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शुक्रवार, दिसंबर 03, 2010

कुंडली में कहीं व्यभिचारी जीवनसाथी मिलने के योग तो नहीं?

your horoscope indicate your spouse is having an Extramarital Affairs Yoga?, Your Kundli Indicate Your life partner cheating you and  sexual Relation with others?, janm kundali se jane vyabhivahri jeevan sathi milane ke yoga.  

कुंडली में कहीं व्यभिचारी जीवनसाथी मिलने के योग तो नहीं?


गुण मिलान एवं कुंडली मिलान के उपरांत जानकार ज्योतिषी से यह भी अवस्य ज्ञात करवाले कि कहीं लडका या लड़कीं कि कुंडलीमें अन्य स्त्री-पुरुष से नाजायज संबंध बनने के योग तो नहीं हैं।

पति-पत्नी के झगड़े तो आम बात बनगये हैं। पति-पत्नी में सामान्य नोंक-झोंक से तो प्रेम और बढ़ता हैं। लेकिन नाजायज संबंधों के कारण उत्पन्न होने वाले झगड़े दोनो के बिच में गाली गलोच-मारपीट, अलगाव, कोर्ट कचेरी के चक्कर एवं तलाक, आत्महत्या, कत्ल तक पहुंच जाती हैं। कई लडके-लड़की को ऐसा जीवन साथी मिलता हैं, जो अपने नाजायज संबंधों के कारण अपने पति-पत्नी को विभिन्न तरह कि यातनाएं देता है।

एसी समस्याओं को भारतीय ज्योतिष शास्त्र के मूल सिद्धांतो से ज्ञात किया जा सकता हैं। लडका या लड़की को कैसा पति-पत्नी मिलेगी ?

• जन्म कुंडली में शुक्र उच्च का होने पर व्यक्ति के कई प्रेम प्रसंगहो सकते हैं, जो कि विवाह के बाद भी जारी रहते हैं।
• मारपीट करने वाला कई स्त्री-पुरुष से नाजायज संबंध रखने वाला जीवनसाथी मिलने के योग होने पर उन्हें मंत्र-यंत्र-तंत्र, रत्न इत्यादि उपाय करके ऐसे योग का प्रभाव कम किया जा सकता हैं।
• सप्तम भाव में मंगल चारित्रिक दोष उत्पन्न करता हैं स्त्री-पुरुष के विवाहेत्तर संबंध भी बनाता है। संतान पक्ष के किये कष्टकारी होता हैं। मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण पति-पत्नी में दूरियां बढ़ती हैं।
• द्वादश भाव में मंगल शैय्या सुख, भोग, में बाधक होता हैं इस दोष के कारण पति पत्नी के सम्बन्ध में प्रेम एवं सामंजस्य का अभाव रहता हैं। यदि मंगल पर ग्रहों का शुभ प्रभाव नहीं हों, तो व्यक्ति में चारित्रिक दोष और गुप्त रोग उत्पन्न कर सकता हैं। व्यक्ति जीवनसाथी को घातक नुकसान भी कर सकता हैं।
• यदि जन्म कुंडली में सप्तम भाव में शुक्र स्थित व्यक्ति को अत्याअधिक कामुक बनाता हैं जिससे विवाहेत्तर सम्बन्ध बनने कि संभावना प्रबल रहती हैं। जिस्से वैवाहिक जीवन का सुख नष्ट होता हैं।
• जन्म कुंड़ली मे सप्तम भाव में सूर्य हो, तो अन्य स्त्री-पुरुष से नाजायज संबंध बनाने वाला जीवनसाथी मिलता है।
जन्म कुंड़ली मे शत्रु राशि में मंगल या शनि हो, अथवा क्रूर राशि में स्थित होकर सप्तम भाव में स्थित हो, तो क्रूर, मारपीट करने वाले जीवनसाथी कि प्राप्ति होती हैं।
• जन्म कुंड़ली मे सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ शनि की युति होने पर व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति प्रेम नहीं रखता एवं किसी अन्य से प्रेम कर अवैध संबंध रखता है।
• जन्म कुंड़ली मे सप्तम भाव में राहु होने पर जीवनसाथी धोखा देने वाला कई स्त्री-पुरुष से संबंध रखने वाला व्यभिचारी होता हैं व विवाह के बाद अवैध संबंध बनाता है।
उक्त ग्रह दोष के कारणा ऐसा जीवनसाथी मिलता हैं जिसके कई स्त्री-पुरुष के साथ अवैध संबंध होते हैं। जो अपने दांपत्य जीवन के प्रति अत्यंत लापरवाह होते हैं।
जन्म कुंड़ली मे सप्तमेश यदि अष्टम या षष्टम भाव में हों, तो यह पति-पत्नी के मध्य मतभेद पैदा होता हैं। इस योग के कारणा पति-पत्नी एक दूसरे से अलग भी हो सकते हैं। इस योग के प्रभाव से पति-पत्नी दोंनो के विवाहेत्तर संबंध बन सकते हैं। इस लिये जिन पुरुष और कन्या कि कुंडली में में इस तरह का योग बनरहा हों उन्हें एक दूसरे कि भावनाओं का सम्मान करते हुवे अपने अंदर समर्पण कि भावना रखनी चाहिए।

