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शनिवार, सितंबर 04, 2010

पंच महाभूत तत्व एवं वास्तु (भाग:३)

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पंच महाभूत तत्व एवं वास्तु (भाग:३)

अग्नि
अग्नि एवं तेज ऊर्जा के कुदरति स्त्रोत हैं। ऊर्जा के बिना मानव जीवन का कोई अस्तित्व नहीं हैं। समग्र ब्रह्मांड में ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत एक मात्र सूर्य हैं, उस के अलावा कोई और प्रमुख स्त्रोत का अस्तित्व नहीं हैं। यही कारण हैं कि आज सूर्य के तेज से ही हमारा जीवन सुचारु रुप से प्रकाशमान हैं। वायु मंडल में व्याप्त वायुकण (धूल) और बादल इत्यादि सभी में अपनी चुम्बकीय शक्ति होती हैं जिसके कारण सब एक दूसरे की ओर आकर्षित होते रहते हैं। इसी आकर्षित होने के कारण कण एक दूसरे से पास आते और दूर होते रहते हैं, जिसके बल के कारण हि ऊर्जा उत्पन्न होती हैं। इस्से उत्पन्न होने वाली उर्जा को हि अग्नि कहा जाता हैं।

अग्नि का हमारे जीवन में बहुत महत्व हैं, इस महत्व से हर व्यक्ति भली भाति वाकिफ हैं। हमारी भारतिय संस्कृति के धार्मिक कार्यक्रम में भी अग्नि का विशेष महत्व हैं। यज्ञ, हवन, विवाह, संस्कार जेसे अन्य धार्मिक कर्मकांडो में बिना अग्नि के बिना संपन्न होना असंभव सा प्रतित होता हैं।

इसी कारण भारतिय सभ्यताओं में अग्नि को देव कहा गया हैं। अग्निको देवता मनकर उसका पोजन किया जाता हैं। क्योकि एसा माना जाता हैं, कि यदि अग्नि देव क्रोधित होजाये तो बड़े-बड़े महलों व ऊंचे-ऊंचे भवनों को धूलमें उडादे और राख बनादे। इस लिये अग्नि का पूजन कर उन्हें शांत रखने का प्रयास किया जाता हैं।

हमारे प्रमुख धर्म ग्रंथो में एक ऋग्वेद का सर्व प्रथम मंत्र ही अग्नि से शुरू होता है।

मंत्र:
अग्निमीले पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम्॥

भावार्थ:- सर्वप्रथम आराधन किए जाने वाले, यज्ञ को प्रकाशित करने वाले, ऋतुओं के अनुसार यज्ञ सम्पादित करने वाले, देवताओं का आह्वान करने वाले तथा धन प्रदान करने वालों में सर्वश्रेष्ठ अग्नि देवता की मैं स्तुति करता हूं।

भारतीय शास्त्रो मे उल्लेख मिलता है, कि अग्नि का संबंध मनुष्य के जन्म से लेकर मरण तक होता हैं। इसी कारण से वास्तु के पंच तत्वो में अग्नि तत्व भी समाया हुवा हैं।

यदि भवन में अग्नि तत्व कि अधिकता हो जाये, तो भवन में निवास कर्ता के बिच में मानसिक तनाव एवं परस्पत वैमनस्य रहता हैं। निवास कर्ता को छोटी-छोटी बातो पर गुस्सा आना एक स्वाभाविक लक्षण सरलता से दिखाई देता हैं। यदि आपके घर में भी एसी समस्या होती हैं। तो विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य ले।

आप गुरुत्व कार्यालय द्वारा परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
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