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बुधवार, जून 01, 2011

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जून 2011 में प्रकशित लेख

UN 2011 free monthly Astrology Magazines, You can read in Monthly GURUTVA JYOTISH Magazines Astrology, Numerology, Vastu, Gems Stone, Mantra, Yantra, Tantra, Kawach & ETC Related Article absolutely free of cost. गुरुत्व ज्योतिष मासिक ई पत्रीका ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु, रत्न, मंत्र, यंत्र, तंत्र, कवच इत्यादि प्राचिन गूढ सहस्यो एवं आध्यात्मिक ज्ञान से आपको परिचित कराती हैं।
शनि जयन्ती, शनि जयन्ति
गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका जून  2011 में प्रकशित लेख
शनि जयंती विशेष

यंत्र, मंत्र, तंत्र द्वारा शनि शांति, शनि शान्ति, शनि बाधा मुक्ति, शनि रोगो से मुक्ती, शनि बाधा निवारण उपाय, टोटके, लाल किताब ज्योतिष शनि अशुभता निवारण, शनि दोष खत्म करने के उपाय, शनि बाधा को खत्म करने के उपाय, साढेसाति निवारण उपाय, टोटके, स्वास्थ्य, शनि और ज्योतिष, यन्त्र, मन्त्र, तन्त्र द्वारा बीमारी को समाप्त करने के उपचार के, Hindi Yantra, tantra, mantra Healing for shani , to end of saturn bad effect, tantra, mantra Healing, Remedy saturn benefits, Remedy Arogya benefits, Remedy saturn advantage, Specific saturn sadeshati freedom, shani dosh se Mukti saturn evil effect prevention measures, Totkae, Red Book Astrology saturn shani prevention, Indian Vedic shani Solution, indian Remadu fo saturn mahadasha, red astro Remedy for shani, treditnol indian saturn Ramedy, Remedy to saturn eliminate, યંત્ર, મંત્ર, તંત્ર દ્વારા શનિ શાંતિ, શનિ શાન્તિ, શનિ બાધા મુક્તિ, શનિ રોગો સે મુક્તી, શનિ બાધા નિવારણ ઉપાય, ટોટકે, લાલ કિતાબ જ્યોતિષ શનિ અશુભતા નિવારણ, શનિ દોષ ખત્મ કરને કે ઉપાય, શનિ બાધા કો ખત્મ કરને કે ઉપાય, સાઢેસાતિ નિવારણ ઉપાય, ટોટકે, સ્વાસ્થ્ય, શનિ ઔર જ્યોતિષ, યન્ત્ર, મન્ત્ર, તન્ત્ર દ્વારા બીમારી કો સમાપ્ત કરને કે ઉપચાર કે, ಯಂತ್ರ, ಮಂತ್ರ, ತಂತ್ರ ದ್ವಾರಾ ಶನಿ ಶಾಂತಿ, ಶನಿ ಶಾನ್ತಿ, ಶನಿ ಬಾಧಾ ಮುಕ್ತಿ, ಶನಿ ರೋಗೋ ಸೇ ಮುಕ್ತೀ, ಶನಿ ಬಾಧಾ ನಿವಾರಣ ಉಪಾಯ, ಟೋಟಕೇ, ಲಾಲ ಕಿತಾಬ ಜ್ಯೋತಿಷ ಶನಿ ಅಶುಭತಾ ನಿವಾರಣ, ಶನಿ ದೋಷ ಖತ್ಮ ಕರನೇ ಕೇ ಉಪಾಯ, ಶನಿ ಬಾಧಾ ಕೋ ಖತ್ಮ ಕರನೇ ಕೇ ಉಪಾಯ, ಸಾಢೇಸಾತಿ ನಿವಾರಣ ಉಪಾಯ, ಟೋಟಕೇ, ಸ್ವಾಸ್ಥ್ಯ, ಶನಿ ಔರ ಜ್ಯೋತಿಷ, ಯನ್ತ್ರ, ಮನ್ತ್ರ, ತನ್ತ್ರ ದ್ವಾರಾ ಬೀಮಾರೀ ಕೋ ಸಮಾಪ್ತ ಕರನೇ ಕೇ ಉಪಚಾರ ಕೇ, யம்த்ர, மம்த்ர, தம்த்ர த்வாரா ஶநி ஶாம்தி, ஶநி ஶாந்தி, ஶநி பாதா முக்தி, ஶநி ரோகோ ஸே முக்தீ, ஶநி பாதா நிவாரண