ऐसे अशुभ ग्रह योग का प्रभाव कम करने के लिए लड़कियां यह उपाय करें:
• प्रतिदिन शिव-पार्वतीजी का पूजन करें।
पूरे विधि-विधान से हरितालिकातीज का व्रत रखें।
• सोमवार का व्रत रखें।
• मोती की अंगुठी धारण करें।
• माता-पिता का हृदय कभी ना दुखाएं और उनका या अन्य किसी बड़े व्यक्ति का अनादर बिल्कुल ना करें।
• मंदिर में गुप्त दान दें।
• हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ करें।
• प्रतिदिन पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।

गुरुवार, दिसंबर 02, 2010

प्रदोष व्रत कि कथा

Pradosh vrat ki katha

प्रदोष व्रत कि कथा

प्रदोष व्रत का महात्म्य वेदों के ज्ञाता सूत जी ने सौनकादि ऋषियों को सुनाया था। सूत जी बोले कलियुग में जब मनुष्य धर्म मार्ग से हटकर अधर्म के मार्ग पर लचेगा, भूलोक में हर तरफ अधर्म और अनचार का चलन होगा। मनुष्य अपने मूल कर्तव्य से विमुख हो कर अनुचितकर्म, नीच कर्म इत्यादी कृत्यो में संलग्न होगा उस यह समय प्रदोष व्रत ऐसा व्रत होगा जो मानव को शिव कृपा का पात्र बनायेगा और नर्कगति से मुक्त होकर मनुष्य स्वर्ग लोक को प्राप्त होगा।

सूत जी सौनकादि ऋषियों बोले कि प्रदोष व्रत के पुण्य से कलियुग में मनुष्य के सभी प्रकार के पाप और कष्ट नष्ट हो जायेगे। प्रदोष व्रत अति कल्याणकारी हैं, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति होगी।

अलग-अलग दिन के प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ को विस्तार वताते हुवे सूत जी बोले
प्रदोष व्रत से हर प्रकार के दोष मिटाने वाला व्रत हैं। सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व होता हैं। जो इस प्रकार हैं।
  • रविवार का प्रदोष व्रत अर्थात रवि प्रदोष व्रत करने से आरोग्य कि प्राप्ति होती हैं।
  • सोमवार का प्रदोष व्रत अर्थात सोम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति कि मनोकामना पूर्ण होती हैं।
  • मंगलवार का प्रदोष व्रत अर्थात भोम प्रदोष व्रत करने से रोग दूर होते हैं।
  • बुधवार का प्रदोष व्रत अर्थात बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति कि कामना सिद्ध होती है।
  • गुरुवार का प्रदोष व्रत अर्थात गुरु प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति शत्रु विजयी होता हैं।
  • शुक्रवार का प्रदोष व्रत अर्थात शुक्र प्रदोष व्रत करने से सुख सौभाग्य की वृद्धि होती है।
  • शनिवार का प्रदोष व्रत अर्थात शनि प्रदोष व्रत करने से संतान(पुत्र) कि प्राप्ति होती हैं।
 सूत जी ने सौनकादि ऋषियों को बताया कि प्रदोष व्रत के महात्मय को सर्वप्रथम भगवान शंकर ने माता सती को सुनाया था। मुझे यही कथा और महात्मय महर्षि वेदव्यास जी ने सुनाया और यह उत्तम व्रत महात्म्य मैने आपको सुनाया हैं।

