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बुधवार, नवंबर 03, 2010

स्फटिक श्रीयंत्र का पूजन

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स्फटिक श्रीयंत्र का पूजन


आज के भौतिक युग में अर्थ (धन) जीवन कि मुख्य आवश्यक्ताओं में से एक है। धनाढ्य व्यक्तिओं जीवनशैली को देखकर प्रभावित होते हुवे साधारण व्यकि कि भी कामना होती हैं, कि उसके पास भी इतना धन हो कि वह अपने जीवन में समस्त भौतिक सुखो को भोग ने में समर्थ हों। एसी स्थिमें मेहनत, परिश्रम से कमाई करके धन अर्जित करने के बजाय कुछ लोग अल्प समय में ज्यादा कमाने कि मानसिकता के कारण कभी-कभी गलत तरीकें अपनाते हैं।

जिसके फल स्वरुप एसे लोग धन का वास्तविक सुख भोगने से वंचित रह जाते हैं और रोग, तनाव, मानसिक अशांति जेसी अन्य समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं।
जहां गलत तरीकें से कमाये हुवे धन के कारण समाज एसे लोगो को हीन भाव से देखते हैं। जबकि मेहनत, परिश्रम से कामाये हुवे धन से स्वयं का आत्मविश्वास बढता हैं एवं समाज में प्रतिष्ठा और मान सम्मान भी सरलता से प्राप्त हो जाता हैं।
जो व्यक्ति धार्मिक विचार धाराओं से जुडे हो वह इश्वर में विश्वार रखते हुवे स्वयं कि मेहनत, परिश्रम के बल पर कमाये हुवे धन को हि सच्चा सुख मानते हैं। धर्म में आस्था एवं विश्वास रखने वाले व्यक्ति के लिये मेहनत, परिश्रम करने के उपरांत अपनी आर्थिक स्थिमें उन्नति एवं लक्ष्मी को स्थिर करने हेतु, श्री यंत्र के पूजन का उपाय अपनाकर जीवन में किसी भी सुख से वंचित नहीं रह सकते, उन्हें अपने जीवन में कभी धन का अभाव नहीं रहता। उनके समस्त कार्य सुचारु रुप से चलते हैं। लक्ष्मी कृपा प्राप्ति के लिए श्रीयंत्र का सरल पूजन विधान जिसे अपना कर साधारण व्यक्ति विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस में जरा भी संशय नहीं हैं।

श्रीयंत्र का पूजन रंक से राजा बनाने वाला एवं व्यक्ति कि दरिद्रता को दूर करने वाला हैं।
• अपने पूजा स्थान में प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र को पूजन के लिये स्थापित करें। (प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र किसी भी योग्य विद्वान ब्राह्मण या योग्य जानकार से सिद्ध करवाले................. >> आगे
संपूर्ण पूजन विधि जानने हेतु कृप्या गुरुत्व ज्योतिष ई-पत्रिका नवम्बर-2010 का अंक पढें।


>> गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (नवम्बर-2010)
http://gk.yolasite.com/resources/GURUTVA%20JYOTISH%20NOV-2010.pdf
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