உபாய, டோடகே, லால கிதாப ஜ்யோதிஷ ஶநி அஶுபதா நிவாரண, ஶநி தோஷ கத்ம கரநே கே உபாய, ஶநி பாதா கோ கத்ம கரநே கே உபாய, ஸாடேஸாதி நிவாரண உபாய, டோடகே, ஸ்வாஸ்த்ய, ஶநி ஔர ஜ்யோதிஷ, யந்த்ர, மந்த்ர, தந்த்ர த்வாரா பீமாரீ கோ ஸமாப்த கரநே கே உபசார கே, యంత్ర, మంత్ర, తంత్ర ద్వారా శని శాంతి, శని శాన్తి, శని బాధా ముక్తి, శని రోగో సే ముక్తీ, శని బాధా నివారణ ఉపాయ, టోటకే, లాల కితాబ జ్యోతిష శని అశుభతా నివారణ, శని దోష ఖత్మ కరనే కే ఉపాయ, శని బాధా కో ఖత్మ కరనే కే ఉపాయ, సాఢేసాతి నివారణ ఉపాయ, టోటకే, స్వాస్థ్య, శని ఔర జ్యోతిష, యన్త్ర, మన్త్ర, తన్త్ర ద్వారా బీమారీ కో సమాప్త కరనే కే ఉపచార కే, യംത്ര, മംത്ര, തംത്ര ദ്വാരാ ശനി ശാംതി, ശനി ശാന്തി, ശനി ബാധാ മുക്തി, ശനി രോഗോ സേ മുക്തീ, ശനി ബാധാ നിവാരണ ഉപായ, ടോടകേ, ലാല കിതാബ ജ്യോതിഷ ശനി അശുഭതാ നിവാരണ, ശനി ദോഷ ഖത്മ കരനേ കേ ഉപായ, ശനി ബാധാ കോ ഖത്മ കരനേ കേ ഉപായ, സാഢേസാതി നിവാരണ ഉപായ, ടോടകേ, സ്വാസ്ഥ്യ, ശനി ഔര ജ്യോതിഷ, യന്ത്ര, മന്ത്ര, തന്ത്ര ദ്വാരാ ബീമാരീ കോ സമാപ്ത കരനേ കേ ഉപചാര കേ,ਯਂਤ੍ਰ, ਮਂਤ੍ਰ, ਤਂਤ੍ਰ ਦ੍ਵਾਰਾ ਸ਼ਨਿ ਸ਼ਾਂਤਿ, ਸ਼ਨਿ ਸ਼ਾਨ੍ਤਿ, ਸ਼ਨਿ ਬਾਧਾ ਮੁਕ੍ਤਿ, ਸ਼ਨਿ ਰੋਗੋ ਸੇ ਮੁਕ੍ਤੀ, ਸ਼ਨਿ ਬਾਧਾ ਨਿਵਾਰਣ ਉਪਾਯ, ਟੋਟਕੇ, ਲਾਲ ਕਿਤਾਬ ਜ੍ਯੋਤਿਸ਼ ਸ਼ਨਿ ਅਸ਼ੁਭਤਾ ਨਿਵਾਰਣ, ਸ਼ਨਿ ਦੋਸ਼ ਖਤ੍ਮ ਕਰਨੇ ਕੇ ਉਪਾਯ, ਸ਼ਨਿ ਬਾਧਾ ਕੋ ਖਤ੍ਮ ਕਰਨੇ ਕੇ ਉਪਾਯ, ਸਾਢੇਸਾਤਿ ਨਿਵਾਰਣ ਉਪਾਯ, ਟੋਟਕੇ, ਸ੍ਵਾਸ੍ਥ੍ਯ, ਸ਼ਨਿ ਔਰ ਜ੍ਯੋਤਿਸ਼, ਯਨ੍ਤ੍ਰ, ਮਨ੍ਤ੍ਰ, ਤਨ੍ਤ੍ਰ ਦ੍ਵਾਰਾ ਬੀਮਾਰੀ ਕੋ ਸਮਾਪ੍ਤ ਕਰਨੇ ਕੇ ਉਪਚਾਰ ਕੇ, যংত্র, মংত্র, তংত্র দ্ৱারা শনি শাংতি, শনি শান্তি, শনি বাধা মুক্তি, শনি রোগো সে মুক্তী, শনি বাধা নিৱারণ উপায, টোটকে, লাল কিতাব জ্যোতিষ শনি অশুভতা নিৱারণ, শনি দোষ খত্ম করনে কে উপায, শনি বাধা কো খত্ম করনে কে উপায, সাঢেসাতি নিৱারণ উপায, টোটকে, স্ৱাস্থ্য, শনি ঔর জ্যোতিষ, যন্ত্র, মন্ত্র, তন্ত্র দ্ৱারা বীমারী কো সমাপ্ত করনে কে উপচার কে, ଯନ୍ତ୍ର, ମନ୍ତ୍ର, ତନ୍ତ୍ର ମାଧ୍ଯମ ରେ ଶନି ଶାଂତି, ଶନି ଶାନ୍ତି, ଶନି ବାଧା ମୁକ୍ତି, ଶନି ରୋଗୋ ସେ ମୁକ୍ତୀ, ଶନି ବାଧା ନିବାରଣ ଉପାଯ, ଟୋଟକେ, ଲାଲ କିତାବ ଜ୍ଯୋତିଷ ଶନି ଅଶୁଭତା ନିବାରଣ, ଶନି ଦୋଷ ଖତ୍ମ କରନେ କେ ଉପାଯ, ଶନି ବାଧା କୋ ଖତ୍ମ କରନେ କେ ଉପାଯ, ସାଢେସାତି ନିବାରଣ ଉପାଯ, ଟୋଟକେ, ସ୍ବାସ୍ଥ୍ଯ, ଶନି ଔର ଜ୍ଯୋତିଷ, ଯନ୍ତ୍ର, ମନ୍ତ୍ର, ତନ୍ତ୍ର ଦ୍ବାରା ବୀମାରୀ କୋ ସମାପ୍ତ କରନେ କେ ଉପଚାର କେ, yaMtr, maMtr, taMtr dvArA Sani SAMti, Sani SAnti, Sani bAdhA mukti, Sani rogo se muktI, Sani bAdhA nivAraN upAy, ToTake, lAl kitAb jyotiSh Sani aSuBatA nivAraN, Sani doSh Katm karane ke upAy, Sani bAdhA ko Katm karane ke upAy, sADhesAti nivAraN upAy, ToTake, svAsthy, Sani aur jyotiSh, yantr, mantr, tantr dvArA bImArI ko samApt karane ke upacAr ke,



विशेष लेख
शनिदेव का परिचय5शनिदेव की कृपा प्राप्ति के सरल उपाय28
शनिवार व्रत11शनि के विभिन्न मंत्र30
शनि प्रदोष व्रत का महत्व17महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र31
शनि-साढ़ेसाती के शांति उपाय18शनैश्चरस्तवराज(भविष्यपुराण)35
श्री शनि चालीसा20शनैश्चरस्तोत्रम् (श्रीब्रह्माण्डपुराण)36
सामुद्रिक शास्त्र में शनि रेखा का महत्व22शनिवज्रपंजरकवचम्36
शनि के विभिन्न पाय का24दशरथकृत-शनि-स्तोत्र37
शनिग्रह से संबंधित रोग27शनि अष्टोत्तरशतनामावलि41

अनुक्रम

संपादकीय4दिन-रात के चौघडिये59
राम रक्षा यंत्र42दिन-रात कि होरा सूर्योदय से सूर्यास्त तक60
विद्या प्राप्ति हेतु सरस्वती कवच -यंत्र43ग्रह चलन जून -2011 61
मंत्र सिद्ध पन्ना गणेश43सर्व रोगनाशक यंत्र/कवच 62
मंत्र सिद्ध सामग्री44मंत्र सिद्ध कवच 64
मासिक राशि फल47YANTRA LIST 65
राशि रत्न51GEM STONE 67
जून 2011 मासिक पंचांग52BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION68
जून -2011 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार54सूचना69
मंत्र सिद्ध सामग्री57हमारा उद्देश्य71
जून 2011 -विशेष योग58

दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका58































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सोमवार, मई 16, 2011

ज्योतिष द्वारा रोग निदान

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ज्योतिष द्वारा रोग निदान

मत्स्य पुराण के अनुशार देवताओं और राक्षसों ने जब समुद्र मंथन किया था धन तेरस के दिन धनवंतरी नामक देवता अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। धनवंतरी धन, स्वास्थय व आयु के अधिपति देवता हैं। धनवंतरी को देवों के वैध व चिकित्सक के रुप में जाना जाता हैं।
धनवंतरी ही सृष्टी के सर्व प्रथम चिकित्सक माने जाते हैं। श्री धनवंतरी ने ही आयुर्वेद को प्रतिष्ठित किया था। उनके बाद में ऋषि चरक जैसे अनेक आयुर्वेदाचार्य हो, गये। जिन्हों ने मनुष्य मात्र के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए कार्य किये। इसी कारण प्राचीन काल में अधितर व्यक्ति का स्वस्थ उत्तम रहता था।
क्योकि प्राचिन कालमें प्रायः सभी चिकित्सक आयुर्वेद के साथ-साथ ज्योतिष का भी विशेष ज्ञान रखते थे। इसी लिए चिकित्सक बीमारी का परीक्षण ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति के अनुसार सरलता से कर लेते थे। आज के आधुनिक युग के चिकित्सक को भी ज्योतिष विद्या का ज्ञान रखना चाहिए जिससे वे सरलता से प्रायः सभी रोगो का निदान करके रोगी की उपयुक्त चिकित्सा करने में पूर्णतः सक्षम हों सके।
ज्योतिष के अनुशार हर ग्रह और राशि मानव शरीर पर अपना विशेष प्रभाव रखते हैं, इस लिए उसे जानना भी अति आवश्यक हैं। सामान्यतः जन्म कुंडली में जो राशि अथवा जो ग्रह छठे, आठवें, या बारहवें स्थान से पीड़ित हो अथवा छठे, आठवें, या बारहवें स्थानों के स्वामी हो कर पीड़ित होरहे हो, तो उनसे संबंधित बीमारी की संभावना अधिक रहती हैं। जन्म कुंडली के अनुसार प्रत्येक स्थान और राशि से मानव शरीर के कौन-कौन से अंग प्रभावित होते हैं, उनसे संबंधित जानकारी दी जा रही हैं।

जन्मकुंडली से रोग निदान
ज्योतिष शास्त्र एवं आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य द्वारा पूर्वकाल में किये गयें कर्मो का फल ही व्यक्ति के शरीर में विभिन्न रोगों के रूप में प्रगट होतें हैं।
हरित सहिंता के अनुशार:
जन्मान्तर कृतम् पापम् व्याधिरुपेण बाधते।
तच्छान्तिरौषधैर्दानर्जपहोमसुरार्चनैः॥
अर्थातः पूर्व जन्म में किया गये पाप कर्म ही व्याधि के रूप में हमारे शरीर में उत्पन्न हो कर कष्टकारी हो जाता हैं। तथा औषध, दान, जप, होम व देवपूजा से रोग की शांति होती हैं।
आयुर्वेद के जानकारो की माने तो कर्मदोष को ही रोग की उत्पत्ति का कारण माना गया हैं।

आयुर्वेद में कर्म के मुख्य तीन भेद माने गए हैं:
• एक हैं सन्चित कर्म
• दूसरा हैं प्रारब्ध कर्म
• तीसरा हैं क्रियमाण
आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य के संचित कर्म ही कर्म जनित रोगों के प्रमुख कारण होते हैं
जिसे व्यक्ति प्रारब्ध के रूप में भोगता हैं।
वर्तमान समय में मनुष्य के द्वारा किये जाने वाला कर्म ही क्रियमाण होता हैं।
वर्तमान काल में अनुचित आहार-विहार के कारण भी शरीर में रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
आयुर्वेद आचार्य सुश्रुत, चरक व त्रिष्ठाचार्य के मतानुसार ……………..>>

जन्म कुंडली से रोग व रोगके समय का ज्ञान
भारतीय ज्योतिषाचार्य हजारो वर्ष पूर्व ही जन्म कुंडली के माध्यम से यह ज्ञात करने में पूर्णताः सक्षम थे कि किसी व्यक्ति को कब तथा क्या बीमारी हो सकती हैं।
ज्योतिषशास्त्रो से प्राप्त ज्ञान एवं अभीतक हुएं ……………..>>

ग्रहों से सम्बंधित शरीर के अंग और रोग
यदि नवग्रह में से कोई ग्रह शत्रु राशि-नीच राशिः नवांश में, षड्बलहींन, पापयुक्त, पाप ग्रह से दृष्ट, त्रिकभाव में स्थित हों, तो संबंधित ग्रह अपने कारकत्व से सम्बंधित रोग उत्पन्न करते हैं। नव ग्रहों से सम्बंधित अंग, धातु और रोग इस प्रकार हैं।

रोग के प्रभाव का समय
पीड़ा कारक ग्रह अपनी ऋतू में, अपने वार में, मासेश होने पर अपने मास में, वर्षेश होने पर अपने वर्ष में, अपनी महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यंतर दशा एवं सूक्षम दशा में रोग कारक होते हैं। गोचर में पीड़ित ……………..>>

