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शनिवार, सितंबर 11, 2010

मनोवांछित फलो कि प्राप्ति हेतु सिद्धि प्रद गणपति स्तोत्र

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मनोवांछित फलो कि प्राप्ति हेतु सिद्धि प्रद गणपति स्तोत्र


प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करने से मनोवांछित फल शीघ्र प्राप्त होते हैं।
मनोवांछित फल प्राप्त करने हेतु गणेश‌जी के चित्र या मूर्ति के सामने मंत्र जाप कर सकते हैं। पूर्ण श्रद्धा एवं पूर्ण विश्वास के साथ मनोवांछित फल प्रदान करने वाले इस स्तोत्र का प्रतिदिन कम से कम 21 बार पाठ अवश्य करें।

अधिकस्य अधिकं फलम्।
जप जितना अधिक हो सके उतना अच्छा है। यदि मंत्र अधिक बार जाप कर सकें तो श्रेष्ठ।

प्रातः एवं सायंकाल दोनों समय करें, फल शीघ्र प्राप्त होता है।

कामना पूर्ण होने के पश्चयात भी नियमित स्त्रोत ला पाठ करते रहना चाहिए। कुछ एक विशेष परिस्थिति में पूर्व जन्म के संचित कर्म स्वरूप प्रारब्ध की प्रबलता के कारण मनोवांछित फल की प्राप्ति या तो देरी संभव हैं!

मनोवांछित फल की प्राप्ति के अभाव में योग्य विद्वान की सलाह लेकर मार्गदर्शन प्राप्त करना उचित होगा। अविश्वास व कुशंका करके आराध्य के प्रति अश्रद्धा व्यक्त करने से व्यक्ति को प्रतिकूल प्ररिणाम हि प्राप्त होते हैं। शास्त्रोक्त वचन हैं कि भगवान (इष्ट) कि आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

मंत्र:-

गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥

विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥

विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌।

(पद्म पु. पृ. 61।31-33)

भावार्थ: गणपति, विघ्नराज, लम्बतुण्ड, गजानन, द्वैमातुर, हेरम्ब, एकदन्त, गणाधिप, विनायक, चारुकर्ण, पशुपाल और भवात्मज- गणेशजी के यह बारह नाम हैं। जो व्यक्ति प्रातःकाल उठकर इनका नियमित पाठ करता हैं, संपूर्ण विश्व उनके वश में हो जाता हैं, तथा उसे जीवन में कभी विघ्न का सामना नहीं करना पड़ता।
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