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शनिवार, सितंबर 11, 2010

अमंगल हि नही मंगलकारी भी है मंगल

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अमंगल हि नही मंगलकारी भी है मंगल



भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक आस्था कि द्रष्टि से भगवान गणपतिजी का हमारे जीवन में विशेष महत्व हैं। ठिक उसी प्रकार से ज्योतिष शास्त्र कि द्रष्टि से भी गणेशजी विशेष महत्व रखते हैं। ज्योतिष के अनुशार बारह राशि चक्र में सबसे प्रथम जो राशि आति हैं वह हैं मेष राशि हैं। मेष राशिका स्वामी ग्रह मंगल हैं। जिस प्रकार गणेशजी का सर्व प्रथम स्मरण-पूजन-अर्चन होता हैं। इसी प्रकार मंगल ग्रह के आधिपत्य वाली मेष राशि भी राशि चक्र में अन्य ग्रहो कि राशि से सर्व प्रथम आती हैं। जिस प्रकार गणेशजी गणो के पति अर्थात गणपति हैं, इसी प्रकार मंगल ग्रह को भी ज्योतिष में सेनापति कि सज्ञा दिगई हैं।

जेसे मंगल का रंग लाल या सिंदूर के रंगके समान हैं, इस लिये भगवान गणेश को भी सिंदूर हि चढाया जाता हैं। इस लिये गणेशजी को मंगलनाथ या मंगलमूर्ति भी कहाजाता हैं। मंगल कुमार को गणेशजी नें मंगलवार के दिन दर्शन देकर उनहे मंगल ग्रह होने का वरदान दिया था इसी के कारण ही भगवान गणेश को मंगल मूर्ति कहा जाता हैं और मंगलवार के दिन मंगलमूर्ति गणेश का पूजन किया जाता हैं। विद्वानो ने देवी महाकाली जी का पूजन भी मंगलवार को श्रेष्ठ फल देने वाला माना हैं।

मंगल ग्रह कि उत्पत्ति शिव से मानी गई हैं। इसी कारण मंगल में शिव के समान तेज हैं। मंगल के प्रभाव वाले जाताक आकर्षक, तेजस्वी, चिड़चिड़े स्वाभाव, समस्याओं से लडऩे की शक्ति विशेष रूप से प्रभावमान होता हैं। विकट से विकट समस्याओं में घिरे होने के बावजूद जातक अपना धैर्य नहीं छोड़ते हैं। ज्योतिष ग्रथो में मंगल को भले ही क्रूर ग्रह बताया गया हैं, मंगल केवल अमंगलकारी हि नहीं हैं यह मंगलकारी भी होता हैं।

नौमी भौम वार मधुमासा।
अवघपूरी यह चरित प्रकाशा।।(राचमा )

भगवान राम का जन्म मंगलवार को ही हुआ था। श्री रामभक्त हनुमानजी का जन्म भी मंगलवार को ही हुआ था। इसलिए हनुमानजी का पूजन मंगलवार को विशेष रूप से होता हैं।

मंगल के दिन कर्ज लेने का कार्य वर्जित माना जाता हैं। मंगलवार को बाल-दाढी, नाखून इत्यादि अपवित्र कार्यों को निषेध मना जाता हैं।

जातक में मंगल+चंद्र युति हो या मंगल और चंद्र पर परस्पर एक दूसरे की दृष्टि हो तो जातक रंक से राजा बन जाता हैं। अत: मंगल केवल एक क्रूर ग्रह ही नहीं मंगलकारी ग्रह भी है।
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