रोग शान्ति के उपाय
ग्रहों की विंशोत्तरी दशा तथा गोचर स्थिति से वर्तमान या भविष्य में होने वाले रोग को समय से पूर्व अनुमान लगा कर पीडाकारक ग्रहों से संबंधित दान, जप, हवन, यंत्र, कवच, व रत्न ……………..>>

संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका मई-2011 का अंक पढें।

इस लेख को प्रतिलिपि संरक्षण (Copy Protection) के कारणो से यहां संक्षिप्त में प्रकाशित किया गया हैं।



>> http://gk.yolasite.com/resources/GURUTVA%20JYOTISH%20MAY-2011.pdf  

अंक ज्योतिष और स्वास्थ

अंक ज्योतिष-स्वास्थ, अंक रोग, अंक बिमारी, बीमारी, अन्क ज्योतिष, अंक शास्त्र हेल्थ, અંક જ્યોતિષ-સ્વાસ્થ, અંક રોગ, અંક બિમારી, બીમારી, અન્ક જ્યોતિષ, અંક શાસ્ત્ર હેલ્થ, ಅಂಕ ಜ್ಯೋತಿಷ-ಸ್ವಾಸ್ಥ, ಅಂಕ ರೋಗ, ಅಂಕ ಬಿಮಾರೀ, ಬೀಮಾರೀ, ಅನ್ಕ ಜ್ಯೋತಿಷ, ಅಂಕ ಶಾಸ್ತ್ರ ಹೇಲ್ಥ, அம்க ஜ்யோதிஷ-ஸ்வாஸ்த, அம்க ரோக, அம்க பிமாரீ, பீமாரீ, அந்க ஜ்யோதிஷ, அம்க ஶாஸ்த்ர ஹேல்த, అంక జ్యోతిష-స్వాస్థ, అంక రోగ, అంక బిమారీ, బీమారీ, అన్క జ్యోతిష, అంక శాస్త్ర హేల్థ, അംക ജ്യോതിഷ-സ്വാസ്ഥ, അംക രോഗ, അംക ബിമാരീ, ബീമാരീ, അന്ക ജ്യോതിഷ, അംക ശാസ്ത്ര ഹേല്ഥ, ਅਂਕ ਜ੍ਯੋਤਿਸ਼-ਸ੍ਵਾਸ੍ਥ, ਅਂਕ ਰੋਗ, ਅਂਕ ਬਿਮਾਰੀ, ਬੀਮਾਰੀ, ਅਨ੍ਕ ਜ੍ਯੋਤਿਸ਼, ਅਂਕ ਸ਼ਾਸ੍ਤ੍ਰ ਹੇਲ੍ਥ, অংক জ্যোতিষ-স্ৱাস্থ, অংক রোগ, অংক বিমারী, বীমারী, অন্ক জ্যোতিষ, অংক শাস্ত্র হেল্থ, ଅଂକ ଜ୍ଯୋତିଷ-ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟ, ଅଂକ ରୋଗ, ଅଙ୍କ ବିମାରୀ, ବୀମାରୀ, ଅନ୍କ ଜ୍ଯୋତିଷ, ଅଂକ ଶାସ୍ତ୍ର ହେଲ୍ଥ, anka jyotisha-svastha, anka roga, anka bimarI, bImarI, anka jyotisha, anka sastra heltha, Numerology - health, disease Numerology, Numerology illness, disease, Ank Jyotish, Numerology Health Science,

अंक ज्योतिष और स्वास्थ

मूलांक : अर्थात जन्म तिथी या जन्म तारिख
भाग्यांक: अर्थात जन्म तारिख + माह + वर्ष का जोड = भाग्यांक

मूलांक-1:जन्म दिनांक 1,10,19,28
स्वास्थ्यः जब मूलांक 1 वाले व्यक्ति के जीवन में रोग की स्थिती आती हैं, तो उनको तीव्र ज्वर, हृदय रोग, आँख, चर्म रोग, मस्तिष्क संबंधि परेशानि, अपच, गठिआ, स्नायुविकार, चोट, कोढ़, आंतों के रोग तथा घुटने आदि की शिकायते रहती हैं। जिन व्यक्तियों का मूलांक 1 होता हैं वे किसी ना किसी रूप में हृदय से ……………..>>
आहारः किशमिश, सौंफ, केसर, कालीमिर्च, लौंग, आजवाईन, जायफल, खजूर, ……………..>>
सावधानी: आपको जनवरी, अक्तूबर और दिसंबर के महीनों में अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए।

