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मंगलवार, मार्च 01, 2011

रुद्राभिषेक से कामनापूर्ति

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रुद्राभिषेक से कामनापूर्ति, રુદ્રાભિષેક કામનાપૂર્તિ, ರುದ್ರಾಭಿಷೇಕ ಕಾಮನಾಪೂರ್ತಿ, ருத்ராபிஷேக காமநாபூர்தி, రుత్రాపిషేక కామనాపూర్తి, രുത്രാപിഷേക കാമനാപൂര്തി, ਰੁਤ੍ਰਾਪਿਸ਼ੇਕ ਕਾਮਨਾਪੂਰ੍ਤਿ, রুত্রাপিশেক কামনাপূর্তি, rusrabhishek se kamana purti, ରୁଦ୍ରାଭିଷେକ କାମନାପୂର୍ତି,

रुद्राभिषेक से कामनापूर्ति


धर्म शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक के साथ निर्धारित सामग्री या द्रव्यों के प्रयोग से कार्य की सिद्धि होती हैं।

शिवलिंग पर जल से रुद्राभिषेक करने पर वर्षा होती हैं।
शिवलिंग पर कुशोदक से रुद्राभिषेक करने से असाध्य रोगों को शांत होते हैं।
शिवलिंग पर दही से रुद्राभिषेक करने से भूमि-भवन-वाहन प्राप्त होते हैं।
शिवलिंग पर गन्ने के रस से ……………..>>
शिवलिंग पर शहद एवं घी के मिश्रण ……………..>>
शिवलिंग पर तीर्थ के जल से ……………..>>
शिवलिंग पर दूध से रुद्राभिषेक करने से संतान की प्राप्ति होती हैं। जिस दंपत्ति को संतान प्राप्ति के योग नहीं बन रहे हो, काकवन्ध्या दोष अर्थात एक संतान के पश्चयात दूसरी संतान न होना अथवा मृतवत्सा दोष अर्थात संतानें पैदा होते मर जाती हो उनहें गाय के दूध से रुद्राभिषेक करना चाहिए।
शिवलिंग पर शीतल जल से ……………..>>
शिवलिंग पर दूध से ……………..>>
शिवलिंग पर गाय के दूध एवं शक्कर के ……………..>>
शिवलिंग पर सरसों के तेल ……………..>>
शिवलिंग पर शहद से ……………..>>
शिवलिंग पर शहद से ……………..>>
शिवलिंग पर गाय के घी ……………..>>

शास्त्रोक्त एवं विद्वानो के मत से शिवलिंगका विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट निश्चय ही पूर्ण होता हैं।
यजुर्वेद में उल्लेखित विधि-विधान से रुद्राभिषेक करना अत्याधिक लाभप्रद मानागया हैं। लेकिन जो भक्त इस विधि-विधान को करने में असमर्थ हैं अथवा इस विधान से परिचित नहीं हैं वह भक्त शिवजी के षडाक्षती मंत्र ॐ नम:शिवाय का जप करते हुए रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

विशेष कामना पूर्ति हेतु किये गये रुद्राभिषेक के शास्त्रोक्त नियम:
विद्वानो के मत से किसी विशेष कामना की पूर्ति हेतु किये जाने वाले रुद्राभिषेक हेतु शिव वास का विचार करने पर कामना पूर्ति हेतु किये गये अनुष्ठान में निश्चित मनोवांछित सफलता प्राप्त होती हैं।

शिववास विचार :
तिथिं च द्विगुणी कृत्यपंचाभिश्च समन्तितम्।।
सप्तभिस्तुहरीभ्दिगंशेषं शिववास उच्चयते।।
सके कैलाश वासंचद्वितीयं गौरिन्नि हो।।
तृतीये वृषभारूढ़ चतुर्थे च समास्थित पंचमे भोजनेचैव क्रीडायान्तुरसात्मके।।
शून्येश्मशानकेचैव शिववासंच योजयेत्।।

प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा (१), अष्टमी (८), अमावस्या तथा शुक्लपक्ष की द्वितीया (२)व नवमी (९) के दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ होते हैं, इस तिथि में रुद्राभिषेक करने से सुख-समृद्धि अवश्य प्राप्त होती हैं।
कृष्णपक्ष की चतुर्थी (४), एकादशी (११) तथा शुक्लपक्ष की पंचमी (५) व द्वादशी (१२) तिथियों में भगवान शिव ……………..>>
कृष्णपक्ष की पंचमी (५), द्वादशी (१२) तथा शुक्लपक्ष की षष्ठी (६)व त्रयोदशी (१३) तिथियों में भगवान शिव ……………..>>
कृष्णपक्ष की सप्तमी (७), चतुर्दशी (१४) तथा शुक्लपक्ष की प्रतिपदा (१), अष्टमी (८), पूर्णिमा (१५) में भगवान ……………..>>
कृष्णपक्ष की द्वितीया (२), नवमी (९) तथा शुक्लपक्ष की तृतीया (३) व दशमी (१०) में भगवान शिव ……………..>>
कृष्णपक्ष की तृतीया (३), दशमी (१०) तथा शुक्लपक्ष की चतुर्थी (४) व एकादशी (११)में भगवान शिव ……………..>>
कृष्णपक्ष की षष्ठी (6), त्रयोदशी (13) तथा शुक्लपक्ष की सप्तमी (7) व चतुर्दशी (14) में रुद्रदेवभोजन ……………..>>

नोट: शिववास का विचार निर्धारित कार्य की पूर्ति हेतु अथवा अभिष्ट कामनाओं की पूर्ति हेतु विचार किया जाता हैं। निष्काम भाव से की जाने वाला शिव पूजा-अर्चना अथवा रुद्राभिषेक हेतु शिववास विचार करने की आवश्यका नहीं होती।
(द्वादशज्योतिलिंग क्षेत्र एवं तीर्थ स्थान में तथा शिवरात्रि, प्रदोष, सावन के सोमवार-
इत्यादि विशेष शुभ-अवसरो अथवा पर्वो में शिववास विचार करने की आवश्यका नहीं होती।)


इस लेख को प्रतिलिपि संरक्षण (Copy Protection) के कारणो से यहां संक्षिप्त में प्रकाशित किया गया हैं।


>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (मार्च-2011)

>> http://gk.yolasite.com/resources/GURUTVA%20JYOTISH%20MAR-201.pdf  
शिवरात्री विशेष, शीवरात्री विशेष,
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