प्रदोष व्रत विधान बाताते हुवे सूत जी ने कहा है प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं। सूर्यास्त के पश्चात 2 घण्टे एवं 24 मिनट रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता हैं। इस व्रत में भगवान शंकर की पूजा की जाती है। इस व्रत में व्रती को निर्जल रहकर व्रत रखना होता है। प्रात: काल स्नान करके भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप सहित पूजा करें। संध्या काल में पुन: स्नान करके इसी प्रकार से शिव जी की पूजा करना चाहिए। इस प्रकार प्रदोष व्रत करने से व्रती को पुण्य मिलता है।




>> प्रदोष व्रत का महत्व
http://gurutvakaryalay.blogspot.com/2010/03/blog-post_26.html

बुधवार, दिसंबर 01, 2010

गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका दिसम्बर 2010 में प्रकशित लेख

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गुरुत्व ज्योतिष ई पत्रीका दिसम्बर 2010 में प्रकशित लेख

विशेष लेख
जन्म कुंडली से जाने विवाहित -अविवाहित योग6कुंडली में कहीं व्यभिचारी जीवन -साथी मिलने के योग तो नहीं?12
विवाह के बाद भाग्योदय8कुंडली से जाने विवाह का सही समय14
आपकी बहू-बेटी कि कुंडली में विषकन्या योग तो नहीं हैं?9प्रेम विवाह योग
17
कन्या कि कुंडली में विधवा बनाने वाले योग11विवाह से संबंधित स्वप्न21
अनुक्रम
संपादकीय5वास्तु दोष से बढते हैं अवैध संबंधों47
शास्त्रों के अनुसार विवाह के प्रकार23शीघ्र मनोनुकूल पति-पत्नी प्राप्ति के उपाय48
विवाह से पूर्व कुंडली मिलान में अल्पायु-दीर्धायु योग भी देख लें25दिसम्बर 2010 मासिक पंचांग51
ज्योतिष से जाने जीवनसाथी कि दिशा?29दिसम्बर -2010 मासिक व्रत-पर्व-त्यौहार53
राशि से जानिये उत्तम जीवन साथी30ग्रह चलन दिसम्बर -201055
आपका जीवन साथी कहीं नशे का आदी तो नहीं?31नवम्बर-२०१०-विशेष योग 56
सात फेरे और सात वचन32दैनिक शुभ एवं अशुभ समय ज्ञान तालिका56
सिर्फ कुंडली मिलान सफल विवाह की गारंटी नहीं होती?34दिन-रात के चौघडिये  57
विवाह हेतु उचित माह कौन सा होता हैं?36दिन-रात कि होरा58
मंगली दोष वाले जातक थोड़े गुस्सैल चिड़चिड़े होते हैं?37मासिक राशि फल59
दांपत्य जीवन में मंगल, गुरु एवं शुक्र का प्रभाव40वास्तु परामर्श61
प्रश्न ज्योतिष और विवाह योग42ज्योतिष परामर्श 62
विवाह समय निर्धारण43सूचना70
विवाह के कुछ शास्त्रोक्त नियम45हमारा उद्देश्य72
लघु कथाएं
भक्ति भाव20
हमारे उत्पाद
ई-जन्म पत्रिका/E-Horoscope4मंत्र सिद्ध व्यापार वृद्धि कवच  46
सर्व कार्य सिद्धि कवच10वास्तु दोष निवारक यंत्र47
मंत्र सिद्ध स्फटिक श्री यंत्र13द्वादश महा यंत्र48
प्राण प्रतिष्ठित दुर्गा बीसा यंत्र20क्या आप किसी समस्या से ग्रस्त हैं?50
द्वादश महा यंत्र24गणेश लक्ष्मी यंत्र52
भाग्य लक्ष्मी दिब्बी26मंगल यंत्र से ऋण मुक्ति52
पति-पत्नी में कलह  निवारण हेतु28तंत्र रक्षा कवच52
Full Astrological Analysis Report 35धन वृद्धि डिब्बी54
क्या आपके बच्चे कुसंगती के शिकार हैं?36मंत्र सिद्ध रूद्राक्ष60
मंगल यंत्र37सर्व रोगनाशक यंत्र/कवच63
मंत्र सिद्ध मंगल गणेश41मंत्र सिद्ध कवच65
कुबेर यंत्र44YANTRA LIST 66
कनकधारा यंत्र45GEM STONE68
नवरत्न जड़ित श्री यंत्र46BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION69
अष्ट लक्ष्मी कवच46

