Search

लोड हो रहा है. . .

सोमवार, सितंबर 17, 2012

श्री विश्वकर्मा हरि की आरती

Shree Viswakarma Hari Ki Arti, Panch mukh Viswakarma aarti, Shri Panchmikhi Vishvkarma Arti, Jai Shri Vishwakarma, Shri Vishwakarma Ki Aarti, vishwakarma aarti ,aarti in hindi ,विश्वकर्मा आरती ,arti in hindi ,aarti vishwakarma ,vishwakarma arti ,hindu vishwakarma ,om jai shri vishwakarma prabhu jai shri vishwakarma, जय श्री विश्वकर्मा, श्री विश्वकर्मा जी की आरती, श्री पंच मुखी विश्वकर्मा की आरती 

        ॥ श्री विश्वकर्मा हरि की आरती ॥

            ॐ जय विश्वकर्मा हरे जय विश्वकर्मा हरे ।
दीना नाथ शरण गत वत्सलभव उध्दार करे ।1।
            भक्त जनों के समय समय पर दुख संकट हर्ता ।
विश्वरुप जगत के स्वामी तुम आदि कर्ता ।2।
            ब्रह्म वशं मे अवतार धरो, निज इच्छा कर स्वामी ।
प्रभात पिता महतारी भूवना योग सुता नामी ।3।

            शिवो मनुमय त्वष्टा शिल्पी दैवज सुख दाता ।
शिल्प कला मे पांच तनय, भये ब्रह्म ज्ञाता ।4।
            नारद इन्द्रशेष शारदा तव चरणन के तेरे ।
अग्नि वायु आदित्य अंगिरा, गावें गुण तेरे ।5।
            देव मुनि जन ऋषि महात्मा चरण शरण आये ।
राम सीया और उमा भवानी कर दर्शन हर्षाये ।6।

            ब्रह्मा विष्णु शंकर स्वमी, करते नित्य सेवा ।
जगत प्राणी दर्श करन हित, आस करें देवा ।7।
            हेली नाम विप्र ने मन से तुम्हारा गुण गाया ।
मिला षिल्प वरदान विप्र को, भक्ति फल पाया ।8।
            अमृत घट की रक्षा कीन्ही, सुर भय हीन भये ।
महा यज्ञ हेतु इन्द्र के घर, बन के गुरु गये ।9।

            पीत वसन कर चक्र सोहे. महा वज्र धारी ।
वेद ज्ञान की बहे सरिता, सब विध सुखकारी ।10।
            हम अज्ञान भक्त तेरे तुम सच्चे हितकारी ।
करो कामना सब की पूर्ण, दर पर खडे भिकारी ।11।
            विश्वकर्मा सत्गुरु हमारे, कष्ट हरो तन का ।
विश्वप्रताप शरण सुख राशि दुख विनेश मन का ।12।
इससे जुडे अन्य लेख पढें (Read Related Article)


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें