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बुधवार, अप्रैल 14, 2010

मन्द्दात्मकं मारुतिस्तोत्रम्

 manddatmakam maruti stotram

 मन्द्दात्मकं मारुतिस्तोत्रम्



नमो वायुपुत्राय भीमरूपाय धीमते।
नमस्ते रामदूताय कामरूपाय श्रीमते॥

मोह शोकविनाशाय सीताशोकविनाशिने।
भगनशोकवनायास्तु दग्धलङ्काय वाग्मिने॥

गतिनिर्जितवाताय लक्ष्मणप्राणदाय च।
वनौकसां वरिष्ठाय वशिने वनवासिने॥

तत्त्‍‌वज्ञानसुधासिन्धुनिमगनय महीयते।
आञ्जनेयाय शूराय सुग्रीवसचिवाय ते॥

जन्ममृत्युभयघनय सर्वकष्टहराय च।
नेदिष्ठाय प्रेतभूतपिशाचभयहारिणे॥

यातनानाशनायास्तु नमो मर्कटरूपिणे।
यक्षराक्षसशार्दूलसर्पवृश्चिकभीहृते॥

महाबलाय वीराय चिरंजीविन उद्धते।
हारिणे वज्रदेहाय चोल्लङ्घितमहाब्धये॥

बलिनामग्रगण्याय नमो न: पाहि मारुते।
लाभदोऽसि त्वमेवाशु हनुमन् राक्षसान्तक॥

यशो जयं च मे देहि शत्रून् नाशय नाशय।
स्वाश्रितानामभयदं य एवं स्तौति मारुतिम्।

हानि: कुतो भवेत्तस्य सर्वत्र विजयी भवेत्॥



इस स्तोत्रका प्रतिदिन पाठ करने से मृत्यु , यक्ष, राक्षस, सिंह, सर्प, बिच्छू भूत, प्रेत और पिशाच इत्यादि भयका नाश होकर उसकी समस्त पीड़ा का निराकरण होता हैं। उसे समस्त कार्यो मे विजय प्राप्त होती हैं
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