http://gk.yolasite.com/resources/GURUTVA%20JYOTISH%20DEC-2010.pdf
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जन्म कुंडली से जाने विवाहित-अविवाहित योग

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जन्म कुंडली से जाने विवाहित-अविवाहित योग


विवाह योग
• सप्तम भाव का स्वामी शुभ ग्रह हो या अशुभ ग्रह यदि वह अपने भाव सप्तम में हि स्थित हो या किसी अन्य में स्थित होकर अपने भाव को देख रहा हो और सप्तम भाव पर किसी पाप ग्रह का प्रभाव या द्रष्टी नहों तो जातक का विवाह अवश्य होता हैं।
• सप्तम भाव में कोई पाप ग्रह स्थित नहीं हो और नाहीं द्रष्टी हो, तो विवाह अवश्य होता हैं।
• सप्तम भाव में सम राशि हो या सप्तमेश और शुक्र भी सम राशि में स्थित हों या सप्तमेश बली हो, तो विवाह होता हैं।
• सप्तम भाव में कोई ग्रह नहों, न किसी पाप ग्रह की द्रिष्टि हो व सप्तमेश बली होतो विवाह अवश्य होता हैं।
• यदि दूसरे, सातवें और बारहवें भाव के स्वामी केन्द्र या त्रिकोण में हों, और गुरु से द्रष्ट हो, तो विवाह अवश्य होता हैं।
• कुंडली में सप्तमेश से दूसरे, सातवें और ग्यारवे भाव में सौम्य ग्रह स्थित हो तो स्त्री सुख अवश्य मिलता हैं।
• शुक्र द्विस्वभाव राशि में होने पर विवाह अवश्य होता हैं।

विवाह बाधा योग योग
• सप्तम में बुध और शुक्र दोनो हो, तो विवाह के प्रस्ताव आते रहते हैं पर विवाह अधेड उम्र में होता हैं।
• शुक्र एवं मंगल दोनो पंचम या नवें भाव में हों, तो विवाह बाधा योग होता हैं।
• सप्तम भाव में मंगल हों उस पर शनि कि द्रष्टी हों, तो विवाह बाधा योग होता हैं।
• सप्तमेश अशुभ होकर 6,8,12 वे भाव में अस्त या नीच का हो कर स्थित हो, तो विवाह बाधा योग होता हैं।
• सप्तम भाव में शनि या गुरु स्थित हो, तो शादी देर से करवाते हैं।
• सप्तम भाव पर शनि कि द्रष्टी विवाह में विलंब करवाती हैं।
• चन्द्रमा से सप्तम में गुरु स्थित हो, तो शादी देर से करवाता हैं।
• कर्क लग्न में सप्तम में गुरु स्थित हो, तो शादी देर से करवाता हैं।
• सप्तम में 6,8,12 वे भाव का स्वामी स्थित हों उस पर किसी शुभ ग्रह कि द्रष्टी या युति नहो शादी देर से करवाते हैं।
• कन्या की कुन्डली में सप्तमेश के साथ शनि स्थित होने से विवाह अधिक आयु में होता हैं।
• सूर्य, मंगल, बुध लगन में स्थित हो और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो विवाह बडी आयु में होता हैं।
• लगन, सप्तम, बारहवें तीनो भाव में पाप ग्रह स्थित हों तथा पंचम भाव में चन्द्रमा कमजोर हो, तो विवाह नही होता यदि होता हैं तो संतान कि संभावना कम होती हैं।
• राहु की महादशा या अंतर्दशा में विवाह हो, या राहु सप्तम भाव को दूषित कर रहा हो, तो दिमागी भ्रम के कारण शादी होकर टूट जाती हैं या साथी से अलगाव होता हैं।