मूलांक-2: जन्म दिनांक 2,11,20,29
स्वास्थ्यः मूलांक 2 वाले व्यक्ति के जीवन में रोग की स्थिती आती हैं, तो उनको कमजोरी, उदर, उद्वेग, मानसिक पीड़ा, दुर्घटना, पाचन तंत्र ……………..>>
आहारः केला, ककड़ी, कलींदा, कुम्हड़ा, पत्ता गोभी, ……………..>>
सावधानी: आपको जनवरी, फरवरी और जुलाई के महीनों में स्वास्थ्य व खान-पान आदि में सावधानी बरतना चाहिए।

मूलांक-3: जन्म दिनांक 3,12,21,30
स्वास्थ्यः व्यक्ति को प्रायः हड्डियों में दर्द रहता हैं और थकावट सी रहती हैं। अत्यधिक परिश्रमि होते हैं अतः अति परिश्रम कारण वे थके से रहते हैं। स्नायु तंत्र कमजोर ……………..>>
आहारः चेरी, स्ट्रोबेरी, सेब, नाशपती, अनार, अनानस, अंगूर, ……………..>>
सावधानी: आपको फरवरी, जून, सिंतबर और दिसंबर में अपनी सेहत का विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए।

मूलांक-4:जन्म दिनांक 4,13,22,31
स्वास्थ्यः व्यक्ति प्रायः रक्त की कमी से पीड़ित रहते हैं। रक्त की कमी से अनेक रोग हो सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को लोहतत्व युक्त भोजन करना चाहियें। चलने-फिरने तथा श्वास ……………..>>
आहारः हरी शब्जीयां, करेला, नीम, मीठे फल, लौकी, ककड़ी, खीरा, ……………..>>
सावधानी: आपको जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त व सितंबर इन पांच महीनों में अपने स्वास्थ्य पर विशेष गौर करना चाहिए।

मूलांक-5:जन्म दिनांक 5,14,23
स्वास्थ्यः व्यक्ति प्रायः सर्दी, जुकाम आदि से पीड़ित रहना पड़ता हैं। नर्वस ब्रेकडाउन का भी भय बना रहता हैं। कण्ठ रोग, जीभ संबंधि रोग, अनिद्रा, कंधे में दर्द, हड्डियों संबंधि ……………..>>
आहारः सेब, केला, चीकू, अनार, अनानस, अंगूर, पुदिना, गाजर, ……………..>>
सावधानी: आपको जून, सिंतबर और दिसंबर के महीनों में अपने स्वास्थ्य के बारे में सावधानी बरतना चाहिए।

मूलांक-6:जन्म दिनांक 6,15,24
स्वास्थ्यः व्यक्ति फेफड़ो के रोग से ग्रसित रहते हैं। नाक, कान, गला, आँख, जीभ, दांत, अंगुली, नाखून, हड्डि, वीर्य संबंधि बीमारियां हुआ करती हैं। फेफडे, मूर्च्छा आना, ……………..>>
आहारः तरबूज, खरबूज, आम, सेब, नासपती, अनार, पालक, गाजर, ……………..>>
सावधानी: आपको मई, अक्तूबर एवं नवंबर के महीने अंक ६ के इन महीनों में उन्हें सावधानी रखनी चाहिए।

मूलांक-7: जन्म दिनांक 7,16,25
स्वास्थ्यः व्यक्ति को चर्मरोग घेरे रहते हैं। खुजली या दाद होनेकी संभावना बनी रही हैं। चर्म संबंधि शिकायत होती ही रहती हैं। आँख, उदर तथा फेफड़ों से संबंधि बीमारियां, ……………..>>
आहारः सेब ,अंगूर, संतरा, ककड़ी, प्याज, मूली, गाजर, ……………..>>

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सावधानी: आपको जनवरी-फरवरी और जुलाई-अगस्त के चार महीनों में अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सावधानी रखनी चाहिए।

मूलांक-8: जन्म दिनांक 8,17,26
स्वास्थ्यः व्यक्ति को जिगर से संबंधि रोग लगे रहते हैं। व्यक्ति के लीवर कमजोर होन की वजह से अन्य अनेक बीमारियां आकर घेर लेती हैं। व्यसनों से हरदम दूर रहना चाहिये। दुर्बलता, ……………..>>
आहारः संतरा, पपीता, अनानस, नींबू, हरी सब्जियां, ककड़ी, खीरा, धनियां, ……………..>>
सावधानी: आपको जनवरी, फरवरी, जुलाई और दिसंबर के महीनों में पूर्ण रूप से सावधान रहने का संकेत दिया है

