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गुरुवार, अक्तूबर 07, 2010

तुलसी सेवन करते समय रखे सावधानी

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तुलसी सेवन करते समय रखे सावधानी


हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को पवित्र माना जाता है। माना जाता है कि जिस घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा होता हैं उस घर से कलह और दरिद्रता दूर होजाते हैं। धर्मग्रंथों में तुलसी को हरि प्रिया कहा गया हैं। पुराणों में भी भगवान विष्णु और तुलसी के विवाह का वर्णन मिलता हैं।
 
आयुर्वेद शास्त्र के अनुशार तुलसी को संजीवनी बूटी भी कहा जाता है। क्योकि तुलसी के पौधे में अनेको औषधीय गुण पाये जाते हैं। तुलसी का सेवन कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाने वाला और शरीर कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला माना गया हैं। इसलिए तुलसी के पत्तों का सेवन करना लाभकारी होता हैं।

हमारे शास्त्रों में तुलसी के पत्तों का उचित तरीके से सेवन करने का वर्णन किया गया हैं। जिसका पालन न करने पर यही तुलसी के पत्ते का सेवन हानिकारक भी हो सकते हैं। तुलसी सेवन का शास्त्रोक्त तरीका हैं कि जब भी तुलसी के पत्ते मुंह में रखें, उन्हें दांतों से न चबाकर सीधे ही निगल लेने चाहिये।

इसका विज्ञान कारण हैं, कि तुलसी के पत्तों में पारा (धातु) के अंश होते हैं। जिस कारण तुलसी चबाने पर बाहर निकलकर दांतों कि सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे दंत और मुख रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

यदि तुलसी के पत्ते चबाकर खाने कि आत्याधिक आवश्यकता होतो, तुलसी सेवन के पश्चयात तुरंत कुल्ला कर लें। क्योकि इसका अम्ल दांतों के एनेमल को खराब कर देता हैं।

इसलिए ध्यान रहे कि विष्णुप्रिया की आराधना कर धर्म लाभ तो पाएं लेकिन उसका सेवन सावधानी से कर स्वास्थ्य लाभ भी पाएं।

तुलसी के प्रकार:
तुलसी दो तरह की होती है। काली तुलसी व कपूर तुलसी (बेल तुलसी)

तुलसी सेवन के लाभ
• तुलसी भोजन को शुद्ध करने वाला माना जाता हैं, इसी कारण ग्रहण लगने के पूर्व भोजन में डाला जाता हैं जिससे सूर्य या चंद्र कि विकृत किरणों का कुप्रभाव भोजन पर न पडे।
• तुलसी के पत्तो को मृत व्यक्ति के मुख में डाला जाता हैं, धार्मिक मत के अनुसार उस व्यक्ति को मोक्ष कि प्राप्ति होती हैं।
• तुलसी रक्त कि कमी के लिए रामबाण हैं। तुलसी के नियमित सेवन से हीमोग्लोबीन तेजी से बढ़ता हैं, शारीर कि स्फूर्ति बनी रहती हैं।
• तुलसी के सेवन से अस्थि भंग(टूटी हड्डियां) शीघ्रता से जुड़ जाती हैं।
• गृह निर्माण के समय नींव में घड़े में हल्दी से रंगे कपड़े में तुलसी कि जड़ रखने से भवन पर बिजली गिरने का डर नहीं होता।
• तुलसी कि सेवा करने वाले व्यक्ति को कभी चर्म रोग नहीं, चर्म रोग हैं तो उसमें सुधार होता हैं।

उपयोग में सावधानी बरतें-
• तुलसी कि प्रकृति गर्म हैं, शरीर से गर्मी निकालने के लिये। तुलसी को दही या छाछ के साथ सेवन करने से, उष्ण गुण हल्के हो जाते हैं।
• तुलसी संध्या एवं रात्री में नहीं तोड़ें, एका करने से शरीर में विकार उत्पन्न होते हैं। क्योकि अंधेरे में तुलसी से उठने वाली विद्युत तरंगे तीव्र हो जाती हैं।
• तुलसी के सेवन के बाद दूध पीने से चर्म रोग होता हैं।
• तुलसी के साथ दूध, नमक, प्याज, लहसुन, मूली, मांसाहार, खट्टे पदार्थ सेवन करना हानिकारक होता हैं।
• तुलसी के पत्ते दांतो से चबाकर ना खायें, अगर खायें हैं तो तुरंत कुल्लाकर लें। कारण इसका अम्ल दांतों के एनेमल को खराब कर देता है।

तुलसी सेवन का तरीका
• तुलसी के प्रातः खाली पेट सेवन से अत्याधिक लाभ प्राप्त होता है।
• तुलसी के पत्तों को या किसी भी अंग को सुखाना हो तो केवल छाया में सुखाएं। धुप में सुखाने से तुलसी के गुणों में कमी आती हैं।
• तुलसी के फायदे को देखते हुए एक साथ अधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक होता हैं।

अन्य लाभ
• तुलसी की माला धारण करने वाले व्यक्ति को टांसिल में लाभ होता।
• स्त्री रोग- मासिक धर्म, श्वेत प्रदर यदि मासिक धर्म ठीक से नहीं आता तो एक ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो इस काढ़े को पी जाएं, मासिक धर्म खुलकर होगा।
• मासिक धर्म के दौरान यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस सेवन करें।
• तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के उबले पानी के साथ सात दिन पीने से प्रदर रोग ठीक होगा। इस दौरान दूध भात ही सेवन करें।
• तुलसी के बीज पानी में रातभर भिगो दें। सुबह मसलकर छानकर मिश्री के मिलाकर सेवन करें। प्रदर रोग ठीक होता हैं।
• तुलसी के रस में शहद मिलाकर नियमित कुछ दिनों तक सेवन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती हैं।
• तुलसी के पत्तों का दो तीन चम्मच रस प्रातःकाल खाली पेट सेवन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
• तुलसी कि पिसी पत्तियों में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य एक बार सेवन कर ने से शरीर निरोगी रहता हैं, चहरे पर चमक आती हैं।पानी में तुलसी के पत्ते डालकर भिगोकर रखने से एवं यह पानी का सेवन करने से यह टॉनिक का काम करता हैं।

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नोट: कृप्या तुलसी का प्रयोग या सेवन करने पूर्व योग्य जानकार से उचित परामर्श अवश्य प्राप्त करें। उपरोक्त वर्णित सभी जनकारी अनुभव एवं अनुशंधान के आधार पर लिखी गई हैं, जनकारी द्वारा किये जाने वाले प्रयोग या उपाय कि प्रामाणिकता एवं लाभ-हानी कि जिन्मेदारी कार्यालय या संपादक कि नहीं हैं।
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