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सोमवार, सितंबर 17, 2012

श्री विश्वकर्मा अवतार की आरती


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       ॥श्री विश्वकर्मा अवतार की आरती॥ 

            ॐ जय पंचानन स्वामी प्रभु पंचानन स्वामी । 
अजर अमर अविनाशी, नमो अन्तर्यामी ।
            चतुरानन संग सात ऋषि, शरण आपकी आये । 
अभय दान दे ऋषियन को, सार कष्ट मिटाये ।1।
            निगम गम पथ दाता हमें शरण पडे तेरी । 
विषय विकार मिटाओ सारे, मत लाओ देरी ।2।
            कुण्डल कर्ण गले मे माला इस वाहन सोहे । 
जति सति सन्यासी जग के, देख ही मोहे ।3।
            श्रेष्ठ कमण्डल मुकमट शीश पर तुम त्रिशूल धारी । 
भाल विशा सुलोचन देखत सुख  पावँ नरनारी ।4।
            देख देख कर रुप मुनिजन, मन ही मन रीझै । 
अग्नि वायु आदित्य अंगिरा, आनन्द रस पीजै ।5।
            ऋषि अंगिरा कियो धारे तपस्या, शान्ति नही पाई । 
चरण कमल का दियो आसय, तब सब बन आई ।6।
            भक्त की जय कार तुम्हारी विज्ञान शिल्प दाता । 
जिस पर हो तेरी दया दृष्टि भव सागर तर जाता ।7।
            ऋषि सिर्फ ज्ञान विधायक जो शरण तुम्हारी आये । 
विश्वप्रताप दुख रोग मिटे, सुख सम्पत पावे ।8।
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