मूलांक-9:जन्म दिनांक 9,18,27
स्वास्थ्यः व्यक्ति चर्मरोग तथा नासारंध्र से संबंधित जुकाम आदि रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। मस्तिष्क संबंधित रोग, जननेन्द्रिय संबंधित रोग, ज्वर, खसरा, मूत्र रोग, ……………..>>
आहारः संतरा, अमरूद, अंगूर, केला, ककड़ी, तोरई, मीठे फल, खीरा, ……………..>>
सावधानी: आपको पूरे वर्ष अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए।


संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका मई-2011 का अंक पढें।

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सोमवार, मई 09, 2011

प्रश्न कुण्डली से जाने स्वास्थ्य लाभ के योग

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प्रश्न कुण्डली से जाने स्वास्थ्य लाभ के योग

 
सभी व्यक्ति स्वयं के और अपने स्वजनो के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता है। लेकिन हमारा शरीर में विभिन्न कारणो से स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां समय के साथ-साथ आती-जाती रहती हैं।
लेकिन यदि बिमारी होने पर स्वास्थ्य में जल्दी सुधार नहीं होता तो, तरह-तरह की चिंता और मानसिक तनाव होना साधारण बात हैं। कि स्वास्थ्य में सुधार कब आयेगा?, कब उत्तम स्वास्थ्य लाभ होगा?, स्वास्थ्य लाभ होगा या नहीं?, इत्यादि प्रश्न उठ खडे हो जाते हैं।

मनुष्य की इसी चिंताको दूर करने के लिए हजारो वर्ष पूर्व भारतीय ज्योतिषाचार्यो नें प्रश्न कुंडली के माध्यम से ज्ञात करने की विद्या हमें प्रदान की हैं। जिस के फल स्वरुप किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य से संबंधित प्रश्नो का ज्योतिषी गणनाओं के माध्यम से सरलता से समाधन किया जासकता हैं!

प्रश्न कुंडली के माध्यम से स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त करने हेतु सर्व प्रथम प्रश्न कुंडली में रोगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के योग हैं या नहीं यह देख लेना अति आवश्यक हैं।
आपके मार्गदर्शन हेतु यहां विशेष योग से आपको अवगत करवा रहे हैं।
 
लग्न में स्थित ग्रह या लग्नेश से रोग मुक्ति के योग।
• यदि लग्न में बलवान ग्रह स्थित हो तो रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ देते हैं।
प्रश्न कुंडली में यदि लग्नेश (लग्न का स्वामी ग्रह) और दशमेश (दशम भाव का स्वामी ग्रह) मित्र हो तो रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ ……………..>>
 
 
चन्द्रमा से रोग मुक्ति के योग
• यदि चन्द्र स्वराशि या उच्च राशि मे बलवान हो कर किसी शुभ ग्रह से युक्त हो या द्रष्ट हो तो रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होते देखा गया हैं।
यदि प्रश्न कुंडली में यदि चन्द्र चर राशि अर्थात द्विस्वभाव राशि में स्थित हो ……………..>>
 
प्रश्न कुंडली के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ में विलम्ब होने के योग देख लेना भी आवश्यक होता हैं।
 
स्वास्थ्य लाभ में विलंब होने के योग
• सधारणतः जातक में षष्टम भाव व षष्टेश से रोग को देखा जाता हैं।
प्रश्न कुंडली में यदि लग्नेश और दशमेश के बीच ……………..>>
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यदि प्रश्न कुंडली में स्वास्थ्य लाभ में विलंब होने के योग बन रहे हो तो चिंतित होने के बजाय शास्त्रोक्त उपाय इत्यादि करना लाभदायक सिद्ध होता हैं। एसी स्थिती में विद्वानो के मत से महामृत्युंजय मंत्र-यंत्र का प्रयोग शीघ्र रोग मुक्ति हेतु रामबाण होता हैं।
 
प्रश्न कुंडली का अध्ययन करते समय यह योग भी देखले की रोगी को उचित उपयार प्राप्त हो रहा हैं या नहीं।
रोग का उचित उपचार होने के योग हैं या नहीं!
प्रश्न कुण्डली में प्रथम, पंचम, सप्तम एवं अष्टम भाव में पाप ग्रह हों और चन्द्रमा कमज़ोर या पाप ग्रह से पीड़ित हों तो रोग का उपचार कठिन हो ……………..>>
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प्रश्न कुंडली देखते समय शरीर के विभिन्न अंगो पर ग्रहो के प्रभाव एवं बिमारीयों को जानना भी आवश्यक होता हैं।
 
ज्योतिषी सिद्धांतो के अनुशार कुंडली के बारह भाव शरीर के विभिन्न अंगो को दर्शाते है।
  • प्रथम भाव : सिर, मस्तिष्क, स्नायु तंत्र.
  • द्वितीय भाव: चेहरा, गला, कंठ, गर्दन, आंख.
  • तीसरा भाव : कधे, छाती, फेफडे, श्वास, नसे और बाहें.
  • चतुर्थ भाव : स्तन, ऊपरी आन्त्र, ऊपरी पाचन तंत्र……………..>>
 
 
प्रश्न कुण्डली में रोग से संबंधित भाव
प्रश्न ज्योतिष के अनुसार प्रश्न कुंडली में लग्न स्थान चिकित्सक भाव होता हैं। अतः शुभ ग्रह प्रश्न कुंडली के लग्न में शुभ ग्रह की स्थिती से ज्ञात होता हैं की रोगी को किसी कुशल चिकित्सक की सलाह प्राप्त हो रही हैं या होगी।
यदि अशुभ ग्रह स्थित हो तो समझले की रोगी को ……………..>>
 
नोट: प्रश्न कुंडली का विश्लेषण सावधानी से करना उचित रहता हैं। विद्वानो के अनुशार प्रश्न कुंडली का विश्लेषण करते समय संबंधित भाव एवं भाव के स्वामी ग्रह अर्थातः भावेश एवं भाव के कारक ग्रह को ध्यान में रखते हुए आंकलन कर किया गया विश्लेषण स्पष्ट होता हैं। प्रश्न कुंडली का फलादेश करते समय हर छोटी छोटी बातों का ख्याल रखना आवश्यक होता हैं अन्यथा विश्लेषण किये गये प्रश्न का उत्तर स्टिक नहीं होता।
 
संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका मई-2011 का अंक पढें।
 
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MAY-2011

 
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शुक्रवार, मई 06, 2011

अक्षय तृतीया स्वयं सिद्धि अबूझ मुहूर्त्त

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अक्षय तृतिया स्वयं सिद्धि अबूझ मुहूर्त्त


वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता हैं। अक्षय तृतीया स्वयंसिद्ध व अबूझ मुहूर्त हैं। एसी मान्यता हैं, कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान, हवन, पूजन अक्षय (संपूर्ण) अर्थात जिसका क्षय (नाश) नहीं होता हैं।

हिंदू धर्मग्रंथो में अक्षय तृतीया तिथि से जुड़े कई रोचक तथ्यों का वर्णन मिलता है। यहां आपके मार्गदर्शन हेतु कुछ प्रमुख तथ्य प्रस्तुत हैं।

भारतीय पंचाग के अनुसार वर्ष में 19 अबूझ मुहूर्त व 4 स्वयं सिद्धि मुहूर्त्त होते हैं। अक्षय तृतीया (आखा तीज) भी अबूझ मुहूर्त व सिद्धि मुहूर्त्त में से एक हैं।


धर्म ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया से ही त्रेतायुग की शुरुआत मानी जाती हैं।

अक्षय तृतीया के दिन ही चार धामो में से एक श्री भगवान बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन वर्ष में एक बार ही वृंदावन में श्री बांकेबिहारीजी के मंदिर में श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं।

शास्त्रो में उल्लेख हैं की अक्षय तृतीया के दिन भगवान नर-नारायण अवतरित हुवे थे।

अक्षय तृतीया के दिन भगवान श्री विष्णु ने श्रीपरशुरामजी और हयग्रीव के रुप में अवतरित हुवे थे।

स्वयंसिद्ध व अबूझ मुहूर्त होने के कारण अक्षय तृतीया के दिन संपूर्ण भारत वर्ष में सबसे अधिक विवाह होते हैं।

अक्षय तृतिया के दिन गंगा स्नान का बडा महत्व माना जाता हैं।

इस लिए अबूझ महुर्त में कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ किया जा सकता हैं। शास्त्रोक्त विधान के अनुशार कार्य प्रारम्भ करने के लिये मुहूर्त के अन्य किसी नियम को देखना आवश्यक नहीं हैं। अबूझ महुर्त में किसी भी समय में कार्य प्रारम्भ किया जा सकता हैं।

अक्षय तृतिया के दिन नई भूमि-भव-वाहन खरीदना, सोना-चांदि खरीदना जैसे स्थिर लक्ष्मी से संबंधित वस्तुएं खरीदना सर्वोतम माना गया हैं।

नये व्यवसायीक कार्य का शुभारम्भ करने के लिये इस दिन को प्रयोग किया जा सकता हैं।

इस दिन शुभ एवं पवित्र कार्य करने से जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।