Search

लोड हो रहा है. . .

सोमवार, अप्रैल 11, 2011

मंत्र जप क्या हैं?

मन्त्र जप क्यो करते हैं?, क्यो किया जाता हैं मंत्र जप?, मंत्र जप से क्या लाभ होता हैं?, मंत्र जप का मतलब क्या हैं?, What are chanting the mantra?, What is the meaning of chanting mantras?, Why are chanting the mantra?, Why is chanting the mantra?, What are the benefits of chanting mantras?,What are chant the mantra?, What is the meaning of japa mantras?, Why are chanting chants?, Why is chanting the spells?, What are the advantage of chanting mantras?,

मंत्र जप क्या हैं?

राम चरित मानस के अनुशार:
कलियुग केवल नाम आधारा, जपत नर उतरे सिंधु पारा।
इस कलयुग में भगवान का नाम ही एक मात्र आधार हैं। जो लोग भगवान के नाम का जप करते हैं, वे इस संसार सागर से तर जाते हैं।

जप अर्थात क्या हैं?
ज+प= जप
ज = जन्म का नाश,
प = पापों का नाश।

जन्मों जन्म के पापो का जो नाश करता हैं उसे जप कहते हैं।
उसे जप कहते हैं, जो पापों का नाश करके जन्म-मरण करके चक्कर से छुड़ा दे ।
जप परमात्मा के साथ सीधा संबंध जोड़ने की एक कला का नाम हैं ।
इसीलिए कहा जाता हैः
अधिकम् जपं अधिकं फलम्।

तुलसीदास जी ने मंत्र जप की महिमा में कहा हैं।
मंत्रजाप मम दृढ़ बिस्वासा।
पंचम भजन सो वेद प्रकासा।।
(श्रीरामचरित. अर. कां. 35-1)

मंत्र का अर्थ ही हैः
मननात् त्रायते इति मंत्रः।
अर्थात: जिसका मनन करने से जो त्राण करे, रक्षा करे उसे मंत्र कहते हैं।
इससे जुडे अन्य लेख पढें (Read Related Article)


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें