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गुरुवार, फ़रवरी 11, 2010

शिवाष्टकम

Shiva Ashtakam शिव अष्टकम्

शिवाष्टकम


तस्मै नम: परमकारणकारणाय, दिप्तोज्ज्वलज्ज्वलित पिङ्गललोचनाय ।
नागेन्द्रहारकृतकुण्डलभूषणाय, ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरदाय नम: शिवाय ॥ १ ॥

श्रीमत्प्रसन्नशशिपन्नगभूषणाय, शैलेन्द्रजावदनचुम्बितलोचनाय ।
कैलासमन्दरमहेन्द्रनिकेतनाय, लोकत्रयार्तिहरणाय नम: शिवाय ॥ २ ॥

पद्मावदातमणिकुण्डलगोवृषाय, कृष्णागरुप्रचुरचन्दनचर्चिताय ।
भस्मानुषक्तविकचोत्पलमल्लिकाय, नीलाब्जकण्ठसदृशाय नम: शिवाय ॥ ३ ॥

लम्बत्स पिङ्गल जटा मुकुटोत्कटाय, दंष्ट्राकरालविकटोत्कटभैरवाय ।
व्याघ्राजिनाम्बरधराय मनोहराय, त्रिलोकनाथनमिताय नम: शिवाय ॥ ४ ॥

दक्षप्रजापतिमहाखनाशनाय, क्षिप्रं महात्रिपुरदानवघातनाय ।
ब्रह्मोर्जितोर्ध्वगक्रोटिनिकृंतनाय, योगाय योगनमिताय नम: शिवाय ॥ ५॥

संसारसृष्टिघटनापरिवर्तनाय, रक्ष: पिशाचगणसिद्धसमाकुलाय ।
सिद्धोरगग्रहगणेन्द्रनिषेविताय, शार्दूलचर्मवसनाय नम: शिवाय ॥ ६ ॥

भस्माङ्गरागकृतरूपमनोहराय, सौम्यावदातवनमाश्रितमाश्रिताय ।
गौरीकटाक्षनयनार्धनिरीक्षणाय, गोक्षीरधारधवलाय नम: शिवाय ॥ ७ ॥

आदित्य सोम वरुणानिलसेविताय, यज्ञाग्निहोत्रवरधूमनिकेतनाय ।
ऋक्सामवेदमुनिभि: स्तुतिसंयुताय, गोपाय गोपनमिताय नम: शिवाय ॥ ८ ॥
॥इति श्री शिवाष्टकम संपूर्ण॥
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