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शुक्रवार, दिसंबर 03, 2010

प्रेम विवाह योग

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प्रेम विवाह योग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों कि स्थिती एवं द्रष्टि लड़के और लड़की के बीच प्रेम को विवाह के परिणित सूत्र बांधने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जब किसी लड़के और लड़की के बीच प्रेम होता हैं और वे दोनों एक साथ अपना जीवन बीताने के स्वप्न देखते हैं और विवाह करना चाहते हैं। इसी लिये प्रेम में कोई वक्ति अपनी मंजिल पाने में सफल होगा या असफल अर्थात उसकी शादी उस्से होगी या नहीं। व्यक्ति अपने प्रेम को विवाह के बंधन में कामयाब होगा नाकामयाब ? एसी स्थितीओं में ज्योतिष विद्या के जानकार इसके लिए ग्रह योग को जिम्मेदार मानते हैं।

वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम का कारक ग्रह माना गया हैं।
विद्वानो के मत से जन्म कुंडली में शुक्र का प्रभाव लग्न, पंचम, सप्तम तथा एकादश भावों पर होने पर व्यक्ति प्रेमी स्वभाव का होता हैं।

व्यक्ति का प्रेमी स्वभाव का होना एक अलग बात हैं और प्रेम का विवाह में परिणत होना दूसरी बात हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचम भाव प्रेम का भाव होता हैं और सप्तम भाव विवाह का भाव होता हैं। पंचम भाव का सम्बन्ध जब सप्तम भाव से होता है तब दो प्रेमी वैवाहिक सूत्र में बंधते हैं। नवम भाव से पंचम का शुभ सम्बन्ध होने पर भी दो प्रेमी पति पत्नी बनकर दांपत्य जीवन का सुख प्राप्त करते हैं।

• यदि जन्म कुंड़ली में पंचम भाव का सप्तम भाव से सम्बन्ध होता हैं, तों व्यक्ति का प्रेम वैवाहिक सूत्र में बंधता हैं।
• जन्म कुंड़ली में नवम भाव और लग्न का शुभ सम्बन्ध होने से व्यक्ति अपने प्रेम को वैवाहिक सूत्र में बंध कर सफल बनाये रखने का प्रयास करता हैं।
• इन योगों का कुंडली में होने से हि व्यक्ति का केवल प्रेम विवाह……………..>>


प्रेम विवाह को नवमांश कुंडली से भी देखा जाता हैं।
• यदि जन्म कुंडली प्रेम विवाह योग नहीं हैं और नवमांश कुंडली में सप्तमेश और नवमेश की युति होती हों, तो प्रेम विवाह की संभावना अत्याधिक प्रबल होती हैं।
• यदि जन्म कुंड़ली में शुक्र लग्न में लग्नेश के साथ में स्थित तो प्रेम विवाह के योग प्रबल होते हैं।
• शास्त्रों में शनि और केतु कि युतिको पाप ग्रह माना जाता हैं। पर सप्तम भाव में शनि और केतु कि युतिको प्रेमियों के लिए ……………..>>


सप्तमेश में नवमेश कि महादशा या अन्तरदशा का पंचमेश
के साथ संबंध हों, तो इस योग में प्रम विवाह होने कि
संभावना अधिक होती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रेम विवाह से संबंधित तीन कारक ग्रह सूर्य, बुध और शुक्र होते हैं। एसा माना जाता हैं इन तीनों ग्रहों के कारण हि कोई व्यक्ति को किसी से प्रेम होता हैं।
जन्म कुंडली में सूर्य, बुध और शुक्र तीनो कि युति हों, तो व्यक्ति के प्रेम विवाह होने कि संभावना अधिक होती हैं।
• जन्म कुंडली में सूर्य, बुध और शुक्र क्रमशः अलग-अलग भावों में स्थित होने से प्रेम होता हैं लेकिन विवाह नहीं होता।
• जन्म कुंडली में सूर्य, बुध और शुक्र तीनो ग्रहों में से किसी दो ग्रहों कि युति बन रही हों एवं दोनो के साथ में अन्य एक ग्रह स्थित हों तो बडी ……………..>>



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