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गुरुवार, नवंबर 04, 2010

दीपावली का महत्व और लक्ष्मी पूजन विधि

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दीपावली का महत्व और लक्ष्मी पूजन विधि

लेख साभार: गुरुत्व ज्योतिष पत्रिका (नवम्बर-2010)
http://gurutvajyotish.blogspot.com/

प्राचिन काल से हि भारतीय संस्कृति में अनेक पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं। इन त्यौहारों में कार्तिक मास कि अमावस्या को दीपावली का विशेष महत्व हैं। क्योकि दीपावली खुशियों का त्यौहार हैं। दीपावली के दिन भगवान गणेश व लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व हैं। इस दिन गणेश जी कि पूजा से ऋद्धि-सिद्धि कि प्राप्ति होती हैं एवं लक्ष्मी जी के पूजन से धन, वैभव, सुख, संपत्ति कि प्राप्ति होती हैं।

दीपावली के दिन किये जाने वाले मंत्र-यंत्र-तंत्र का प्रयोग अत्यधिक प्रभावी माना जाता हैं। दीपावली अर्थातः दीपकों कि माला।

दीपावली के दिन प्रत्येक व्यवसाय-नौकरी से जुडे व्यक्ति अपने व्यवायीक स्थान एवं घर पर मां लक्ष्मी का विधिवत पूजन कर धन कि देवी लक्ष्मी से सुख-समृद्धि कि कामना करते हैं।

पूजन सामग्री :
महालक्ष्मी पूजन में केसर, कूमकूम, चावल, पान, सुपारी, फल, फूल, दूध, बताशे, सिंदूर, मेवे, शहद, मिठाइयां, दही, गंगाजल, धूप, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, कलावा(मौली), नारियल और तांबे का कलश।

पूजन विधि :
भूमि को गंगाजल इत्यादी से शुद्ध करके नवग्रह यंत्र बनाएं। यंत्र के साथ ही तांबे के कलश में गंगाजल, दूध, दही, शहद, सुपारी, लौंग आदि डालकर कलश को लाल कपड़े से ढककर एक जटा युक्त नारियल मौली से बांधकर रख दें। नवग्रह यंत्र के पास चांदी का सिक्का और लक्ष्मी गणेश कि प्रतिमा स्थापित कर पंचामृत से स्नान कराकर स्वच्छ लाल कपड़े से पोछ कर लक्ष्मी गणेश को चंदन, अक्षत अर्पित करके फल-फूल आदि अर्पित करें और प्रतिमा के दाहिनी ओर शुद्ध घी का एक दीपक एवं बाई और तेल (मिठेतेल) का एक दीपक जलाएं।
पवित्र आसन पर बैठकर स्वस्ति वाचन करें।

गणेश जी का स्मरण कर अपने दाहिने हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, द्रव्य आदि लेकर गणेश, महालक्ष्मी, कुबेर आदि देवी-देवताओं के विधिवत पूजन का संकल्प करें।
सर्वप्रथम गणेश और लक्ष्मी का पूजन करें। उसके पश्चयात षोडशमातृका पूजन व नवग्रह पूजन कर अन्य देवी-देवताओं का पूजन करें।

दीपक पूजन :
दीपक जीवन से अज्ञान रुपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक हैं। दीपक को इश्वर का तेजस्वी रूप मान कर इसकी पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय अंतःकरण में पूर्ण श्रद्धा एवं शुद्ध भावना रखनी चाहिए। दीपावली के दिन पारिवारिक परंपराओं के अनुसार तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा इनसे अधिक दीपक प्रज्वलित करके एक थाली में रखकर कर पूजन करने का विधान हैं।

उपरोक्त पूजन के पश्चयात घर कि महिलाएं अपने हाथ से सोने-चांदी के आभूषण इत्यादि सुहाग कि संपूर्ण सामग्रीयां लेकर मां लक्ष्मी को अर्पित करदें। अगले दिन स्नान इत्यादि के पश्चयात विधि-विधान से पूजन के बाद आभूषण एवं सुहाग कि सामग्री को मां लक्ष्मी का प्रसाद समजकर स्वयं प्रयोग करें। एसा करने से मां लक्ष्मी कि कृपा सदा बनी रहती है।

जीवन में सफलता एवं आर्थिक स्थिति में उन्नति के लिए सिंह लग्न अथवा स्थिर लग्न का चुनाव कर श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

दीपावली पूजन के समय गणेश एवं लक्ष्मी के साथ विष्णु जी का पूजन अवश्य करें जिस्से घरमें स्थिर लक्ष्मी का निवास हो सके। लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर विष्णु जी और बाईं ओर गणेश जी कि स्थापना करनी चाहिए।

स्थिर लक्ष्मी कि कामना हेतु दक्षिणावर्ती शंख, मोती शंख, गोमती चक्र इत्यादि को शास्त्रों में लक्ष्मी के सहोदर भाई माना गया हैं। इन दुर्लभ वस्तुओं कि स्थापना करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।
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