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शनिवार, फ़रवरी 05, 2011

वंसत पंचमी (८ फरवरी २०११)

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वंसत पंचमी


८ फरवरी २०११ को हिन्दू पंचांग विक्रमी संवत् 2067 माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को वंसत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजा के दिन मां सरस्वती की पूजा आरधना कर उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु वर्ष के सर्व श्रेष्ठ दिनो में से एक हैं। विद्वानो के मत से वंसत पंचमी का दिन विभिन्न शुभ कार्यो के शुभ आरंभ हेतु अत्यंत शुभ माना जाता हैं।

वंसत पंचमी को सरस्वती जयंती, ऋषि पंचमी, श्री पंचमी इत्यादी नामो से भी मनाया जाता हैं।
वंसत पंचमी अर्थांत वंसत ऋतु के आगमन का प्रथम दिन। विद्वानो के मत से वंसत ऋतु का मौसम मनुष्य के जीवन में सकारात्मक भाव, ऊर्जा, आशा एवं विश्वास को जगाता हैं। हिन्दू संस्कृति में वंसत ऋतु का स्वागत विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ किया जाता हैं। इनके पूजन से विद्या एवं ज्ञान की प्राप्ति होती हैं।

वंसत पंचमी के दिन से भारत के कइ हिस्सो मे बच्चे को प्रथम अक्षर ज्ञान की शुरुवात की जाती है। एसी मान्यता है की वसंत पंचमी के दिन विद्यांभ करने से बच्चे की की वाणी में मां सरस्वती स्वयं वास करती और बच्चे पर जीवन भर कृपा वर्षाती हैं। एवं बच्चों में विद्या एवं ज्ञान का विकास होता हैं जिस्से बच्चें मे श्रेष्ठता, सदाचार, तेजस्विता जेसे सद्द गुणों का आगमन होना प्रारंभ होता हैं, और बच्चा उत्तम स्मरण शक्ति युक्त विद्वान होता हैं।

वंसत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के अलवा भगवान विष्णु, श्री कृष्ण, कामदेव व रति की पूजा भी की जाती हैं। मान्यता हैं कि भगवान श्रीकृष्ण वसंत पंचमी के दिन प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होते हैं। इसी कारण से ब्रज में वसंत पंचमी के दिन से ही होली का उत्सव शुरू हो जाता है। वसंत पंचमी के दिन दांपत्य सुख की कामना से कामदेव और उनकी पत्नी रति की पूजा की जाती है। कामदेव की पूजा कर इसी पुरुषार्थ की प्राप्ति की होती है।

वंसत पंचमी के दिन नये व्यवसाय का शुभ आरंभ या व्यवसाय हेतु नयी शाखा का शुभ आरंभ करना अत्यंत शुभ माना जाता हैं। वसंत पंचमी के दिन पूजा आरधना से मां की कृपा से अध्यात्म ज्ञाना में वृद्धि होती हैं।

सरस्वती पूजन :-
शास्त्र के अनुशार वंसत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था । वंसत पंचमी के दिन ब्रह्माजी के मानस से देवी सरस्वती प्रकट हुई थी।
सरस्वती जी को बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता हैं। पौराणिक काल में भी विद्या प्राप्ति के लिए माता-पिता अपने बच्चे को ऋषि-मुनियों के आश्रम एवं गुरुकुल में भेजते थे।

वसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान इत्यादी के पश्चयात स्वच्छ कपडे पहन कर सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।

वसंत पंचमी के दिन वैदिक मंत्र, सरस्वची कवच, स्तुति आदि से देवी की प्रार्थना करना लाभदायक होता हैं।
वसंत पंचमी के दिन सरस्वती की कृपा प्राप्त हो इस लिये बच्चो की किताबे एवं लेखनी (कलम) की पूजा की जाती है।
वसंत पंचमी के दिन बालकों को अक्षर ज्ञान एवं विद्यारंभ भी कराने कि परंपरा हैं।

• नित्य कर्म से निवृत होकर श्वेत वस्त्र धारण करके उत्तर-पूर्व दिशा में या अपने पूजा स्थान में सरस्वती का चित्र-मूर्ति अपने सम्मुख स्थापन करे।
• सर्व प्रथम पूजा का प्रारंभ श्री गणेशजी की पूजा से करे तत पश्यात ही मां सरस्वती की पूजा करें।
• मां सरस्वती को श्वेत रंग अत्यंत प्रिय है। इस लिये पूजा में ज्यादा से ज्यादा श्वेत रंग की वस्तुओं का प्रयोग करें।
• पूजा मे सफेद वस्त्र, स्फटिक माला, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य मे श्वेत मिष्ठान आदी का प्रयोग करे जिस्से मां की कृपा शीघ्र प्राप्त हो
• मां सरस्वती के वैदिक अथवा बीज मंत्रो का यथासंभव जाप करे। और सरस्वती स्तोत्र, सरस्वती अष्टोत्तरनामावली, स्तोत्र एवं आरती कर के पूजा संपन्न करे।

वसंत पंचमी की कथा:
एक दिन ब्रह्माजी समस्त लोक का अवलोकन करते हुवे भूलोक आये। ब्रह्माजी ने भूलोक पर समस्त प्राणी-जंतुओं को मौन, उदास और क्रिया हिन अवस्था में देखा। जीवलोक की यह दशा देखकर ब्रह्माजी अधिक चिंतित होगएं और सोचने लगे इन जीवो के कल्याण के लिये क्या उपाय किया जाएं? जिस्से सभी प्राणी एवं जीव आनंद और प्रसन्न होकर झुमने लगे। मन में इस विषय में चिंतन मनन करते हुए उन्होंने कमल पुष्पों पर जल छिड़का तो, उस पुष्प में से देवी सरस्वती प्रकट हुई। देवी सफेद वस्त्र धारण किए, गले में कमलों की माला धारन किये, हाथों में वीणा एवं पुस्तक धारण किए हुए थी।

भगवान ब्रह्मा ने देवी से कहा, आप समस्त प्राणियों के कंठ में निवास कर उन्हें वाणी प्रदान करो। आज से सभी को जीव को चैतन्य एवं प्रसन्न करना आपका काम होगा और विश्व में आप भगवती सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध होगी। आपके द्वारा इस लोक का कल्याण किये जाने के कारण विद्वत समाज आपका आदर एवं पूजा करेगा।

वंसत पंचमी के दिन ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी सरस्वती की आराधना से विद्या आती है, विद्या से विनम्रता, विनम्रता से पात्रता, पात्रता से धन और धन से सुख प्राप्त होता है।

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