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गुरुवार, नवंबर 04, 2010

अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

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अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

सुमनसवंदित सुंदरि माधवि चंद्र सहोदरि हेममये ।
मुनिगण वंदित मोक्षप्रदायिनि मंजुळभाषिणि वेदनुते ॥
पंकजवासिनि देवसुपूजित सदगुणवर्षिणि शांतियुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि जय पालय माम् ॥1॥

अयिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये ।
क्षीरसमुदभव मंगलरूपिणि मंत्रनिवासिनि मंत्रनुते ॥
मंगलदायिनि अंबुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि धान्यलक्ष्मि जय पालय माम् ॥2॥

जयवर वर्णिनि वैष्णविभार्गवि मंत्रस्वरूपिणि मंत्रमये ।
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते ॥
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधुजनाश्रित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि जय पालय माम् ॥3॥

जय जय दुर्गतिनाशिनि कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये ।
रथगज तुरग पदादिसमानुत परिजनमंडित लोकनुते ॥
हरि-हर ब्रह्म सुपूजित सेवित तापनिवारिणि पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि श्री गजलक्ष्मि पालय माम् ॥4॥

अयि खगवाहिनि मोहिनि चक्रिणि राग विवर्धिनि ज्ञानमये ।
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि सप्तस्वरवर गाननुते ॥
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानववंदित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि संतानलक्ष्मि पालय माम् ॥5॥

जय कमलासनि सदगतिदायिनि ज्ञान विकासिनि गानमये ।
अनुदिनमर्चित कुकुंमधूसर भूषितवासित वाद्यनुते ॥
कनक धरा स्तुति वैभव वंदित शंकर देशिक मान्य पते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि विजयलक्ष्मि जय पालय माम् ॥6॥

प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये ।
मणिमय भूषित कर्णविभूषण शांतिसमावृत हास्यमुखे ॥
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि काम्य फलप्रद हस्तयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि पालय माम् ॥7॥

धिमि धिमि धिम् धिमि धिंधिमि धिंधिमि दुंदुभि्नाद सुपूर्णमये ।
घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम शंखनिनाद सुवाद्यनुते ॥
वेदपुराणेति हास सुपूजित वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि श्री धनलक्ष्मि पालय माम् ॥8॥
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