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मंगलवार, सितंबर 07, 2010

पंच महाभूत तत्व एवं वास्तु (भाग:४)

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पंच महाभूत तत्व एवं वास्तु (भाग:४)

वायु
समग्र ब्रह्मांड वायु मंडल से भरा पडा हैं, एवं हमारे जीवन मे भी वायु तत्व का अत्याधिक महत्व हैं।
क्योकि साधारण व्यक्ति अन्य किसी तत्व के बिना कुछ घंटे बिता सकती हैं, लेकिन वायु तत्व के बिना व्यक्ति चंद मिनिट भी बडी मुशकील से बिता सकते हैं। क्योकि जीवन को टिकाए रखने के लिये हमारा श्वास लेना अति आवश्यक हैं एवं यदि इस क्रम में रुकावट आजये या विच्छेदन होजाये तो हमारा जीवन समाप्त हो जाता हैं। मनुष्य हि क्यो प्राणी एवं पेड़-पौधे भी वायु के बिना क्षीण होकर समाप्ती कि और जाने लगते हैं। इस लिये वायु तत्व का संतुलन सृष्टि को सुव्यवस्थित रुप में चलाने के लिये वायु क योगदान अधिक महत्वपूर्ण है।

मनुष्य के जीवन में प्रत्येक क्रिया-कलाप में कहीं न कहीं पंच महाभूतों का संयोग अवश्य पाया जाता हैं। इसी लिये अन्य किसी ग्रह पर आजतक लम्बे समय तक मनुष्य को पैर टिकाना मुश्किल नजर आरहा हैं, इसी कारण से वहां जीवन संभव नहीं हो पाया हैं। 

इसी तरहा वास्तु में वायु तत्व का अधिक महत्व हैं।

यदि घर में वायु तत्व के संतुलन में गडबडी होतो भवन में निवास कर्ता को धन कि कमी एवं विभिन्न प्रकार के रोग देखने को मिलते हैं। यदि घर में वायु तत्व कि अधिकता होतो तो व्यक्ति के विचारों में स्थिरता कि कमी पाई जाती हैं, व्यक्ति एक साथ अनेक कार्य करने हेतु प्रेरिततो होता हैं परंतु उसे पूर्ण करने हेतु उचित परिश्रम नहीं कर पाता। इस लिये घर में वायु तत्व का संतुलन बनाये रखे।


आकाश
आकाश तत्व का कोई अंत नहीं हैं, वह अनंत हैं। आकाश तत्व के भीतर अंदर नजा ने कितनी आकाश गंगाए समाइ हुइ हैं, जिनमें सूर्य के समान या उस्से बडे सैकड़ों सूर्य हैं। हमारे जीवन मे सुख-समृद्धि एंव शांति प्राप्त करने में आकाश का महत्वपूर्ण स्थान होता हैं। इस लिये व्यक्ति को अपने भवन में पंच महाभूत तत्व का उचित सम्तुलन बनाए रखना चाहिये जिस्से हमारे जीवन मे हम सुख-समृद्धि-शांति को प्राप्त कर उन्नति के शिखर को प्राप्त कर सके।

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