं। आपका आकर्षण और व्यक्तित्व आपके चारो ओर से लोगों को आकर्षित करे इस लिये सरल उपाय हैं, श्रीकृष्ण बीसा यंत्र। क्योकि भगवान श्री कृष्ण एक अलौकिव एवं दिवय चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी थे। इसी कारण से श्रीकृष्ण बीसा यंत्र के पूजन एवं दर्शन से आकर्षक व्यक्तित्व प्राप्त होता हैं।
     श्रीकृष्ण बीसा यंत्र के साथ व्यक्तिको दृढ़ इच्छा शक्ति एवं उर्जा प्राप्त होती हैं, जिस्से व्यक्ति हमेशा एक भीड में हमेशा आकर्षण का केंद्र रहता हैं।
     यदि किसी व्यक्ति को अपनी प्रतिभा व आत्मविश्वास के स्तर में वृद्धि, अपने मित्रो व परिवारजनो के बिच में रिश्तो में सुधार करने की ईच्छा होती हैं उनके लिये श्रीकृष्ण बीसा यंत्र का पूजन एक सरल व सुलभ माध्यम साबित हो सकता हैं।
     श्रीकृष्ण बीसा यंत्र पर अंकित शक्तिशाली विशेष रेखाएं, बीज मंत्र एवं अंको से व्यक्ति को अद्द्भुत आंतरिक शक्तियां प्राप्त होती हैं जो व्यक्ति को सबसे आगे एवं सभी क्षेत्रो में अग्रणिय बनाने में 
श्रीकृष्ण बीसा कवच
श्रीकृष्ण बीसा कवच को केवल विशेष शुभ मुहुर्त में निर्माण किया जाता हैं। कवच को विद्वान कर्मकांडी ब्राहमणों द्वारा शुभ मुहुर्त में शास्त्रोक्त विधि-विधान से विशिष्ट तेजस्वी मंत्रो द्वारा सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित पूर्ण चैतन्य युक्त करके निर्माण किया जाता हैं। जिस के फल स्वरुप धारण करता व्यक्ति को शीघ्र पूर्ण लाभ प्राप्त होता हैं। कवच को गले में धारण करने से वहं अत्यंत प्रभाव शाली होता हैं। गले में धारण करने से कवच हमेशा हृदय के पास रहता हैं जिस्से व्यक्ति पर उसका लाभ अति तीव्र एवं शीघ्र ज्ञात होने लगता  हैं।
मूलय मात्र: 1900
सहायक सिद्ध होती हैं।
     श्रीकृष्ण बीसा यंत्र के पूजन व नियमित दर्शन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त कर समाज में स्वयं का अद्वितीय स्थान स्थापित करें।
     श्रीकृष्ण बीसा यंत्र अलौकिक ब्रह्मांडीय उर्जा का संचार करता हैं, जो एक प्राकृत्ति माध्यम से व्यक्ति के भीतर सद्दभावना, समृद्धि, सफलता, उत्तम स्वास्थ्य, योग और ध्यान के लिये एक शक्तिशाली माध्यम हैं!
  • श्रीकृष्ण बीसा यंत्र के पूजन से व्यक्ति के सामाजिक मान-सम्मान व पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती हैं।
  • विद्वानो के मतानुशार श्रीकृष्ण बीसा यंत्र के मध्यभाग पर ध्यान योग केंद्रित करने से व्यक्ति कि चेतना शक्ति जाग्रत होकर शीघ्र उच्च स्तर को प्राप्तहोती हैं ।
  • जो पुरुषों और महिला अपने साथी पर अपना प्रभाव डालना चाहते हैं और उन्हें अपनी और आकर्षित करना चाहते हैं। उनके लिये श्रीकृष्ण बीसा यंत्र उत्तम उपाय सिद्ध हो सकता हैं।
  • पति-पत्नी में आपसी प्रम की वृद्धि और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये श्रीकृष्ण बीसा यंत्र लाभदायी होता हैं।
मूल्य:- Rs. 550 से Rs. 8200 तक उप्लब्द्ध

यंत्र के विषय में अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें। 

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Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785
                gurutva.karyalay@gmail.com

रविवार, अगस्त 14, 2011

जैन धर्मके विशिष्ट यंत्रो की सूची

जैन धर्मके विशिष्ट यंत्रो की सूची
1.श्री चौबीस तीर्थंकरका महान प्रभावित चमत्कारी यंत्र,  2. श्री चोबीस तीर्थंकर यंत्र, 3. कल्पवृक्ष यंत्र,  4.        चिंतामणी पार्श्वनाथ यंत्र, 5.चिंतामणी यंत्र (पैंसठिया यंत्र), 6. चिंतामणी चक्र यंत्र,7.श्री चक्रेश्वरी यंत्र, 8.श्री घंटाकर्ण महावीर यंत्र, 9.श्री घंटाकर्ण महावीर सर्व सिद्धि महायंत्र (अनुभव सिद्ध संपूर्ण श्री घंटाकर्ण महावीर पतका यंत्र), 10.श्री पद्मावती यंत्र, 11.श्री पद्मावती बीसा यंत्र, 12.श्री पार्श्वपद्मावती र्ह्रींकार यंत्र, 13.पद्मावती व्यापार वृद्धि यंत्र, 14.श्री धरणेन्द्र पद्मावती यंत्र, 15.श्री पार्श्वनाथ ध्यान यंत्र, 16.श्री पार्श्वनाथ प्रभुका यंत्र, 17.भक्तामर यंत्र (गाथा नंबर १ से ४४ तक),18.मणिभद्र यंत्र, 19.                              श्री यंत्र, 20.श्री लक्ष्मी प्राप्ति और व्यापार वर्धक यंत्र, 21.श्री लक्ष्मीकर यंत्र, 22.लक्ष्मी प्राप्ति यंत्र, 23.महाविजय यंत्र, 24.विजयराज यंत्र, 25.विजय पतका यंत्र, 26.विजय यंत्र, 27.सिद्धचक्र महायंत्र, 28.दक्षिण मुखाय शंख यंत्र, 29.दक्षिण मुखाय यंत्र, 30.श्री एकाक्षी नारियेर यंत्र, 31.सर्वतो भद्र यंत्र, 32.सर्व संपत्तिकर यंत्र, 33.सर्वकार्य-सर्व मनोकामना सिद्धिअ यंत्र (१३० सर्वतोभद्र यंत्र), 34.ऋषि मंडल यंत्र, 35.जगदवल्लभ कर यंत्र, 36.ऋद्धि सिद्धि मनोकामना मान सम्मान प्राप्ति यंत्र, 37.ऋद्धि सिद्धि समृद्धि दायक श्री महालक्ष्मी यंत्र, 38.विषम विष निग्रह कर यंत्र, 39.क्षुद्रो पद्रव निर्नाशन यंत्र, 40.बृहच्चक्र यंत्र, 41.वंध्या शब्दापह यंत्र, 42.मृतवत्सा दोष निवारण यंत्र, 43.कांक वंध्यादोष निवारण यंत्र, 44.बालग्रह पीडा निवारण यंत्र, 45.लधुदेव कुल यंत्र, 46.नवगाथात्मक उवसग्गहरं स्तोत्रका विशिष्ट यंत्र, 47.उवसग्गहरं यंत्र, 48.श्री पंच मंगल महाश्रृत स्कंध यंत्र, 49.ह्रींकार मय बीज मंत्र, 50.वर्धमान विद्या पट्ट यंत्र, 51.विद्या यंत्र, 52.सौभाग्यकर यंत्र, 53.डाकिनी, शाकिनी, भय निवारक यंत्र, 54.भूतादि निग्रह कर यंत्र, 55.ज्वर निग्रह कर यंत्र, 56.शाकिनी निग्रह कर यंत्र, 57.आपत्ति निवारण यंत्र, 58.शत्रुमुख स्तंभन यंत्र,
Jain Dharm Ke Vishisht yantram, Yantra, 
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