अविवाहित योग
• जन्म कुंडली में सप्तमेश अशुभ स्थान 6,8,12 वे भाव पर स्थित हों और सप्तमेश पर एक से अधिक पाप ग्रहो का प्रभाव हो तो जातक अविवाहित रहता हैं।
• लगन या चतुर्थ भाव में मंगल स्थित हो, सप्तम मेंभाव में शनि स्थित हो तो कन्या की रुचि शादी में नही होती हैं।
• सप्तमेश छ: आठ या बारहवें स्थान पर अस्त या नीच राशि का होकर बैठा हो, तो जातक अविवाहित रहता हैं।
• सप्तमेश बारहवें भाव में हो और लगनेश या राशि कास्वामी सप्तम में बैठा हो, तो जातक अविवाहित रहता हैं।
• चन्द्र शुक्र साथ स्थित हों, उस्से सप्तम स्थान पर मंगल और शनि स्थित हो अर्थात चंद्र और शुक्र कि युति से सप्तन भाव में मंगल शनि कि युति हो, तो जातक अविवाहित रहता हैं।
• शुक्र और मंगल दोनों सप्तम में हो, तो जातक अविवाहित रहता हैं।
• शुक्र किसी पाप ग्रह के साथ पंचम या सप्तम या नवम भाव में युति हो, तो जातक अविवाहित रहता हैं। और यदि हो जाये तो जातक जीवन साथी के वियोग से पीडित रहता हैं।
• सप्तम और बारहवे भाव में दो या दो से अधिक पाप ग्रह स्थित हो और पंचम भाव में चंद्र स्थित हो, तो जातक का विवाह नहीं होता
• जन्म कुंडली में शुक्र, बुध, शनि तीनो ग्रह नीच हों, तो जातक का विवाह नहीं होता।
• सूर्य स्पष्ट और सप्तम स्पष्ट बराबर का होने पर भी जातक का विवाह नहीं होता।

दिसम्बर- 2010 मासिक राशि फल

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दिसम्बर- 2010 मासिक राशि फल


मेष : इस माह मानसिक अशांति एवं शारीरिक अस्वस्थता अनुभव करेगें। अधिक परिश्रम में कमी रहेगी जिस्से अधिक लाभ प्राप्र नहीं होगा,पूर्ण परिश्रम से कार्यो को पूरा करने का प्रयास करें। नौकरी व्यवसाय में रुके हुवे कार्य में सफल होंगे। मित्र एवं पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य संबंधी चिंता समय पर रखें।

वृष : इस माह में भाग-दौड कि अधिकता एवं विपरित परिस्थितिओं के कारण मानसिक अशांति रहेगा। परिश्रम के बाद भी उचित लाभ प्राप्ति का अनुभव नही कर पायेगें। महत्व पूर्ण धन से संबंधित लेन-देन में परेशानी हो सकती हैं। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा एवं स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से स्वास्थ्य सुख में वृद्धि होगी। परिवार के सदस्यों के बिच में मदभेद रहेगा।

मिथुन : इस माह आय कि तुलना में व्यय कि अधिकता रह सकती हैं। खर्च पर नियन्त्रण रखने का प्रयास करे। भूमि-भवन-वाहन के सुखो में वृद्धि होने के योग हैं। होंगे। मित्र एवं पारिवारीक सहयोग से नौकरी व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। स्वभाव में क्रोध एवं उतेजना पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें अन्यथा बने बनाये काम बिगड़ सकते हैं। विपरित परिस्थितिओं के चलते आपको मानसिक परेशानी का सामना करना पडेगा।

कर्क : इस माह आपके उत्साह स्फुर्ति मे वृद्धि होगी। पूरानी परेशानीओं से छुटकारा पाने में सफल होंगे। मित्र एवं पारिवारीक सहयोग से नौकरी व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। शत्रु एवं विरोधी पर आपका दब-दबा रहेगा। दूसरों पर निर्भर रहकर कार्य करना नुकशान दे सकता हैं। इस माह स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। पारिवारिक सुख में वृद्धि एवं धन संग्रह के अवसर प्राप्त होगें।

सिंह : पुरानी समस्याओं और परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। नौकरी में पदौन्नती एवं व्यापार में उन्नति के अवसय प्राप्त होगें। भूमि-भवन-वाहन के सुखो में वृद्धि होने के योग हैं। विरोधि एवं शत्रु पक्ष से परेशानी हो सकती हैं सावधान रहें। भौतिक सुख साधनो कि प्राप्ति होगी। खर्च पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें।

कन्या : इस माह मानसिक अशांति एवं शारीरिक अस्वस्थता अनुभव करेगें। परिवार के सदस्यो का स्वास्थ्य चिंताजनक रहेगा। स्वभाव में उग्रता एवं उतेजना कि स्थिति पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें। अनआवश्यक खर्च बढेंगा। शत्रु पक्ष से परेशानी संभव हैं। महत्व पूर्ण धन से संबंधित लेन-देन में अतिरिक्त सावधानी बरते अन्यथा परेशानी हो सकती हैं।

तुला : इस माह आपके उत्साह स्फुर्ति मे वृद्धि होगी। नौकरी व्यवसाय में रुके हुवे कार्य में सफल होंगे। पूरानी परेशानीओं से छुटकारा पाने में सफल होंगे। मित्र एवं पारिवारीक सहयोग से नौकरी व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। पारिवारिक सुख में वृद्धि एवं धन संग्रह के अवसर प्राप्त होगें। भूमि-भवन इत्यादी में पूंजि निवेश करने से बचे।

वृश्चिक : पूर्ण परिश्रम से किये गये कार्यो में सफलता प्राप्त होगी। नौकरी में पदौन्नती एवं व्यापार में उन्नति के अवसय प्राप्त होगें। मित्र एवं परिवारीक के सदस्यो के सहयोग से आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। साझेदारी के कार्यो को स्थगित करें। शत्रु एवं विरोधि पक्ष पर अपना प्रभाव बनाने में आप सफलता प्राप्त करेगें। पूराने ऋणों का भुगतान करना पड सकता हैं।

धनु : इस माह आत्मविश्वार एवं उत्साह स्फुर्ति मे वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। नौकरी व्यवसाय के कार्यो में प्रगति होगी। महत्व पूर्ण धन से संबंधित लेन-देन के कार्यो में भी सफलता प्राप्त करेंगे। परिवार में भौतिक सुख -साधनो में वृद्धि हो सकती हैं जिस्स के फलस्वरुप परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। शत्रु एवं विरोधी पर आपका दब-दबा रहेगा।

मकर : इस माह सभी महत्व पूर्ण कार्यो में अतिरिक्त सावधानी बरते अन्यथा परेशानी हो सकती हैं। ऋण लेने से बचे, अत्याधिक खर्च पर नियंत्रण करने का प्रयास करें। महत्व पूर्ण योजनाओंन को स्थिगित करने का प्रयास करें। परिवार एवं मित्र वर्ग के बिच में तनाव कि स्थिती रहेगी। नौकरी-व्यवसाय में शत्रु पक्ष से कष्ट संभव हैं सावधान रहे।

कुंभ : पारिवारिक सुख में वृद्धि एवं धन संग्रह के अवसर प्राप्त होगें। भूमि-भवन-वाहन के सुखो में वृद्धि होने के योग हैं। थोडे से परिश्रम से नौकरी व्यवसाय में प्रगति होगी। आकस्मिक धन प्राप्ति के योग हैं। आर्थिक स्थिती में सुधार होगा। स्वास्थ्य पक्ष कमजोर रहेगा। भाग-दौड कि अधिकता एवं विपरित परिस्थितिओं के कारण मानसिक अशांति रह सकती हैं।

मीन : इस माह नौकरी व्यवसाय के कार्यो में परेशानी संभव हैं अतिरिक्त सावधानी बर्ते। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचने का प्रयास करें। भौतिक सुख साधनो कि प्राप्ति होगी। खर्च पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें। महिला वर्ग से अधिक लाभ प्राप्ति के योग बन रहे हैं। स्वभाव में तीव्रता एवं उग्रता रह सकती हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

