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रविवार, जून 10, 2018

GURUTVA JYOTISH E-MAGAZINE JUN-2018 गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जून 2018 में प्रकशित लेख

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गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जून 2018 में प्रकशित लेख
गायत्री जयंति विशेष

अनुक्रम
गायत्री विशेषांक में पढ़े
माता गायत्री समस्त विद्याओं की जननी हैं
7
गायत्री मंत्र का संक्षिप्त परिचय
8
गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों का ब्रह्मांड से गूढ़ संबंध
11
गायत्री मंत्र के संदर्भ में महापुरुषों के वचन
13
गायत्री मन्त्र के विलक्षण प्रयोग
17
विभिन्न देवी-देवता के गायत्री मन्त्र
20
नवग्रह की शांति के लिये गायत्री मंत्र
24
देवी गायत्री का सरल पूजन
27
गायत्री स्तोत्र माहात्म्य
31
अघनाशकगायत्रीस्तोत्र
34
गायत्री स्तोत्र
35
गायत्रीस्तोत्रम्
35
गायत्री चालीसा
36
श्री गायत्री शाप विमोचनम्
37
श्री गायत्री जी की आरती
37
रोग निवारण के पवित्र जल
40
श्री गायत्री कवच
43
विश्वामित्र संहितोक् गायत्री कवच
44
श्रीगायत्रीपुरश्चरणविधिः
46
श्रीगायत्र्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्
48
श्रीगायत्रीकल्प
49
अथ श्रीगायत्रीपद्धतिः
53
श्रीगायत्र्युपनिषत् (हृदयम्)
58
श्रीगायत्रीकवचम्
60
अथ श्रीगायत्रीपटलम्
62
गायत्री मन्त्र नित्य जप विधि
64
अथ श्रीगायत्रीस्तवराजः
66
गायत्री कवचम्
68
गायत्री सुप्रभातम्
69
गायत्रीरहस्योपनिषत्
70
गायत्री मन्त्रार्थः सार्थ
72
श्री गायत्री दिव्य सहस्रनाम स्तोत्रम्
73
स्थायी और अन्य लेख
प्रिय पाठक बंधु
            जनवरी-2014 अंक के विलंबित प्रकाशन के कारण जनवरी 2014 का मासिक राशि फल, मासिक पंचांग, मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार, ग्रह चलन, विशेष योग इत्यादि का संपन्न नहीं किया गया हैं।
फ्रीलांस (स्वतंत्र) लेखकों का स्वागत हैं...
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GURUTVA JYOTISH E-MAGAZINE JUN-2018

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मंगलवार, अप्रैल 17, 2018

अक्षय तृतीया का महत्व

वैदिक संस्कृति में अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई मुहूर्त देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषण, जमीन, मकान वाहन आदि की खरीददारी आदि किए जा सकते हैं। इस दिन नये वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई दुकान, ऑफिस आदि व्यवसायीक कार्य स्थल का शुभारंभ श्रेष्ठ माना जाता है। पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन किया गया दान, अक्षय फल प्रदान करता है।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से तथा इष्ट पूजन से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन और दान भी अक्षय हो जाता है। 
इस दिन माता लक्ष्मी और नारायण का सफेद कमल अथवा सफेद गुलाब या पीले गुलाब से पूजन करना चाहिये।

सर्वत्र शुक्ल पुष्पाणि प्रशस्तानि सदार्चने।
दानकाले च सर्वत्र मंत्र मेत मुदीरयेत्॥
अर्थात: सभी महीनों की तृतीया में सफेद पुष्प से किया गया पूजन प्रशंसनीय माना गया है।

एसी पौराणिक मान्यता हैं कि अक्षय तृतीया के दिन सोने-चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। अक्षय तृतीया के दिन सोना व चांदी खरीदना शुभ माना जाता है, क्योकि इस दिन सोना और आभूषण खरीदने से वर्ष भर जीवन में समृद्धि बनी रहती है। इस दिन सोने या चांदी के आभूषणों के साथ माँ लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने का विधान हमारे धर्मग्रंथों में हैं।

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सोमवार, अप्रैल 16, 2018

अक्षय तृतिया स्वयं सिद्धि अबूझ मुहूर्त्त 18 अप्रैल 2018 बुधवार

अक्षय तृतिया स्वयं सिद्धि अबूझ मुहूर्त्त

वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता हैं। अक्षय तृतीया स्वयंसिद्ध व अबूझ मुहूर्त हैं। एसी मान्यता हैं, कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान, हवन, पूजन अक्षय (संपूर्ण) अर्थात जिसका क्षय (नाश) नहीं होता हैं।

हिंदू धर्मग्रंथो में अक्षय तृतीया तिथि से जुड़े कई रोचक तथ्यों का वर्णन मिलता है। यहां आपके मार्गदर्शन हेतु कुछ प्रमुख तथ्य प्रस्तुत हैं।
भारतीय पंचाग के अनुसार वर्ष में 19 अबूझ मुहूर्त व 4 स्वयं सिद्धि मुहूर्त्त होते हैं। अक्षय तृतीया (आखा तीज) भी अबूझ मुहूर्त व सिद्धि मुहूर्त्त में से एक हैं।

माँ महालक्ष्मी का प्रिय अक्षय तृतीया, वर्ष 2018 में 18 अप्रैल बुधवार को है। विद्वानों की माने तो "इस दिन एक दुर्लभ संयोग महा सिद्धियोग" हो रहा हैं, इससे पूर्व यह महा सिद्धियोग 2007 में निर्मित हुवा था जो अब 11 साल बाद पुनः निर्मित हो रहा हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के दौरान सभी तरह के मांगलिक कार्य किये जा सकता है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया से ही त्रेतायुग की शुरुआत मानी जाती हैं।

अक्षय तृतीया के दिन ही चार धामो में से एक श्री भगवान बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन वर्ष में एक बार ही वृंदावन में श्री बांकेबिहारीजी के मंदिर में श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं।

शास्त्रो में उल्लेख हैं की अक्षय तृतीया के दिन भगवान नर-नारायण अवतरित हुवे थे।

अक्षय तृतीया के दिन भगवान श्री विष्णु ने श्रीपरशुरामजी और हयग्रीव के रुप में अवतरित हुवे थे।

स्वयंसिद्ध व अबूझ मुहूर्त होने के कारण अक्षय तृतीया के दिन संपूर्ण भारत वर्ष में सबसे अधिक विवाह होते हैं।

अक्षय तृतिया के दिन गंगा स्नान का बडा महत्व माना जाता हैं।

इस लिए अबूझ महुर्त में कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ किया जा सकता हैं। शास्त्रोक्त विधान के अनुशार कार्य प्रारम्भ करने के लिये मुहूर्त के अन्य किसी नियम को देखना आवश्यक नहीं हैं। अबूझ महुर्त में किसी भी समय में कार्य प्रारम्भ किया जा सकता हैं।

अक्षय तृतिया के दिन नई भूमि-भव-वाहन खरीदना, सोना-चांदि खरीदना जैसे स्थिर लक्ष्मी से संबंधित वस्तुएं खरीदना सर्वोतम माना गया हैं।
नये व्यवसायीक कार्य का शुभारम्भ करने के लिये इस दिन को प्रयोग किया जा सकता हैं।

इस दिन शुभ एवं पवित्र कार्य करने से जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।

तृतीया तिथि में शुभ मुहूर्त 4.47 बजे से आरंभ हो जाएगा और रात 3.03 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य, क्रय किए जा सकता हैं।

शास्त्रोक्त विधि-विधान से देवी लक्ष्मी का पूजन शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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