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सोमवार, अक्तूबर 24, 2011

धनत्रयोदशी पर यमदीपदान क्यों किया जाता हैं?

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धनत्रयोदशी पर यमदीपदान क्यों किया जाता हैं?
शास्त्रोंक्त मत के अनुशार धनत्रयोदशी के किये जाने वाले कर्मो में यमदीपदान को विशेष प्रमुखता दी जाती हैं। लेकिन  धनत्रयोदशी पर यमदीपदान क्यों किया जाता हैं इस के पीछे छुपी धार्मिक मान्यता से कम लोग ही परीचित होंगे!
हिन्दू धर्म में किये जाने वाली प्रत्येक व्रत-तयोहार, उत्सव, पूजन विधि-विधान, इत्यादि के पीछे कोई न कोई पौराणिक कथा अवश्य जुड़ी होती हैं । इसी प्रकार धनत्रयोदशी पर यमदीपदान करना भी इसी प्रकार पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ हैं। स्कन्दपुराण में वैष्णवखण्ड के अन्तर्गत कार्तिक मास महात्म्य में इससे सम्बन्धित पौराणिक कथा का संक्षिप्त उल्लेख किया गया हैं। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
पौराणिक कथा के अनुशार एक बार यमदूत बालकों एवं युवाओं के प्राण हरते समय परेशान हो उठे। यमदूत को बड़ा दुःख हुआ कि वे बालकों एवं युवाओं के प्राण हरने का कार्य करते हैं, परन्तु यमदूत करते भी क्या? उनका कार्य ही प्राण हरना ही हैं। यमदूत अपने कर्तव्य से वे कैसे विमुख होते? GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
 यमदूत के लिए एक और कर्तव्यनिष्ठा का प्रश्न था, दुसरी ओर जिन बालक एवं युवाओं का प्राण हरकर लाते थे, उनके परिजनों ……………..>>
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यमदूत के मुख से इतना सुनकर धर्मराज बोले दूतगण तुमने बहुत अच्छा प्रश्न किया हैं। इससे मृत्यु लोकवासियों का कल्याण होगा। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रतिवर्ष प्रदोषकाल में जो अपने घर के दरवाजे पर निम्नलिखित मन्त्र से उत्तम दीप देता हैं, वह अपमृत्यु होने पर भी यहॉं ले आने के योग्य नहीं है। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
मृत्युना पाश्दण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति॥
उसके बाद से ही अपमृत्यु अर्थात् असामयिक मृत्यु से बचने के उपाय के रूप में धनत्रयोदशी पर यम के निमित्त दीपदान एवं नैवेद्य समर्पित करने का कर्म प्रतिवर्ष किया जाता हैं। GURUTVA KARYALAY | GURUTVA JYOTISH
यमराज की सभा: यमराज की सभा का वर्णन करते हुए ग्रंथ कारों ने लिखा हैं कि देवलोक की चार प्रमुख सभाओं में से एक है यमसभा इस सभा का निर्माण विश्वकर्मा जी ने किया था। यमसभा अत्यन्त विशाल सभा है, इसकी 100 योजन लम्बाई एवं 100 योजन चौड़ाई है। ……………..>>
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यमसभा में अनेक राजा, ऋर्षि और ब्रह्मर्षि यमदेव की उपासना करते रहते हैं। ययाति, नहुश, पुरु, कार्तवीर्य, अरिष्टनेमी, कृति, निमि, मान्धाता, प्रतर्दन, शिवि आदि राजा मृत्यु के उरान्त यहां बैठकर धर्मराज की उपासना करते हैं। कठोर तपस्या करने वाले, उत्तम व्रत का पालन करने वाले सत्यवादी, शान्त, संन्यासी तथा अपने पुण्यकर्म से शुध्द एवं पवित्र महापुरुषों का ही यमसभा में प्रवेश होता हैं। GURUTVA ……………..>>
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संपूर्ण लेख पढने के लिये कृप्या गुरुत्व ज्योतिष -पत्रिका अक्टूबर -2011 का अंक पढें
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OCT-2011


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