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सोमवार, फ़रवरी 07, 2011

विद्या प्राप्ति के विलक्षन प्रयोग

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विद्या प्राप्ति के विलक्षन प्रयोग


कई बच्चों को घंटो-घंटो पढाई करने के उपरांत भी स्मरण नहीं रहता। परिक्षा में उत्तर देते समय उसने पढा हुआ भूल जाते हैं। एसी स्थिती में बच्चे के साथ माता पिता भी परेशान रहते हैं कि इतना पढने के उपरांत बच्चे को याद नहि रह पाता? इसका कारण काया हैं? और उपाय क्या हैं? यदि बच्चा पढाई नही करता तो अलग बात होजाती हैं, परंतु पढने के पश्चयार भी याद नहीं रहे तो इस मे बच्चा करे तो क्या करें? यह सबसे बडीं समस्या हो जाती हैं।
एसी स्थिती में विद्या प्राप्ति हेतु एवं स्मरण शक्ति बढाने हेतु जो बच्चे +10 से उपर के क्लास में पढते हैं उनके लिये हैं।

प्रयोग 1:
रात्री 8-9 बजे भोजन कर 30-45 मिनिट पश्चयात बायीं (Left) करवट लेकर ढाई घंटे के लिये ……………

प्रयोग 2:
रात्री 8-9 बजे भोजन कर 30-45 मिनिट पश्चयात सोजाए, रात्री को 2 बजे या 2.30 बजे उठकर ……………..

प्रयोग 3:
यदि बच्चो का मन अभ्यास में लगता न हो, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार जो ईमली के ……………………..>>

प्रयोग करने से लाभ:
• वर्तमान समय में बच्चे दिन से लेकर रात्री 2-3-4 बजे तक पढाई करते रहते हैं, और सुबह 5-6-7 बजें उठ कर फ़िर से पढाई करना शुरु करदेते हैं जिस्से पर्याप्त नींद न मिलने के कारण बच्चें को पढाई बोझ लगने लगती हैं। एवं जितना चाहे पढले बच्चा परिणाम अनूकुल नहीं मिलपाता।
• इसका कारण अती सरल हैं। दिन भर कि थकावट के कारण, अपने दैनिक कार्य से विपरित बेठकर पढाई करने के कारण एवं पर्याप्त नींद नहीं मिलने के कारण पढाइ के समय मन नहीं लग पाता। घर में अन्य सदस्यो के आवागमन के कारण बच्चें पढाई में एकाग्रता नहीं होने के कारण भी एक ही विषय को बार-बार लगातार पढते रहना पडता हैं इस मे समय कि खपत अधिक होती हैं, जिस्से बच्चे तनाव सा महसूस करते हैं।
• कुछ बच्चे सुबह जल्द उठ कर पढाई करतें हैं एसी स्थिती में सुबह 5-6 बजे पढाई के लिये बेठने पर कुछ समय के लिये एकाग्रता रह पाती हैं पश्चयात घर वालो के जागने पर एकाग्रता कम होने लगती हैं।
• इस लिये रात्री 8-9 बजे सोकर 2- 2.30 बजे उठने पर पढाई करने हेतु अधिक समय मिलजाता हैं एवं वातावरण में शांति होने के कारण एकाग्रता लंबे समय तक बनी रहती हैं।


संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका फरवरी-2011 का अंक पढें।

इस लेख को प्रतिलिपि संरक्षण (Copy Protection) के कारणो से यहां संक्षिप्त में प्रकाशित किया गया हैं।


>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (फरवरी-2011)
FEB-2011

>> http://gk.yolasite.com/resources/GURUTVA%20JYOTISH%20FEB-201.pdf  
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