कन्या कि कुंडली में विधवा बनाने वाले योग।

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कन्या कि कुंडली में विधवा बनाने वाले योग।


• किसी लड़कि का जन्म रविवार या शनिवार को अश्लेषा नक्षत्र एवं द्वितीया तिथि के संयोग में हुवा हो, तो उससे वैध्व्य योग बनता हैं।
• किसी लड़कि का जन्म शनिवार को कृतिका नक्षत्र एवं सप्तमी तिथि के संयोग में हुवा हो, तो उससे वैध्व्य योग बनता हैं।
• किसी लड़कि का जन्म मंगलवार को शतभिषा नक्षत्र एवं सप्तमी या द्वादशी तिथि के संयोग में हुवा हो, तो उससे वैध्व्य योग बनता हैं।
• किसी लड़कि का जन्म रविवार को विशाखा नक्षत्र एवं द्वादशी तिथि के संयोग में हुवा हो, तो उससे वैध्व्य योग बनता हैं।
• इसके अलावा लड़का या लड़की किसी की भी कुंडली में सप्तम स्थान पर यदि सूर्य, राहु, मंगल, शनि, हो तो उसे जीवन साथी से निराशा होती हैं।
• किसी भी कारण से उनका विवाह संबध विच्छेद हो जाने के योग प्रबल होते हैं।
• प्रतिपदा (एकम) तिथि के दिन मूल नक्षत्र, पंचमी तिथि के दिन भरणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि के दिन कृतिका नक्षत्र, नवमी तिथि के दिन रोहिणी नक्षत्र, दशमी तिथि के दिन अश्लेषा नक्षत्र एवं एकादशी तिथि के दिन मघा नक्षत्रों में जन्म लेने वाले व्यक्ति ज्वालामुखी योग से युक्त होने के कारण दांपत्य जीवन सुखमय नहीं होता हैं।

विवाह हेतु कुंडली मिलान करवाते समय नाड़ी दोष को भी अवश्य देखले क्योकि ज्योतिष विद्वानो के अनुशार यदि वर-कन्या के नक्षत्रों में नज़दीकियां हों, तो विवाह के एक वर्ष के भीतर कन्या की मृत्यु हो सकती हैं अथवा तीन वर्षों के अंदर उसके पति कि मृत्यु होने से कन्या विधवा होने की संभावना बनी रहती हैं। इस लिये नाड़ी दोष का भी अवस्य ध्यान रखें।

• कुंडली मिलाने में यदि कन्या और वर दोनों कि आदि नाड़ी हों, तो उनका विवाह होजाने पर दोनों के वैवाहिक संबंध अधिक दिनों तक सुखमय नहीं रहता अर्थात दोनों में अलगाव हो ने कि प्रबल संभावना बनती हैं।
• कुंडली मिलाने में कन्या और वर दोनों कि कुंडली में मध्य नाड़ी हो, तो उनका विवाह हो जाने पर दोनों कि मृत्यु हो सकती हैं।
• कुंडली मिलाने में कन्या और वर दोनों कि कुंडली में अंत्य नाड़ी हो, तो उनका विवाह हो जाने पर दोनों का जीवन दु:खमय व्यतित होता हैं।

नोट: कुंडली मिलाने में वर-कन्या दोनों कि उक्त वर्णित तीनों में कोई भी एक समान नाड़ियां हो, तो विवाह वर्जित है।
यदि किसी कन्या कि कुंडली में एसी स्थितीयां बन रही हैं तो उस्से डरने के बजाय उसके निवारण के उपाय करने चाहिये।

उपाय
• भगवान शिव पार्वती का पूजन करने से अशुभता में कमी आती हैं।
• महामृत्युंजय मंत्र का जप अनुष्ठान किसी योग्य ब्राह्मण से संपन्न करवायें।
• कुम्भ विवाह करने से भी अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
• किसी देवी प्रतिमा से सिंदुर लेकर रोज अपने ललाट पर लगाने से अशुभता में कमी आती हैं।
• अपने माता-पिता एवं बडे बुजुर्ग का आशिर्वाद लें।
• अपना चरित्र साफ रखें एवं अनौतिक कर्मो से बचें।
• प्रेम विवाह करने से बचें।